नई दिल्ली। ‘एक देश-एक चुनाव’ का नारा चल रहा है, लेकिन देश की सियासत पर कुछ परिवारों का ही कब्जा है। सबसे आगे सपा, फिर जदयू, तीसरे पर कांग्रेस, चौथे पर राजद, पांचवें पर टीडीपी है। लिस्ट में भाजपा है और आम आदमी पार्टी भी। कांग्रेस का आंकड़ा भाजपा से तीन गुना ज्यादा है। रिपोर्ट बता रही है कि देश भर में भाजपा के 2078 विधायक हैं। इनमें से 387 यानी 18.62 फीसद नेता परिवारवाद का हिस्सा हैं। कांग्रेस के 857 विधायकों में से 285 यानी 33.25 फीसद परिवार से हैं। ममता बनर्जी की टीएमसी का आंकड़ा 12.31 फीसद है। 268 विधायकों में से 33… किसी बड़े के रिश्तेदार हैं। डीएमके के 172 में से 30 विधायक यानी 17.44 फीसद परिवारवाद वाले हैं।
मुलायम-लालू परिवार में सबसे ज्यादा नेता
इस लिस्ट में सबसे फलता-फूलता पेड़ मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्र्टी का है। इनके 158 विधायकों में से 55 यानी करीब 35 फीसद रिश्तेदार हैं। मुखिया अखिलेश यादव, पत्नी, चाचा और करीबी रिश्तेदार, नेता हैं। बड़ी-बड़ी बातें करने वाली आम आदमी पार्टी भी नहीं बच पाई है। 134 में से 11 यानी 8.21 फीसद बड़े नेताओं के रिश्तेदार हैं। लालू प्रसाद यादव की राजद के 98 में से 30.61 फीसद परिवार के हैं। नीतीश कुमार की जदयू का आंकड़ा सपा से थोड़ा ही कम है। 81 में से 34.57 फीसद रिश्तेदार हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि 182 सांसदों के रिश्तेदार सियासत का हिस्सा रहे हैं। राज्य सभा में यह आंकड़ा 58 यानी करीब 25 फीसद का है। बिहार चुनाव में परिवारवाद का मुकाबला भी जोर-शोर से है। राजद के कुल विधायकों में से 42 फीसद पुत्र-पुत्री या रिश्तेदार हैं। दूसरे नंबर पर जदयू है, जिनका आंकड़ा 36 फीसद है। तीसरे पर भाजपा है, जिनके 22 फीसद विधायक रिश्तेदार हैं।
बिहार का हाल
बिहार में अब तक 23 सीएम हुए हैं। सबसे ज्यादा समय नीतीश कुमार ने कुर्सी पर बिताया है। उनके कई करीबी पदों पर हैं। लालू परिवार में तो पति-पत्नी, लडक़ा और लडक़ी ही बड़े पदों पर रहे। राज्यों के लिहाज से यूपी, बिहार परिवारवाद में सबसे आगे हैं। बीते कुछ साल में मध्यप्रदेश के दामन पर लगा दाग भी गहरा गया है। पंजाब-हरियाणा में हालात ठीक हैं, लेकिन इतने नहीं कि तारीफ की जा सके।
