International Day of Persons with Disabilities केवल एक तिथि नहीं बल्कि उन लाखों लोगों की कहानी है जो हर दिन अपनी चुनौतियों से लड़ते हुए आगे बढ़ते हैं। यह दिवस हर वर्ष 3 दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे वर्ष 1992 में शुरू किया था ताकि दुनिया दिव्यांग व्यक्तियों की जरूरतों और अधिकारों को गंभीरता से समझ सके। वर्ष 1981 को दिव्यांग व्यक्तियों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया था जिसके बाद वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ी।
WHO बताता है कि दुनिया की लगभग सोलह प्रतिशत आबादी दिव्यांग है। यह संख्या हमें यह याद दिलाती है कि दिव्यांगता कोई दुर्लभ स्थिति नहीं बल्कि हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत की जनगणना बताती है कि दो दशमलव इक्कीस प्रतिशत नागरिक दिव्यांग श्रेणी में आते हैं।
भारत सरकार ने सुगम्य भारत अभियान के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों को दिव्यांग अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त सार्वभौमिक दिव्यांग पहचान पत्र, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विशेष शिक्षा सहायता और कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को एक समान अवसर प्रदान करना है ताकि वे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में पूर्ण रूप से शामिल हो सकें।
हालाँकि आज भी उनके सामने कई रुकावटें हैं। सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह अनुकूल नहीं है। शिक्षा और रोजगार में समान अवसर अब भी हर जगह उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण यह दिवस हमें संवेदनशील बनने, सुविधाएँ बढ़ाने और उनके जीवन को आसान बनाने की जिम्मेदारी याद दिलाता है। दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं बल्कि साहस का प्रतीक है और यह दिवस उसी साहस का सम्मान करता है।
