2 अप्रैल 2011 की तारीख भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। यही वो दिन है जब 28 साल बाद आखिरकार भारत ने World Cup अपने नाम किया था। बच्चा हो या बूढ़ा, छोटा हो या बड़ा, कोई भी उस पल को नहीं भूल सकता, जब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने अंदाज़ में छक्का लगाकर बड़े लंबे इंतेज़ार के बाद भारत को World Cup दिलाया। रवि शास्त्री की कमेंट्री “Dhoni finishes off in style! A magnificent strike into the crowd. India lift the World Cup after 28 years!” आज भी कानों में गूंजती है। आइए उन पलों को फिर जीते है और एक नज़र हमारे कुछ heroes पर डालते है।
सचिन तेंदुलकर: वो सपना जो आखिरकार पूरा हुआ
क्रिकेट के भगवान, मास्टर ब्लास्टर और सबसे महान खिलाड़ियों में से एक सचिन तेंदुलकर का ये छठा World Cup था, लेकिन एक चीज़ जो उनके चमकते करियर में अब तक अधूरी थी, वो थी World Cup trophy। भारत 1996 में semi-final और 2003 में final हार चुकी थी। 2003 की वो हार उस वक्त के क्रिकेट प्रेमियों को बहुत अच्छे से याद होगी। सचिन अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर थे और ज़ाहिर हैं कि एक World Cup तो वो भी जीतना ही चाहते होंगे। वो कुछ उसी अंदाज़ में खेले भी। 9 मैचों में 482 रन बनाकर दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बने। इसके साथ ही वो 52 चौके लगाकर दूसरे सबसे ज़्यादा चौके लगाने वाले बल्लेबाज़ भी बने। जब भारत ने final जीता, तो टीम के साथी उन्हें कंधों पर उठाकर मैदान का चक्कर लगा रहे थे। उस वक्त विराट कोहली के शब्द हर भारतीय के दिल को छू गए जब उन्होंने कहा “उन्होंने 21 साल तक भारत का भार उठाया, अब हमारी बारी थी उन्हें उठाने की।”
महेंद्र सिंह धोनी: फाइनल के हीरो
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के लिए बल्ले से वो World Cup कुछ खास नहीं रहा। हालांकि विकेट के पीछे से टीम को संभालना और अपने फैसलों को गेम को पलटना इस खिलाड़ी की हमेशा से ही खासियत रही। शायद इनके बल्ले से की कमाल की पारी final के दिन ही आनी थी जो आई भी। 79 गेंदों में 91* की वो शानदार पारी आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा हैं। युवराज सिंह से पहले आकर खेली गई पारी की बदौलत भारत 28 साल का लंबा इंतेज़ार खत्म हुआ था और उन्हें इसके लिए “Man of the Match” का खिताब भी मिला था।
गौतम गंभीर: टीम का भरोसेमंद बल्लेबाज़
गौतम गंभीर एक ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अक्सर मुश्किल दौर से भारतीय टीम को बाहर निकाला हैं। चाहे 2007 T-20 World Cup हो जब उन्होंने 75 रन बनाए या 2011 World Cup final हो जब उन्होंने 97 रनों की पारी खेली और भारतीय टीम के high-scorer रहे। पूरे टूर्नामेंट में 393 रन बनाकर उन्होंने भारतीय टीम की सफलता में बड़ी भूमिका निभाई।
ज़हीर खान: भारतीय गेंदबाज़ी की अगुवाई करने वाले
ये मानने में कोई बुराई नहीं हैं कि उस World Cup में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान इन्हीं के हाथों में थी। ज़हीर ने पूरे tournament में अहम विकेट चटकाए और final में भी दबाव बनाए रखा। 2003 World Cup final में जो अनुभव इन्हें मिले थे उन्हें ध्यान में रखकर उन्होंने गेंदबाज़ी की और final में 10 overs में 60 रन देकर तीन विकेट झटके। ज़हीर खान 21 विकेट लेकर सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ भी बने।
युवराज सिंह: 2011 World Cup के नायक
2011 World Cup की बात हो और युवराज सिंह का ज़िक्र न हो ये नहीं हो सकता। गेंद और बल्ले दोनों से टीम को अहम योगदान देने वाले इस खिलाड़ी को “Man of the Tournament” का खिताब भी मिला था। व World Cup में 362 रन और 15 विकेट लेकर इन्होंने ट्रॉफी जितवाने में एक बड़ा रोल निभाया था। इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने कैंसर होने की पुष्टि भी हुई। हालांकि, उन्होंने इस गंभीर बीमारी से जूझते हुए जबरदस्त जज्बा दिखाया और इलाज के बाद क्रिकेट के मैदान पर वापसी की।
वीरेंद्र सहवाग: विस्फोटक ओपनर
जब भी आक्रामक बल्लेबाजों की बात होती है, वीरेंद्र सहवाग का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अपनी तेजतर्रार बल्लेबाजी और बेखौफ अंदाज के लिए मशहूर सहवाग ने भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी। 2011 World Cup में वीरेंद्र सहवाग भारत के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी साबित हुए। चाहे बांग्लादेश के खिलाफ 175 रन की जबरदस्त पारी हो या पाकिस्तान के खिलाफ 38 रन। उनकी तेज शुरुआत ने भारत को हमेशा मजबूत स्थिति में रखा। उन्होंने World Cup में 9 मैचों में 122.58 के स्ट्राइक रेट से 380 रन बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को हमेशा मजबूत शुरुआत दी और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
सुरेश रैना: भारत के Unsung Hero
सुरेश रैना 2011 World Cup में भारतीय टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी साबित हुए। अपनी बल्लेबाजी और फील्डिंग से जरूरत पड़ने पर उपयोगी गेंदबाजी से उन्होंने टीम को कई मौकों पर संभाला। रैना को टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन जब भी उन्हें खेलने का मौका मिला, उन्होंने टीम के लिए अहम योगदान दिया। Quarter-final में Australia के खिलाफ रैना ने 34 गेंदों में 34 रन* बनाकर भारत को जीत दिलाने में मदद की। वहीं सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 36 रन* बनाकर भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।
विराट कोहली: भविष्य का सितारा
विराट कोहली 2011 World Cup में भारतीय टीम के सबसे युवा खिलाड़ियों में से एक थे। उन्होंने अपने पहले ही World Cup में उम्दा प्रदर्शन किया और दिखा दिया कि वह भविष्य में भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बनने वाले हैं। Tournament में उन्होंने 35.25 की औसत से 282 रन बनाए जिसमें उनका best-score 100* था। 2011 World Cup कोहली के लिए सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि एक सीख थी, जिसने उन्हें आगे चलकर दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक बना दिया।
अन्य नायक:
मुनाफ पटेल और हरभजन सिंह ने भी गेंदबाजी में अहम योगदान दिया। मुनाफ ने खासतौर पर England के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि हरभजन ने पाकिस्तान के खिलाफ semi-final में शाहिद अफरीदी का विकेट लेकर भारत को जीत के करीब पहुंचाया।
तो ये थे कुछ चुनिंदा सितारें जिन्होंने इस World Cup को जिताने से बड़ा रोल अदा किया था। 2 अप्रैल वो दिन था जब International क्रिकेट में भारत एक महाशक्ति बनकर उभरा। यह एक ऐसा दिन था जिसे हर क्रिकेट प्रेमी हमेशा याद रखेगा।