मध्य प्रदेश कांग्रेस ने महिला मोर्चे में बड़ा फेरबदल करते हुए रीना बौरासी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है और यह फैसला कई राजनीतिक हलकों में उत्सुकता का विषय बना हुआ है क्योंकि रीना प्रदेश राजनीति में बहुत ज्यादा चर्चित चेहरा नहीं रही हैं, बल्कि वे अक्सर अपने पिता प्रेमचंद गुड्डू की पहचान के कारण सुर्खियों में आती रही हैं जो प्रदेश में मंत्री और सांसद रह चुके हैं। राजनीतिक करियर की बात करें तो रीना ने अब तक कोई बड़ा चुनाव नहीं जीता है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें सांवेर सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन यहां उन्हें भाजपा के तुलसीराम सिलावट से साठ हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा था और सांवेर सीट पर सिलावट और रीना के पिता गुड्डू लंबे समय से पारंपरिक प्रतिद्वंदी रहे हैं। उस समय यह चर्चा भी तेज हुई थी कि रीना ने टिकट पाने के लिए पिता से दूरी बना ली है क्योंकि गुड्डू आलोट से टिकट चाहते थे जबकि पार्टी ने रीना को सांवेर से मैदान में उतार दिया और इसी विरोध में गुड्डू ने बगावती तेवर दिखाते हुए चुनाव लड़ा था। इसके बावजूद यह कहना गलत होगा कि रीना को संगठन का पद यूं ही मिल गया है। पिछले साल महिला कांग्रेस के संरचनात्मक विस्तार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया गया था जिसमें रीना पूरे मध्य प्रदेश में सबसे आगे रहीं और उन्होंने लगभग पांच हजार से अधिक महिलाओं को पार्टी से जोड़ा था, जिससे उनकी संगठन क्षमता साफ दिखाई दी। साथ ही उन्हें कमलनाथ गुट का समर्थन भी प्राप्त रहा जिसका प्रभाव नियुक्ति में स्पष्ट रूप से नजर आया। अब रीना के सामने चुनौती कहीं अधिक बड़ी है क्योंकि प्रदेश कांग्रेस का संगठन लंबे समय से कमजोर पड़ता दिख रहा है और उन्हें महिलाओं तक पार्टी की आवाज पहुंचाने के साथ साथ संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
