कल भारतीय महिला टीम एक समय बड़ी मुश्किलों में थी कि तभी 8 नंबर में उतरी विकेटकीपर बैटर रिचा घोष ने महज 77 बॉल्स पर 11 चौके और 4 छक्कों की मदद से 94 रन जड़ दिए। अंत में वे मात्र 6 रन से अपने पहले शतक से चूक गईं लेकिन, सभी फैन्स को कल उन्होंने टीम के संकट मोचन महेंद्र सिंह धोनी की याद दिला दी।
रिचा घोष धोनी को अपना आदर्श और गुरु मानती हैं। वह धोनी की ही तरह फिनिशर की भूमिका से प्रेरणा लेती हैं और उनकी तरह बड़े शॉट खेलने की क्षमता भी रखती हैं। बड़े शॉट्स से भरी धुआंधार बल्लेबाजी, आक्रमक विकेटकीपिंग और ठहराव – संयम से बड़ी पारी को संवारने वाली उनकी क्वालिटी की वजह से लोग उन्हें ‘लेडी धोनी’ भी कहते हैं। जिस तरह धोनी पूरी टीम के लड़खड़ाने के बाद नैया पार लगाया करते थे ठीक वैसा ही कार्य रिचा ने भी कर के दिखाया।
इस पारी की बदौलत पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से आने वाली रिचा ने कई रिकॉर्ड भी बनाये। कल साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारतीय महिला टीम की शुरुआत फिर से खराब रही थी। टीम ने एक समय में बड़ी महज 102 रन पर 6 विकेट गंवा दिए थे। लग रहा था कि 150 तक भी नहीं पहुंचेंगे लेकिन, ऋचा घोष आकर डट गई। ऋचा अब वूमेन्स ODI में नंबर-8 या उससे निचली पोजीशन पर सबसे बड़ा स्कोर बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उन्होंने अमनजोत कौर (13 रन) के साथ सातवें विकेट के लिए 51 रन और स्नेह राणा (24 गेंदों पर 33 रन) के साथ आठवें विकेट के लिए 88 रन जोड़े।
सबसे तेज 1000 रन पूरे करने के मामले में भी अब रिचा की गिनती होगी। 22 वर्षीय इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने वनडे में 1000 रन पूरे करने के लिए केवल 1010 गेंदों का सामना किया। वनडे में दुनिया की सबसे तेज 1000 रन बनाने वाली बल्लेबाज का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर एश्ले गार्डनर के नाम है। उन्होंने 917 गेंदों में 1000 वनडे रन पूरे किए थे। दूसरा नाम इंग्लैंड की नैट साइवर-ब्रंट हैं, जिन्होंने 943 गेंदों में 1000 रन बनाए थे। अब तीसरा नाम रिचा का है। इस मामले में भारतीयों में वे सबसे आगे हैं।
इसके अलावा ऋचा घोष महिला वनडे वर्ल्ड कप में बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा रन बनाने वाली भारतीय खिलाड़ी भी बन गई हैं। उन्होंने फौजीह खलीली का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया जिन्होंने साल 1982 में वनडे वर्ल्ड कप में 88 रन की पारी इंग्लैंड के खिलाफ खेली थी।
आज बड़े – बड़े रिकॉर्ड बनाने वाली ऋचा घोष की अब तक की जर्नी भी बेहद दिलचस्प रही है। उन्हें क्रिकेट विरासत में मिला है ऋचा के पिता मानवेंद्र घोष भी एक क्लब क्रिकेटर और कोच थे। पिता ने ही ऋचा घोष को क्रिकेट से अवगत कराया और बैट दिया। जब वो क्लब में प्रैक्टिस के लिए जाते थे, तब ऋचा भी उनके साथ जाती थीं। ऋचा ने 4 साल की उम्र में ही बैट थाम लिया था। उस क्लब में लोग अपने बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलाने के लिए आते थे। ऋचा भी धीरे धीरे उन बच्चों के साथ वहां खेलने लगीं। ज्यादातर महिला खिलाडियों की ही तरह ऋचा घोष जहां रहती थीं वहां पर महिला क्रिकेट को लेकर कोई माहौल नहीं था। उनकी शुरुआती ट्रेनिंग लड़कों के साथ हुई है।
पिता मानवेंद्र घोष ऋचा को टेबल टेनिस खिलाड़ी बनाना चाहते थे।इसलिए उन्होंने ऋचा का एडमिशन टेबल टेनिस अकादमी में करवा दिया। वहां ऋचा का मन नहीं लगता था। फिर ऋचा ने कुछ दिन बाद अपने पिता से कहा कि वह क्रिकेट खेलना चाहती हैं।
पिता ने उन्हें कोलकाता ले जाकर ट्रेनिंग दिलाने का फैसला लिया। बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के कैंप में ऋचा भी कैंप में रहने लगी। लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर मानवेंद्र चिंतित थे इसलिए उन्होंने कुछ समय के लिए अपना बिजनेस छोड़ दिया था और बेटी के साथ ही कोलकाता में रहने लगे थे। ऋचा के पिता ने बाद में कोलकाता में ही पार्ट टाइम अंपायरिंग का काम भी शुरू कर दिया था। जब ऋचा का टीम इंडिया में सेलेक्शन हुआ, उसके बाद पिता फिर अपने पुराने कारोबार में लौट गए।
ऋचा ने 16 साल की उम्र में भारतीय टी20 टीम में डेब्यू किया। उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्राई सीरीज में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला था। फिर उसी साल उन्होंने ICC टी20 विश्व कप 2020 में भी खेला, जिसमें भारत उपविजेता रहा था। हालांकि उन्हें उसके बाद ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला।
ऋचा की पहचान टी-20 क्रिकेट में भी एक विस्फोटक बैटर के रूप में होती है। 2024 के अंत में, ऋचा ने भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए मुकाबले में महज 18 गेंदों पर पचासा जड़ दिया था। इसी के साथ उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में सबसे तेज हाफ सेंचुरी बनाने के लिचफील्ड और डेवाइन के रिकॉर्ड की बराबरी भी की थी।
