इंदौर में लगातार बढ़ रही गर्मी और उमस का असर अब केवल सामान्य स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा है। इसका प्रभाव लोगों की हड्डियों, जोड़ों और नसों पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल MY Hospital में पिछले दो महीनों के दौरान जोड़ों और नसों से जुड़ी समस्याओं के करीब 3000 मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक प्रभावित वर्ग 20 से 40 वर्ष की आयु के युवा हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी और वातावरण में बढ़ी नमी शरीर के भीतर कई प्रकार के बदलाव पैदा करती है। इन बदलावों का सीधा असर मांसपेशियों, नसों और जोड़ों पर पड़ता है, जिससे दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
गर्मी और उमस कैसे बढ़ा रही है जोड़ों का दर्द
MY Hospital के विशेषज्ञों के अनुसार जब तापमान अधिक होता है तो शरीर को ठंडा रखने के लिए पसीना अधिक निकलता है। पसीने के साथ शरीर से सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं। ये सभी तत्व मांसपेशियों और नसों के सामान्य कार्य के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो मांसपेशियों में खिंचाव, ऐंठन और कमजोरी महसूस होने लगती है। इसके साथ ही नसों पर दबाव बढ़ने लगता है और जोड़ों में दर्द की समस्या गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। डिहाइड्रेशन के कारण जोड़ों को चिकनाई देने वाले द्रव की मात्रा प्रभावित होती है, जिससे दर्द और अकड़न बढ़ जाती है।

दो माह में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे
MY Hospital के फिजियोथेरेपी विभाग में पिछले दो महीनों के दौरान लगभग 3000 मरीज ऐसे पहुंचे जो नसों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं से परेशान थे। इनमें कई मरीज लंबे समय से दर्द की समस्या झेल रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी थे जिनमें गर्मी और उमस के दौरान अचानक लक्षण बढ़ गए।
डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों को नियमित फिजियोथेरेपी और व्यायाम के बाद राहत मिली है। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय रहते उपचार और सही जीवनशैली अपनाकर इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या
MY Hospital के आंकड़ों के अनुसार 20 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में कमर दर्द, घुटनों का दर्द, गर्दन दर्द और कंधे दर्द के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज की जीवनशैली भी इसके लिए जिम्मेदार है। लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, लगातार एयर कंडीशनर में रहना और पर्याप्त पानी नहीं पीना युवाओं में दर्द की समस्या को बढ़ा रहा है। जो आयु वर्ग पहले अपेक्षाकृत स्वस्थ माना जाता था, अब वही वर्ग कमर और घुटनों के दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहा है।
महिलाओं में कमर दर्द के मामले अधिक
MY Hospital के आंकड़ों में महिलाओं के बीच कमर दर्द के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में कमर दर्द के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है इसके अलावा कंधे दर्द और गर्दन दर्द के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू कार्यों के साथ लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने और पर्याप्त व्यायाम न करने से यह समस्या बढ़ रही है।
पुरुषों में घुटनों का दर्द बढ़ा
पुरुषों में घुटनों के दर्द के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में यह समस्या तेजी से सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बैठे रहने की आदत, बढ़ता वजन, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
कौन सी समस्याएं सबसे ज्यादा सामने आईं
फिजियोथेरेपी विभाग में पहुंचे मरीजों में हाथ और पैरों में झुनझुनी की शिकायत सबसे अधिक देखने को मिली। इसके अलावा साइटिका पेन, टेनिस एल्बो, पिरीफार्मिस पेन, कारपल टनल सिंड्रोम और अन्य नसों से जुड़ी समस्याएं भी बड़ी संख्या में सामने आईं। इन समस्याओं के कारण मरीजों को चलने फिरने, बैठने, उठने और दैनिक कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज का भी बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार कई मरीजों में पेरिफेरल आर्टरी डिजीज के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। इस स्थिति में पैरों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण दर्द, भारीपन, सुन्नपन और ऐंठन की समस्या हो सकती है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं।
दर्द से बचने के लिए क्या करें
डॉक्टरों ने गर्मी और उमस के मौसम में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इलेक्ट्रोलाइट्स और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करनी चाहिए। लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना चाहिए और बीच बीच में शरीर को सक्रिय रखना चाहिए।
इसके अलावा फलों, हरी सब्जियों और ओमेगा 3 युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना चाहिए। यदि जोड़ों में सूजन या दर्द महसूस हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपचार कराना चाहिए।
