मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से अब तक बच्चों की मौत 20 से ज्यादा पहुंच गया। स्वास्थ्य विभाग और आशा कार्यकर्ताओं ने अन्य प्रभावित बच्चों का पता लगाने के लिए डोर-टू-डोर सर्वे शुरू किया था जिसके बाद एक जिले से पहली बार राहत भरी खबर सामने आई है। यहां कोल्ड्रिफ नाम की खांसी की दवा लेने वाले 200 से ज्यादा बच्चों की तलाश कर ली गई है, सभी सुरक्षित पाए गए हैं।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। डॉ. प्रवीण सोनी नाम के एक बाल रोग विशेषज्ञ की गिरफ्तारी के बाद किया उससे पूछताछ की गई तो पता चला कि, डॉक्टर ने 5,200 मरीजों का इलाज किया था, जिसमें अधिकांश बच्चे थे। यह डॉक्टर छिंदवाड़ा के परासिया इलाके में सरकारी अस्पताल में काम करता था और साथ ही निजी प्रैक्टिस भी करता था। उसने ही बच्चों को जहरीली दवाई लिखी थी। पूछताछ के बाद 17 अगस्त से डॉ. प्रवीण ने जितनी भी बच्चों को दवाइयां लिखीं थी, सरकारी अधिकारियों ने उन सभी बच्चों की ट्रैकिंग की। पता चला कि 200 बच्चों को कोल्ड्रिफ दवा दी गई थी। अधिकारियों ने फिर बच्चों के परिजनों को फ़ोन कॉल करके जानकारी ली। राहत की ख़बर रही कि वे सभी बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
150 से ज्यादा आशा कार्यकर्ता जगह जगह सर्वे करके उस कफ सिरप को ढूंढ रही हैं। बची हुई दवाइयों की बोतलों को जब्त किया जा रहा है। उन्हें ज़ब्त कर उनकी जांच होगी और नष्ट किया जायेगा।
इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को उजागर किया कि हमारा स्वास्थ्य विभाग कितना लापरवाह है। इस बात को इसी बात से समझा जा सकता है कि जो दवाइयों के सैंपल जांच के लिए साल 2023 में भेजे जाते हैं उनकी रिपोर्ट दो साल बाद 2025 में आती है। तब तक दवाईयां बट भी जाती है और लोग उसका सेवन भी कर लेते हैं।
जांच के मुताबिक, तमिलनाडु की औषधि नियंत्रण प्रणाली ने न तो कंपनी पर समय पर कार्रवाई की और न ही सही निगरानी रखी। इसी वजह से जहरीला सिरप बाजार में पहुंचा और बच्चों की जानें गईं।
श्रीसन फार्मा और तमिलनाडु सरकार की बड़ी लापरवाही
CDSCO रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीसन फार्मा कंपनी को बिना उचित निगरानी के ही लाइसेंस देना जारी रखा गया था। कंपनी को सील करने की कार्रवाई होने के बाद पहली बार केंद्र सरकार को इस कंपनी का नाम पता चला है। यही नहीं कंपनी से बेखबर केंद्र सरकार को पहली बार ही यह भी पता चला कि किस तरह कोल्ड्रिफ का निर्माण करने वाली कंपनी ने ये दवा देशभर के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जा रही थी।
CDSCO ने सभी राज्यों को दवा निगरानी सख्त करने की सलाह दी है। डाटा और रजिस्ट्रेशन में भी कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। दवाओं की बेहतर निगरानी के लिए केंद्र ने एक राष्ट्रीय डाटा तैयार करने का नियम लागू किया है, लेकिन कंपनी ने कभी भी राष्ट्रीय डाटा पोर्टल पर खुद को रजिस्टर नहीं किया, जबकि यह ज़रूरी था। इस बात को हर बार महीने की समीक्षा बैठक और राज्य एफडीए की बैठक में दोहराया गया, लेकिन श्री सन फार्मा ने पंजीकरण नहीं कराया न ही राज्य ने उन्हें इसमें शामिल होने में मदद की।
कंपनी के मालिक को नहीं मिला कोई वकील, खुद रखी दलील
कंपनी के मालिक गोविंदन रंगनाथन को शुक्रवार को छिंदवाड़ा जिले की परासिया कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान उन पर हमले की कोशिश की गई। लोगों और वकीलों ने ‘हत्यारे को फांसी दो’ के नारे लगाए। कोर्ट ने उन्हें 10 दिन की रिमांड पर सौंपा है।
परासिया अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्याम कुमार साहू ने कहा – ‘जिले का कोई भी वकील ऐसे आरोपी की पैरवी नहीं करेगा। अगर बाहर से कोई वकील उसकी पैरवी करने आता है तो हम उसका भी विरोध करेंगे।’
रंगनाथन ने कोर्ट में खुद रखी अपनी दलीलें शुक्रवार शाम करीब सवा 5 बजे कोर्ट में जब जी रंगनाथन को पेश किया गया तो किसी भी वकील ने उसकी पैरवी नहीं की। कोर्ट में रंगनाथन ने खुद पैरवी करते हुए कहा कि मैं हार्ट पेशेंट हूं। मुझे हाई ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड शुगर भी है। उसने यह भी दलील दी कि 5 राज्यों में मेरी कंपनी के कफ सिरप सप्लाई होते हैं वहां किसी ने शिकायत नहीं की।
