इंदौर शहर के पश्चिमी क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराने वाले Yashwant Sagar का पानी दूषित होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार की ओर से जारी चेतावनी के बाद इंदौर नगर निगम और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार गंभीर नदी में उद्योगों का केमिकल वेस्ट और विभिन्न क्षेत्रों का ड्रेनेज का पानी मिल रहा है, जो आगे चलकर यशवंत सागर में पहुंच रहा है।
Yashwant Sagar को रामासर साइट के रूप में चयनित किया गया है। रामासर साइट का दर्जा अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को दिया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा करना होता है। ऐसे में इस जलाशय का प्रदूषित होना पर्यावरणीय दृष्टि से भी गंभीर विषय माना जा रहा है।
30 मिलियन लीटर पानी की होती है प्रतिदिन आपूर्ति
इंदौर नगर निगम द्वारा Yashwant Sagar के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में किया जाता है। प्रतिदिन लगभग 30 मिलियन लीटर पानी इस जलाशय से शहर के पश्चिमी क्षेत्र में सप्लाई किया जाता है। इस पानी पर बड़ी आबादी की निर्भरता है। यदि जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर हजारों परिवारों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
अधिकारियों के अनुसार गंभीर नदी का पानी Yashwant Sagar में आकर मिलता है। पिछले कुछ समय से नदी में औद्योगिक इकाइयों का केमिकल वेस्ट और कई स्थानों से निकलने वाला ड्रेनेज का गंदा पानी प्रवाहित हो रहा है। यह अपशिष्ट बिना समुचित शोधन के नदी में मिल रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार गिर रही है।
नगरीय प्रशासन आयुक्त का पत्र, जांच के निर्देश
प्रदेश के नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम को एक पत्र भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि Yashwant Sagar का पानी दूषित हो रहा है और इसके स्रोतों की तत्काल जांच की आवश्यकता है। इस पत्र के आधार पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने पूरे मामले की जांच और परीक्षण के निर्देश जारी किए हैं।
निर्देश मिलते ही नगर निगम की टीम ने जल गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल भी गंभीर नदी के विभिन्न बिंदुओं से पानी के सैंपल लेकर परीक्षण कर रहा है। प्राथमिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किन औद्योगिक इकाइयों या क्षेत्रों से बिना उपचारित अपशिष्ट छोड़ा जा रहा है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार यदि औद्योगिक केमिकल और सीवेज का पानी लगातार जलाशय में मिलता रहा तो इससे जल में घुलित ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही ऐसे पानी के दीर्घकालीन उपयोग से जलजनित रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
Yashwant Sagar इंदौर की महत्वपूर्ण जल संरचना है और वर्षों से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है। इसके संरक्षण के लिए समय समय पर डीप डी-सिल्टिंग और सफाई अभियान चलाए जाते रहे हैं। अब प्रदूषण की आशंका ने इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सख्ती की तैयारी
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और संचालन पर रोक जैसी कार्रवाई संभव है। साथ ही ड्रेनेज के पानी को शोधन संयंत्रों से गुजारने की व्यवस्था को भी सख्ती से लागू करने की बात कही गई है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। आगामी रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। Yashwant Sagar की स्थिति पर अब प्रशासन और पर्यावरण विभाग की नजर बनी हुई है।
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