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Reading: 36 साल पहले हुए रूपकंवर सती कांड पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
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books2 0618 - The Fourth
India

36 साल पहले हुए रूपकंवर सती कांड पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

18 साल की रूप कंवर ने पति की चिता के साथ आत्मदाह किया था।

Last updated: अक्टूबर 9, 2024 6:03 अपराह्न
By Divya 2 वर्ष पहले
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5 Min Read
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राजस्थान में 36 साल पहले हुआ रूपकंवर सती कांड एक बार फिर से सुर्खियों में है। 4 सितंबर 1987 को सीकर जिले के दिवराला गांव में अपने पति की मौत के बाद उसकी चिता पर जलकर 18 साल की रूप कंवर ‘सती’ हो गई थी। अब कांड में आज यानी बुधवार को फैसला आ गया है। इस मामले में सभी 8 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। इस मामले के 8 आरोपी श्रवण सिंह, महेंद्र सिंह, निहाल सिंह, जितेंद्र सिंह, उदय सिंह, नारायण सिंह, भंवर सिंह और दशरथ सिंह हैं।

क्या थी राजस्थान की रूप कंवर की घटना ?

राजस्थान के जयपुर की रहने वाली 18 साल की रूप कंवर की शादी सीकर जिले के दिवराला में माल सिंह शेखावत से हुई थी। शादी के 7 महीने बाद माल सिंह की बीमारी से मौत हो गई। तब कहा गया रूप कंवर ने पति की चिता पर सती होने की इच्छा जताई है। इसके बाद 4 सितंबर 1987 को वो सती हो गई। गांव के लोगों ने उसको सती मां का रूप दे दिया और मंदिर बनवा दिया। लेकिन इसके बाद पूरे देश में इस घटना को लेकर हंगामा मच गया था और इसकी जांच की गई तो पाया गया कि, रूप कंवर अपनी इच्छा से सती नहीं हुई थी, बल्कि उसे मजबूर किया गया था। जिसके बाद 39 लोगों के खिलाफ हाई कोर्ट में मामला दर्ज करवाया था।

1987 के बाद राजस्थान में सती के 24 केस सामने आए थे

राजस्थान सती निरोधक कानून बनने के बाद राजस्थान में सती प्रथा के 24 केस दर्ज किए गए थे। इनमें से 13 केस साल 1987 में, 7 केस साल 1988, 2 केस साल 1989 और 1-1 केस 1993 और साल 2000 में सामने आए थे। इन सभी मामलों में कुल 151 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 129 को बरी किया जा चुका था और 9 आरोपियों पर अभी ट्रायल चल रहा है। बाकी बचे 13 आरोपियों में से कुछ की मौत हो गई और कुछ फरार चल रहे हैं। हालांकि रूप कंवर का केस सती होने का आखिरी केस है, जिसमें किसी महिला की मौत हुई है। इसके बाद दर्ज हुए मामलों में महिलाओं ने सती होने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचा लिया गया था।

बूॅंदी में सबसे पहले सतीप्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया था

राजस्थान में पहले सती प्रथा थी लेकिन 1822 ई. में बूॅंदी में सबसे पहले सतीप्रथा को गैर कानूनी घोषित किया गया था। बाद में, राजा राममोहन राय के प्रयासों से लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1829 में सरकारी अध्यादेश के ज़रिए सती प्रथा पर रोक लगाई थी। फिर 1862 के बाद पूरे राजस्थान में इस प्रथा के ख़िलाफ़ आदेश जारी हो गए। समाज सुधारक राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के ख़िलाफ़ समाज को जागरूक किया था। उनके एक अनुभव ने उन्हें इस कुरीति को खत्म करने के लिए प्रेरित किया था।दरअसल, राजा राममोहन राय किसी काम से विदेश गए थे और इसी बीच उनके भाई की मौत हो गई थी। उनके भाई की मौत के बाद सती प्रथा के नाम पर उनकी भाभी को ज़िंदा जला दिया गया था।

कौन थी राजस्थान की प्रथम और अंतिम सती?

राजस्थान में झुंझुनू की प्रसिद्ध “रानी सती” का वास्तविक नाम नारायणी देवी था। राजस्थान के अलवर जिले में नारायणी देवी का एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर है। उन्हें भगवान शिव की पहली पत्नी का अवतार माना जाता था। एक कहानी है कि, जब वह शादी के बाद अपने पति के घर जा रही थी तो उसके पति को सांप ने काट लिया था और उसकी मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद उन्हे भी सती बनना पड़ा और वह राजस्थान की पहली सती थी। वहीं 4 सितंबर 1987 को राजस्थान में 18 साल की रूप कंवर ने पति की चिता के साथ आत्मदाह कर लिया। आजाद भारत के इतिहास में किसी महिला के सती होने की ये 40वीं और आखिरी घटना थी।

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TAGGED: culturalheritage, humanrights, investigation, justice, justiceforwomen, legalhistory, rajasthan, roopkanwar, sati, thefourthindia, thefourtj, villageculture, womenempowerment, womenrights
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