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Reading: वो पुराने दिन : आज के दिन हुआ इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक, भारत सहित 200 से अधिक देशों के दिग्गजों का था नाम!
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Fourth Special

वो पुराने दिन : आज के दिन हुआ इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक, भारत सहित 200 से अधिक देशों के दिग्गजों का था नाम!

ये अब तक का सबसे बड़ा लीक है

Last updated: अप्रैल 3, 2025 2:28 अपराह्न
By Rajneesh 1 वर्ष पहले
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7 Min Read
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पनामा पेपर्स एक बड़ा डेटा लीक था जिसमें पनामा की एक लॉ फर्म Mossack Fonseca के 11.5 मिलियन के सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स शामिल थे। ये डॉक्यूमेंट्स गुमनाम रूप से जर्मन न्यूज लेटर सुडेउश्चे ज़ितुंग (SZ) को लीक कर दिए गए। ये डॉक्यूमेंट्स 3 अप्रैल 2016 को पब्लिक किए गए थे और इनमें 214,000 से अधिक ऑफ़शोर कंपनियों की इन्फोर्मेशन थी, जो 200 से अधिक देशों के लोगों और संस्थाओं से संबंधित थीं। इन डॉक्यूमेंट्स से पता चला कि कैसे दुनियाभर के रिच और प्रभावशाली लोग अपनी प्रॉपर्टी छिपाने, टैक्स चोरी करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए ऑफ़शोर कंपनियों का उपयोग करते थे।

ऑफ़शोर कंपनियाँ वे कंपनियाँ होती हैं जो उस देश के बाहर रजिस्टर्ड होती हैं जहाँ उनके असली ओनर रहते हैं। हालांकि इनका उपयोग लीगल मोटो के लिए किया जा सकता है, लेकिन कई बार इनका उपयोग टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और restrictions से बचने के लिए किया जाता है।

इस डेटा लीक को “पनामा पेपर्स” कहा गया क्योंकि लीक की शुरुआत पनामा से हुई थी। हालाँकि, पनामा सरकार ने इस नाम पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है, क्योंकि ऐसा लगता है कि इससे देश का कुछ नेगेटिव कनेक्शन है।

2015 में, सुडड्यूश ज़ितुंग (SZ) से एक अज्ञात सोर्स ने संपर्क किया, जिसने खुद को “John Doe” कहा और उसी ने डॉक्यूमेंट्स को लीक करने की पेशकश की। SZ के अनुसार, Doe ने बदले में किसी भी पैसे की मांग नहीं की थी। डेटा लगभग 2.6 टेराबाइट्स की साइज का था, जो इसे इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक बनाती है। इसमे 1970 के दशक से लेकर 2016 तक का डेटा था।

ये अब तक का सबसे बड़ा लीक है। क्यूंकि इसमे 11.5 मिलियन डॉक्यूमेंट्स, 214,000 से अधिक ऑफ़शोर कंपनियाँ, 200 देशों के लोग शामिल। जबकि इसके मुकाबले ‘पैराडाइज़ पेपर्स’ लीक में 13.4 मिलियन दस्तावेज़, 120,000 से अधिक लोग और कंपनियाँ, 70 देशों के लोग शामिल थे। वहीं पैंडोरा पेपर्स लीक में 12 मिलियन से अधिक दस्तावेज़, 330 से अधिक राजनेता और सार्वजनिक अधिकारी, 90 देशों के लोग शामिल थे।

शुरुआत में, केवल चुनिंदा राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों, व्यापारियों और अन्य लोगों के नाम ही उजागर किए गए थे। खुलासे के तत्काल परिणामों में से एक 4 अप्रैल, 2016 को आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिगमंडर डेविड गुन्नलाउगसन को इस्तीफा देना पड़ा था।

इन सभी लीक में समानता यह है कि सभी में सीक्रेट फायनेंशियल इन्फोर्मेशन का खुलासा हुआ, जिससे टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों का पर्दाफाश हुआ। हालांकि, हर लीक में अलग-अलग लोग, कंपनियाँ और देश शामिल थे।

इस लीक में कई भारतीयों के नाम भी सामने आये जैसे –

  1. अमिताभ बच्चन: इन्फोर्मेशन के अनुसार, उनका नाम चार शिपिंग कंपनियों से जुड़ा था, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और बहामास में स्थित थीं।
  2. ऐश्वर्या राय बच्चन: रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थित Amic Partners Limited नामक कंपनी की निदेशक थीं, बाद में उन्हें शेयरधारक बना दिया गया। पिछले साल भी ED ने उनसे इसी मामले में पूछताछ की थी।
  3. के.पी. सिंह (DLF के संस्थापक): उन्होंने और उनके परिवार ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में कंपनियाँ स्थापित कीं, जिनके माध्यम से लगभग $10 मिलियन की संपत्ति रखी गई।
  4. विनोद अडानी : गौतम अडानी के भाई, उनका नाम भी उन भारतीयों में शामिल है जिनके नाम पनामा पेपर्स में आए।
  5. समीर गहलौत: Indiabulls के मालिक, उन्होंने लंदन में संपत्तियाँ खरीदने के लिए कई ऑफ़शोर कंपनियों का उपयोग किया।
  6. शिशिर बजोरिया : पश्चिम बंगाल के राजनीतिज्ञ और उनका नाम भी पनामा पेपर्स में शामिल था।
  7. अनुराग केजरीवाल : दिल्ली लोकसत्ता पार्टी के पूर्व प्रमुख का नाम भी इस लीक में सामने आया था।
  8. हजरा इकबाल मेमन: अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची की पत्नी का नाम भी पनामा पेपर्स में शामिल था।

इन खुलासों के बाद, भारत सरकार ने एक मल्टी-एजेंसी समूह (MAG) का गठन किया ताकि इन मामलों की जांच की जा सके और यदि आवश्यक हो तो कानूनी कार्रवाई की जा सके।

पनामा पेपर्स के लिए इन्हें जाना पड़ा जेल

जर्मनी ने टैक्स चोरी और आपराधिक संगठन चलाने के आरोप में मोसाक फोंसेका के वकीलों जुर्गेन मोसाक और रेमन फोंसेका के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। हालांकि, पनामा के कानूनों के कारण, उन्हें जर्मन अधिकारियों को नहीं सौंपा गया।

पनामा में ही उन्हें पनामा पेपर्स घोटाले और एक ब्राज़ीलियाई कंपनी के साथ रिश्वतखोरी से जुड़े आरोपों का सामना करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें जमानत मिलने से पहले दो महीने जेल में बिताने पड़े। जून 2024 में, पनामा के एक जज ने मोसैक और 27 अन्य को पनामा पेपर्स घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप से बरी कर दिया। मई 2024 में फोंसेका की मृत्यु हो गई।

इसके अलावा USA में, अमेरिकी taxpayer हेराल्ड जोआचिम वॉन डेर गोल्ट्ज़ को वायर और टैक्स धोखाधड़ी , मनी लॉन्ड्रिंग और पनामा पेपर्स घोटाले से संबंधित कई अन्य अपराधों का दोषी ठहराया गया था। उन्हें अमेरिकी जेल में चार साल की सजा सुनाई गई थी। उनके एकाउंटेंट रिचर्ड गैफ़ी ने घोटाले से संबंधित आठ आरोपों में दोष स्वीकार किया और उन्हें तीन वर्ष से अधिक कारावास की सजा सुनाई गई। वॉन डेर गोल्ट्ज़ के बेटे, जोआचिम अलेक्जेंडर वॉन डेर गोल्ट्ज़ ने घोटाले से संबंधित तीन आरोपों में दोषी करार दिया और उन्हें कारावास की सजा सुनाई गई तथा तीन वर्ष तक निगरानी में रिहा किया गया

इन लीक से यह स्पष्ट होता है कि कैसे विश्वभर में कई लोग और संस्थाएँ अपनी संपत्ति और आय को छिपाने के लिए ऑफ़शोर कंपनियों का उपयोग करते हैं, जिससे कर चोरी और धन शोधन जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

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TAGGED: aishwarya rai, Amitabh Bachchan, Financial Scandals, money laundering, Mossack Fonseca, Panama paper, Panama papers leak, thefourth, thefourthindia
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