मथुरा जिले के वृंदावन में बंदरों की बढ़ती शरारतें अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। खासकर जब देश की प्रथम नागरिक Droupadi Murmu के आगमन की तैयारी चल रही हो, तब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। 19 मार्च की शाम President के वृंदावन पहुंचने से पहले ही प्रशासन और वन विभाग ने बंदरों से बचाव के लिए विशेष रणनीति तैयार की है।
तीन दिवसीय प्रवास के दौरान President वृंदावन और गोवर्धन के प्रमुख धार्मिक स्थलों का दौरा करेंगी। इस दौरान बंदरों द्वारा चश्मा छीनने की घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एक अनोखा उपाय अपनाया गया है जिसमें लंगूरों के कटआउट और प्रशिक्षित वनकर्मियों की तैनाती शामिल है।
वृंदावन के बंदर क्यों बने परेशानी का कारण
वृंदावन के बंदर लंबे समय से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। मंदिरों के आसपास और बाजारों में ये बंदर छतों और दीवारों पर घात लगाकर बैठे रहते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति चश्मा पहनकर गुजरता है, ये बंदर झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बंदरों की यह आदत वर्षों पुरानी है और वे इसे एक तरह के खेल या आदत के रूप में करते हैं।
फ्रूटी के बदले लौटाते हैं चश्मा
यह समस्या और भी दिलचस्प तब हो जाती है जब बंदर चश्मा लौटाने के लिए एक खास ‘डील’ करते हैं। आमतौर पर लोग बंदरों को फ्रूटी जैसे पैकेट जूस देते हैं, जिसके बदले बंदर चश्मा वापस फेंक देते हैं। अन्य पेय पदार्थ देने पर बंदर अक्सर प्रतिक्रिया नहीं देते। इस अनोखी स्थिति ने प्रशासन के लिए चुनौती को और बढ़ा दिया है, क्योंकि VIP दौरे के दौरान ऐसी घटना किसी भी तरह की असुविधा या सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
President के दौरे को लेकर सुरक्षा की विशेष तैयारी: 19 मार्च से शुरू होगा तीन दिवसीय प्रवास
President Droupadi Murmu 19 मार्च की शाम वृंदावन पहुंचेंगी और 21 मार्च तक यहां विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी। उनके कार्यक्रम में प्रमुख मंदिरों के दर्शन, आश्रमों का दौरा और सामाजिक संस्थानों का निरीक्षण शामिल है। वे बांके बिहारी मंदिर, उड़िया बाबा आश्रम और रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम जैसे महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण करेंगी।
गोवर्धन परिक्रमा भी कार्यक्रम में शामिल
President 21 मार्च को गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा भी करेंगी। यह परिक्रमा गोल्फ कार्ट के माध्यम से कराई जाएगी ताकि यात्रा आरामदायक और सुरक्षित रहे।
लंगूर के कटआउट से भगाए जाएंगे बंदर
पहले VIP दौरों के दौरान बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों का उपयोग किया जाता था। लेकिन अब वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत लंगूरों को पकड़कर या बांधकर रखना प्रतिबंधित है। इस कारण इस बार वास्तविक लंगूरों की तैनाती संभव नहीं हो सकी।
कटआउट बना नया विकल्प
वन विभाग ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए लंगूरों के बड़े कटआउट तैयार कराए हैं। अधिकारियों का मानना है कि बंदर स्वाभाविक रूप से लंगूरों से डरते हैं, इसलिए इन कटआउट को देखकर वे दूर भाग जाते हैं। यह तरीका पहले भी कुछ स्थानों पर प्रयोग किया गया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
वनकर्मियों की टीम और आधुनिक उपकरण रहेंगे तैनात
वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र में बंदरों को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग की 30 सदस्यीय टीम तैनात की जाएगी। बंदरों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों में आठ कर्मचारियों की टीम और सामान्य क्षेत्रों में तीन कर्मचारियों की टीम तैनात रहेगी।
गुलेल और लेजर लाइट का उपयोग
इन कर्मचारियों के पास गुलेल, लाठी डंडे और लाल तथा हरे रंग की लेजर लाइटें होंगी। आवश्यकता पड़ने पर इन उपकरणों की मदद से बंदरों को भगाया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था इस तरह से बनाई गई है कि किसी भी श्रद्धालु या VIP को कोई नुकसान न पहुंचे।
पहले भी हो चुका है ऐसा इंतजाम: राम नाथ कोविन्द के दौरे का अनुभव
27 जून 2022 को जब तत्कालीन President राम नाथ कोविन्द वृंदावन आए थे, तब बंदरों से सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित लंगूरों को तैनात किया गया था। उस समय यह व्यवस्था काफी प्रभावी साबित हुई थी और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई। इस बार कानून के कारण लंगूरों का इस्तेमाल संभव नहीं है, इसलिए प्रशासन ने तकनीकी और वैकल्पिक उपाय अपनाए हैं।
स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता
वृंदावन में बंदरों की समस्या केवल VIP दौरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के लिए भी बड़ी परेशानी है। श्रद्धालु अक्सर चश्मा, मोबाइल और प्रसाद जैसी वस्तुएं खो देते हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल President के दौरे को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना प्राथमिकता है।
President Droupadi Murmu के वृंदावन दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहतीं। बंदरों की अनोखी समस्या से निपटने के लिए इस बार लंगूरों के कटआउट, प्रशिक्षित वनकर्मियों और आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है। यह व्यवस्था न केवल वीआईपी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रशासन किस तरह नवाचार कर रहा है। अब देखना यह होगा कि यह अनोखा प्रयोग कितना सफल साबित होता है।https://www.instagram.com/reel/DV-pqUVk0lL/?igsh=MWhkZGJ0aHN5enVsNg==
