स्वच्छता में देश भर में 8 बार अपना झंडा गाड़ने वाले इंदौर देश का पहला शहर है जो आज भिक्षुक मुक्त शहर होने की राह में सबसे आगे है। ये अपने आप में एक सराहनीय बात है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान को और भी सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि शहर में कहीं भी भिक्षावृत्ति पाए जाने पर उसकी सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को 1000 रुपए का इनाम दिया जाएगा।
जिला प्रशासन ने भिक्षावृति मुक्त शहर बनाने के लक्ष्य से जुड़ी इस अनूठी इनामी योजना को जबसे शुरू किया है तब से ही इस योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय लोग भिखारियों के बारे में प्रशासन को फोन करके सूचना देते हैं। कई लोगों ने पूर्व में इनाम जीता भी है।
कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में हुई बैठक में भिक्षावृत्ति रोकने के लिए विस्तृत रणनीति बनाई गई। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि – “इंदौर की स्वच्छता के साथ सामाजिक स्वच्छता भी हमारी प्राथमिकता है। भिक्षुक मुक्त इंदौर एक संवेदनशील और आत्मनिर्भर समाज की दिशा में बड़ा कदम है।”
इस बैठक में अपर कलेक्टर श्री नवजीवन विजय पंवार, श्री रोशन राय, श्री रिंकेश वैश्य, जिला पंचायत सीईओ श्री सिद्धार्थ जैन, एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक श्री हिमांशु प्रजापति, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी, महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री रजनीश सिन्हा, श्रम विभाग की अधिकारी श्रीमती मेघना भट्ट सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
भीख लेने – देने पर हो सकती है सज़ा
प्रशासन ने इंदौर शहर में पहले ही भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने पर कानूनी रोक लगाई हुई है। अधिकारियों ने बताया कि भीख मांगने पर लगाए गए प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इन आरोपों में एक साल तक की कैद या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
रिपोर्ट किए गए भिक्षुओं का क्या होता है?
भिक्षावृत्ति खत्म करने को लेकर लोग अक्सर ये सवाल करते हैं कि, भिक्षुओं का क्या होगा। जानकारी के लिए बता दें कि, राज्य में रिपोर्ट किए गए भिक्षुकों को काउंसिलिंग, पुनर्वास और सहायता दी जाती है। इसके लिए पहले भी सराहनीय कार्य हुए हैं और वर्तमान में भी जिला प्रशासन ने योजनाबद्ध कदम उठाने वाला है। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग, नगर निगम, होमगार्ड, श्रम विभाग, राजकीय बाल संरक्षण आश्रम और विशेष पुलिस किशोर इकाई के अधिकारियों – कर्मचारियों को शामिल करते हुए विशेष रेस्क्यू टीम बनाई जाएगी।
पहले भी जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक विशेष अभियान चलाया था। जिसमें दल को विशेष सफलता मिली थी। टीम ने पाया कि इंदौर में भिक्षावृत्ति करने वालों की संख्या 6500 से अधिक है। इसमें बच्चे, किशोर, युवाओं से लेकर वृद्धजन तक शामिल हैं। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी है। बच्चे भिक्षा मांग कर नशे और अपराध में संलिप्त हो जाते हैं। ऐसे किशोर-युवाओं को सुधार गृह भेजकर उनकी काउंसलिंग कराई जाती है।
कलेक्टर ने युवा छात्र भी बने मुहिम का हिस्सा
भिक्षावृत्ति रोकने के लिए गली एवं चौराहों पर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से प्रचार किया जाए। इस कार्य में समाज सेवा महाविद्यालय इंदौर के छात्र-छात्राओं एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के युवाओं को जोड़ा जाए। भिक्षावृत्ति शुरू नहीं हो, इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाए। विशेषकर बड़ा गणपति, रेलवे स्टेशन, सत्य साईं चौराहा, विभिन्न मठ-मंदिरों, आश्रमों एवं सार्वजनिक स्थानों पर जहां भिक्षावृत्ति की जाती है, उसे सख्ती से रोका जाए।
बच्चों को भीख नहीं, सीख दीजिए
देखा गया है कि कुछ लोग आदतन भिक्षावृत्ति करते हैं, जबकि कुछ लोग दूसरों से भिक्षावृत्ति कराते हैं। पूर्व में रेस्क्यू टीम द्वारा 4500 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत 800 लोगों को पुनर्वास किया गया। इनमें 115 बच्चे और किशोर थे। भीख मांगने वाले 172 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया है। प्रशासन ने जनता से बच्चों को भीख नहीं, सीख देने की अपील की है।
