MP आज भी अपने अंदर कई ऐसी कहानियां समेटे हुए है, जो लोगों को आज भी उसकी और आकर्षित करती है स्थानीय मान्यताओं के अनुसार माध्य प्रदेश के राजगढ जिले के माचलपुर नगर जिससे पहले हिमाचल नगरी के नाम से जाना जाता था। और इससे माता पार्वती का मायका माना जाता है।यही वजह है कि यहां मौजूद कई प्राचीन स्थाल भगवान शिव और पार्वती के विवाह से जुड़े होने का दावा करते हैं। यह स्थित बागा बलडी को सबसे महत्वपूर्ण स्थाल माना जाता है। मान्यता है कि यहीं भगवन शिव और पार्वती ने सात फेरे लिए थे।
साथ फेरे स्थाल
साथ फेरों स्थाल शिव पार्वती के विवाह से जुड़ा सबसे महत्त्वपूर्ण स्थाल माना जाता है। यह साथ फेरों का स्थाल बना हुआ है जिसके बीच शिवजी और पार्वती जी की प्रतिमाएं स्थापित है। श्रद्धालु नागें पैर साथ फेरे लगा के पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यह सच्चे मन से प्राथना करने पर मनोकामनाएं पूरी होती है। सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर यह मेले जेसा माहौल रेहता है।

बड़ा तालाब
बागा बलडी के रास्ते में स्थित बड़ा तालाब भी विशेष महत्व रखता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार शिव पार्वती विवाह के समय भोजन के लिए तैयार किए गए चावल इसी तालाब में धोए गए थे। लोगों का कहना है कि तालाब के एक हिस्से का पानी आज भी दूसरे हिस्से से अलग दिखाई देता है। इस मान्यताओं के कारण यह तालाब विशेष माना जाता है। दूर-दूर से लोग इसे देखने और इसके बारेमे जानने आते हैं माचलपुर बस एक नगर नहीं बल्कि आस्था, इतिहास का संगम है। शिव पार्वती के विवाह से जुड़ी मान्यताओं इस स्थान को अलग पहचान दी है लोगों की अस्था और विश्वास ने माचलपुर को एक धार्मिक स्थल बना दिया है। यही कारण है कि आज भी यह नगर श्रद्धालुओ और पर्यटको के आकर्षण का केंद्र है।
