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Reading: Narsinghpur में जल क्रांति की नई मिसाल
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Narsinghpur में जल क्रांति की नई मिसाल

63 अमृत सरोवरों से बदली पानी की तस्वीर

Last updated: जुलाई 28, 2026 12:53 पूर्वाह्न
By Divisha 3 महीना पहले
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6 Min Read
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मध्य प्रदेश का Narsinghpur जिला आज पूरे देश में जल संरक्षण की एक सफल मिसाल बनकर उभरा है। कभी गर्मियों में पानी की कमी, गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों से जूझने वाला Narsinghpur अब अपने 63 अमृत सरोवरों की बदौलत नई पहचान बना चुका है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में इस जिले के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

बारिश का पानी पहले बहकर नदियों और नालों में चला जाता था, लेकिन अब उसी पानी को रोककर जमीन के भीतर पहुंचाया जा रहा है। इसका असर केवल पेयजल तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती, भूजल, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

क्या था Narsinghpur का जल संकट?

भले ही Narsinghpur नर्मदा नदी के प्रभाव क्षेत्र में स्थित है, लेकिन जिले के कई गांव हर वर्ष गर्मियों में जल संकट का सामना करते थे। लगातार भूजल दोहन, वर्षा जल का संरक्षण न होना और पारंपरिक जल स्रोतों की उपेक्षा के कारण हैंडपंप, कुएं और छोटे जलाशय सूखने लगे थे। बारिश का अधिकांश पानी बिना उपयोग के बह जाता था, जिससे भूजल रिचार्ज नहीं हो पाता था। इसका सबसे अधिक असर किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता था।

63 अमृत सरोवर बने बदलाव की शुरुआत

जल संकट से निपटने के लिए Narsinghpur प्रशासन ने अमृत सरोवर योजना के तहत जिले में 63 बड़े तालाब विकसित किए। इन सरोवरों का निर्माण ऐसे स्थानों पर किया गया, जहां वर्षा का पानी स्वाभाविक रूप से एकत्र हो सके। इन जलाशयों का उद्देश्य केवल पानी जमा करना नहीं था, बल्कि अधिक से अधिक वर्षा जल को जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाना भी था। बेहतर योजना, वैज्ञानिक चयन और मजबूत निर्माण ने इस पहल को सफल बना दिया।

70 करोड़ लीटर पानी का हो रहा संरक्षण

इन 63 अमृत सरोवरों में हर वर्ष मानसून के दौरान लगभग 70 करोड़ लीटर वर्षा जल संग्रहित किया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में पानी रुकने से बारिश का बहाव कम हुआ और जल जमीन के भीतर पहुंचने लगा। इसका सीधा लाभ भूजल स्तर में सुधार के रूप में सामने आया। जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक जिला इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर वर्षा जल का संरक्षण करे तो भविष्य के जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

भूजल स्तर में आया उल्लेखनीय सुधार

जल संरक्षण का सबसे बड़ा फायदा Narsinghpur में भूजल स्तर पर देखने को मिला। जिन क्षेत्रों में पहले गर्मियों में हैंडपंप जवाब दे देते थे, वहां अब लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहने लगा है। कई पुराने कुएं और जल स्रोत दोबारा सक्रिय हुए हैं।
इससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही और पानी की उपलब्धता पहले की तुलना में अधिक स्थिर हुई है।

खेती में भी दिखा बड़ा बदलाव

जल उपलब्धता बढ़ने का सबसे सकारात्मक असर खेती पर पड़ा। पहले जहां कई किसान केवल सीमित वर्षा आधारित फसलें उगा पाते थे, वहीं अब सिंचाई की बेहतर व्यवस्था होने से गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों का रकबा बढ़ा है। जल संरक्षण ने किसानों की खेती का जोखिम कम किया है और उत्पादन क्षमता में भी सुधार देखने को मिल रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने क्यों की Narsinghpur की तारीफ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण के महत्व पर चर्चा करते हुए Narsinghpur के अमृत सरोवरों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने वर्षा जल बचाने और उसे भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया।

जनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत

इस अभियान की सफलता का बड़ा कारण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भागीदारी भी रही।ग्रामीणों ने जल संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी माना। तालाबों के रखरखाव, सफाई और संरक्षण में स्थानीय समुदाय ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसी कारण अमृत सरोवर केवल सरकारी परियोजना बनकर नहीं रह गए, बल्कि गांवों की साझा संपत्ति बन गए।

पर्यावरण को भी मिला बड़ा लाभ

जल संरक्षण से केवल पानी ही नहीं बचा, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ मिला। जलाशयों के आसपास हरियाली बढ़ी, मिट्टी में नमी बनी रहने लगी और स्थानीय जैव विविधता को भी फायदा पहुंचा। भूजल रिचार्ज होने से भविष्य में सूखे जैसी परिस्थितियों का असर कम होने की संभावना बढ़ी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और Narsinghpur इसका अच्छा उदाहरण बनकर सामने आया है।

आज Narsinghpur का मॉडल केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा माना जा रहा है।
यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वर्षा जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और जनभागीदारी को अपनाया जाए तो जल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

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TAGGED: 63 ponds, madhya pradesh, Narsinghpur, thefourth, thefourthindia, water crisis
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