By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
March 7, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: आज की तारीख – 46: चिपको आंदोलन के जनक का जन्म
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
Sundеrlal Bahuguna leader of the Chipko movement 1024x614 1 - The Fourth
Fourth Special

आज की तारीख – 46: चिपको आंदोलन के जनक का जन्म

चिपको आंदोलन पर्यावरण आंदोलनों के लिए एक मॉडल बन गया और कई देशों में इसी प्रकार के आंदोलनों को प्रेरित किया।

Last updated: जनवरी 9, 2025 3:32 अपराह्न
By Rajneesh 1 वर्ष पहले
Share
4 Min Read
SHARE

भारत के पर्यावरणीय आंदोलनों में चिपको आंदोलन एक ऐसा ऐतिहासिक आंदोलन है, जिसने न केवल वनों की रक्षा की बल्कि पर्यावरण जागरूकता को भी नई दिशा दी। यह आंदोलन उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व में शुरू हुआ और विश्वभर में पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक के रूप में जाना पहचाना गया।

चिपको आंदोलन की शुरुआत 1973 में उत्तराखंड के मंडल गाँव में हुई। इसका उद्देश्य वनों की कटाई को रोकना था। उस समय लकड़ी माफिया और ठेकेदारों द्वारा जंगलों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा था, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा था, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका भी खतरे में थी। इस आंदोलन का नाम ‘चिपको’ इस तथ्य से पड़ा कि ग्रामीण लोग पेड़ों को गले लगाकर उन्हें कटने से बचाने का प्रयास करते थे।

चिपको आंदोलन को सफल बनाने में पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का योगदान अमूल्य था। वह इस आंदोलन के विचारक और प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने वनों की महत्ता को समझाया और हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाया।

09 जनवरी 1927 को टिहरी गढ़वाल के सिल्यारा गांव में जन्में सुंदरलाल बहुगुणा के पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित जीवन की यह कहानी सभी को याद होगी, मगर बहुत कम लोग जानते होंगे कि कभी वह देश की आजादी के लिए भी लड़े थे और कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे।

सुंदरलाल बहुगुणा न केवल एक पर्यावरणविद थे, बल्कि एक विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने गांधीवादी विचारधारा के तहत अहिंसा और सत्याग्रह को अपनाया। उनका मानना था कि प्रकृति और मनुष्य के बीच सामंजस्य स्थापित करना अनिवार्य है।

सुंदरलाल बहुगुणा ने ‘पारिस्थितिकी विकास’ की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका प्रसिद्ध नारा “धरती बचाओ, पेड़ लगाओ” जंगलों की रक्षा का प्रतीक बन गया। बहुगुणा ने पैदल यात्राएं कर हिमालय के दूरदराज के गाँवों में जागरूकता फैलाई। उन्होंने स्थानीय समुदायों को वनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया और बताया कि जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि पानी, मिट्टी और हवा के संतुलन का आधार भी हैं।

उन्होंने महिलाओं की भूमिका को समझा और उन्हें आंदोलन में सक्रिय भागीदार बनाया। महिलाओं ने अपने पारंपरिक ज्ञान और साहस का उपयोग कर जंगलों की रक्षा की। उन्होंने तत्कालीन सरकार से लगातार बातचीत की और 1981 में वनों की कटाई पर 15 साल का प्रतिबंध लगाने में सफल रहे।

चिपको आंदोलन महिलाओं के साहस और समर्पण का उदाहरण है। गौरा देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने ठेकेदारों और पुलिस से मुकाबला किया और अपने जंगलों को कटने से बचाया। यह आंदोलन पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की ताकत को दर्शाता है।

1980 में भारत सरकार ने वनों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने के लिए वन संरक्षण कानून पारित किया गया। यह आंदोलन पर्यावरण आंदोलनों के लिए एक मॉडल बन गया और कई देशों में इसी प्रकार के आंदोलनों को प्रेरित किया। आंदोलन ने स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया और वनों की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया।

चिपको आंदोलन ने न केवल वनों की रक्षा की बल्कि पूरी दुनिया को यह सिखाया कि पर्यावरण संरक्षण के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। सुंदरलाल बहुगुणा और हिमालय की महिलाओं का यह योगदान हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। यह आंदोलन आज भी हमें प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी समझने की सीख देता है।

You Might Also Like

सरकार ने महापौर निधि पर लगाई रोक, Nagar Nigam Budget में नहीं होगा प्रावधान

Indore की रंग पंचमी गैर पर इस बार हाईटेक सुरक्षा

Gwalior में हाइवे पर कार को डेढ़ किमी तक घसीटता रहा कंटेनर

Ayatollah Ali Khamenei: इस्लामिक क्रांति से सुप्रीम लीडर तक

Khamenei की मौत के बाद Iran में सत्ता परिवर्तन

TAGGED: chipko movement, environmental awareness, environmental movements, environmental protection, india, sunderlal bahuguna, thefourth, thefourthindia, tree conservation, village activism
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

maxresdefault 2 - The Fourth
Music

Rap legend ‘बोहेमिया’ और ‘रफ्तार’ के बीच तकरार खत्म

2 वर्ष पहले

ऑपरेशन सिंदूर: भारत का आतंकियों को करारा जवाब

यूक्रेन ने रूस पर किया पर्ल हार्बर जैसा हमला! क्या अमेरीका की तरह Nuclear Attack से जवाब देगा रूस?

भारत बना Asia का पहला Bloodless Heart Transplant करने वाला देश

सम्पूरन जब ‘गुलज़ार’ हुए तो कईयों की जिंदगी भी गुलज़ार हो गई!

You Might Also Like

Dubai में शुरू हो रही है Uber की उड़ने वाली टैक्सी सेवा
World

Dubai में शुरू हो रही है Uber की उड़ने वाली टैक्सी सेवा

1 सप्ताह पहले
बधाई हो! Botswana से आए 9 नए चीते, भारत में अब कुल 48 चीते
Cities

बधाई हो! Botswana से आए 9 नए चीते, भारत में अब कुल 48 चीते

1 सप्ताह पहले
Rewa : वर्दी में वायरल रील ने पुलिस ट्रेनीज़ को दिलाई ‘कारण बताओ’ नोटिस
Cities

Rewa : वर्दी में वायरल रील ने पुलिस ट्रेनीज़ को दिलाई ‘कारण बताओ’ नोटिस

1 सप्ताह पहले
Bolivia में सैन्य विमान हादसा, सड़क पर बिखरे नोटों के बीच 15 की मौत
World

Bolivia में सैन्य विमान हादसा, सड़क पर बिखरे नोटों के बीच 15 की मौत

1 सप्ताह पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?