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BP दवा पर नई रिपोर्ट: टेल्मिसार्टन समेत कई दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल

CDSCO की रिपोर्ट में खुलासा

Last updated: अप्रैल 2, 2026 12:53 पूर्वाह्न
By Divisha 4 महीना पहले
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7 Min Read
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देश में Blood Pressure (BP) के मरीजों के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। केंद्र सरकार की दवा नियामक संस्था Central Drugs Standard Control Organisation की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि BP के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं के ब्रांड और बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इन दवाओं को जांच के दौरान नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी की श्रेणी में रखा गया है।

रिपोर्ट में खास तौर पर Telmisartan दवा के कई बैच फेल पाए गए हैं, जो उच्च रक्तचाप के इलाज में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। यह खुलासा इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि यह दवा लाखों मरीज रोजाना लेते हैं और उनकी सेहत सीधे इसके असर पर निर्भर करती है।

जांच में सामने आई मुख्य खामियां

CDSCO द्वारा की गई जांच में दवाओं में दो प्रमुख प्रकार की खामियां सामने आई हैं। पहली समस्या डिसाल्यूशन फेल्योर की है, जिसमें दवा शरीर में सही तरीके से घुल नहीं पाती। जब दवा सही से घुलती नहीं है तो उसका सक्रिय तत्व शरीर तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचता और इलाज का प्रभाव कमजोर हो जाता है।

दूसरी गंभीर समस्या एस्से फेल्योर की है। इसका अर्थ है कि दवा में मौजूद सक्रिय तत्व तय मानकों से कम है या कुछ मामलों में अपेक्षित मात्रा में मौजूद ही नहीं है। ऐसी स्थिति में मरीज दवा लेने के बावजूद सही उपचार नहीं पा पाता। इन दोनों खामियों का सीधा असर मरीज के ब्लड प्रेशर नियंत्रण पर पड़ता है। दवा का उद्देश्य ही यदि पूरा नहीं हो रहा है तो बीमारी अनियंत्रित बनी रह सकती है।

किन दवाओं पर उठा सवाल

रिपोर्ट के अनुसार यह समस्या केवल टेल्मिसार्टन तक सीमित नहीं है। जांच में अन्य BP दवाओं के कुछ बैच भी गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। इनमें Enalapril, Atenolol, Metoprolol और Labetalol जैसी दवाएं शामिल हैं।

इन दवाओं का उपयोग अलग अलग स्तर के BP और हृदय संबंधी समस्याओं के इलाज में किया जाता है। ऐसे में इनका गुणवत्ता मानकों पर फेल होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है।

मरीजों के लिए क्यों खतरनाक है यह स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति इसलिए अधिक खतरनाक है क्योंकि इसमें कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। सामान्य तौर पर जब कोई दवा गलत या खराब होती है तो उसके साइड इफेक्ट दिखने लगते हैं। लेकिन इन मामलों में मरीज को ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता।

दवा लेने के बावजूद मरीज को लगता है कि उसका इलाज चल रहा है, जबकि वास्तविकता में ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो पाता। यही कारण है कि इसे साइलेंट खतरा कहा जा रहा है।यदि लंबे समय तक ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है तो इससे हृदय पर दबाव बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, जो जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

सरकार और नियामक एजेंसियों की कार्रवाई

CDSCO ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दवा बैच को बाजार से वापस लेने के निर्देश दिए हैं। जिन कंपनियों के उत्पाद फेल पाए गए हैं उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।

यदि जांच में कंपनियों की गलती साबित होती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें लाइसेंस निलंबन, उत्पादन पर रोक और अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं। नियामक एजेंसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हों ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार का जोखिम न हो।

मरीजों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

इस स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने मरीजों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। मरीजों को चाहिए कि वे दवा केवल विश्वसनीय और अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें।

दवा खरीदते समय बैच नंबर और एक्सपायरी डेट की जांच करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा मरीजों को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर मापते रहना चाहिए ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता चल सके। यदि दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और दवा बदलने या जांच कराने पर विचार करना चाहिए।

दवा गुणवत्ता पर निगरानी क्यों जरूरी है

यह पूरा मामला दवाओं की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है। दवाएं सीधे मरीज के जीवन से जुड़ी होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की कमी गंभीर परिणाम दे सकती है।

सरकारी एजेंसियों द्वारा समय समय पर जांच और निगरानी जरूरी है ताकि खराब या मानक से कम दवाओं को समय रहते बाजार से हटाया जा सके। इसके साथ ही दवा कंपनियों की जिम्मेदारी भी है कि वे उत्पादन के दौरान सभी गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करें।

BP की दवाओं के कई बैच के फेल होने की यह घटना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकेत है। यह न केवल दवा कंपनियों की गुणवत्ता व्यवस्था पर सवाल उठाती है बल्कि मरीजों के लिए भी सतर्क रहने का संदेश देती है। मरीजों को जागरूक रहकर अपनी दवाओं की जांच करनी चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर उठाए गए छोटे कदम भविष्य में बड़े स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकते हैं।

https://www.instagram.com/p/DWaylynCFQP/?igsh=MW1xOXppejdrejZlMQ==


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