नई दिल्ली में आयोजित AI Summit ने भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी मानचित्र पर नई पहचान दी है। पांच दिनों तक चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन देश की राजधानी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और इसमें दुनिया भर से आए शीर्ष उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
एआई समिट में वैश्विक भागीदारी
इस समिट में 100 से अधिक CEO, 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष और 135 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। आयोजकों के अनुसार लगभग तीन लाख लोगों ने कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराया है। सम्मेलन का उद्देश्य एआई तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, नवाचार और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत सरकार का मानना है कि AI आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक बनेगा। इसी दृष्टि से इस Summit को नीति निर्माण, निवेश और तकनीकी साझेदारी के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की AI स्थिति और संभावनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार भारत तेजी से एआई क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 33 प्रतिशत कंपनियां CEO को अपनी प्राथमिकता बना चुकी हैं। लगभग 69 प्रतिशत कंपनियां इस वर्ष एआई में निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
आंकड़े बताते हैं कि 80 प्रतिशत कंपनियां AI को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के लिए आवश्यक मानती हैं, जबकि 92 प्रतिशत कंपनियां किसी न किसी रूप में एआई का उपयोग कर रही हैं। देश में डिजिटल अवसंरचना, मजबूत आईटी उद्योग और बड़ी युवा आबादी AI विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है।
समिट में जिम्मेदार AI और डेटा सुरक्षा पर भी विशेष चर्चा हुई। नीति निर्माताओं ने इस बात पर बल दिया कि AI का विकास नैतिक मानकों और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन भारत को एआई नवाचार और नीति निर्माण के केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में एआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
