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Reading: Indore में 75 फीसदी बच्चों के दांतों में मिली सड़न
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Indore में 75 फीसदी बच्चों के दांतों में मिली सड़न

3500 से ज्यादा को कराना पड़ा रूट कैनाल

Last updated: जून 6, 2026 4:01 अपराह्न
By Divisha 3 महीना पहले
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5 Min Read
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Indore में बच्चों की दंत सेहत को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। Indore शासकीय चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के शिशु एवं बाल दंत रोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में 16 हजार से अधिक बच्चे दांतों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। इनमें से लगभग 75 प्रतिशत बच्चों में दांतों की सड़न पाई गई, जो विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर चिंता का विषय है।

Indore अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में बच्चे तब इलाज के लिए पहुंच रहे हैं जब समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। यही कारण है कि सामान्य उपचार की जगह कई बच्चों को रूट कैनाल और दांत निकालने जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है।

हजारों बच्चों को कराना पड़ा गंभीर उपचार

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दंत रोग विभाग के अनुसार उपचार के लिए पहुंचे बच्चों में 4500 बच्चों की फिलिंग की गई। वहीं 3500 से अधिक बच्चों का रूट कैनाल उपचार करना पड़ा। इसके अलावा करीब 2800 बच्चों के दांत निकालने पड़े। आंकड़ों के अनुसार 1200 बच्चों के दांतों की सफाई की गई, जबकि 900 बच्चों को स्टेनलेस स्टील क्राउन लगाए गए। 700 बच्चों को पल्प थेरेपी दी गई और 400 बच्चों को फ्लोराइड प्रिवेंटिव केयर उपलब्ध कराई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती अवस्था में उपचार कराया जाए तो दांतों को बचाया जा सकता है, लेकिन अधिकांश बच्चे तब अस्पताल पहुंचते हैं जब संक्रमण काफी बढ़ चुका होता है।

हर महीने बड़ी संख्या में पहुंच रहे मरीज

वर्ष 2025 के मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में 1405 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे। फरवरी में यह संख्या 1358 रही, जबकि मार्च में 1036 बच्चों का उपचार किया गया। अप्रैल में 1279, मई में 1629 और जून में 1609 बच्चे अस्पताल पहुंचे। जुलाई में 1559, अगस्त में 1200 और सितंबर में 1330 बच्चों का इलाज किया गया। अक्टूबर में 1185, नवंबर में 1284 और दिसंबर में सबसे अधिक 1659 बच्चे उपचार के लिए पहुंचे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पूरे वर्ष बच्चों में दांतों की समस्याएं लगातार बनी रहीं और अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते रहे।

जंक फूड और मीठे पेय बन रहे प्रमुख कारण

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में बढ़ती दंत समस्याओं के पीछे खानपान की बदलती आदतें प्रमुख कारण हैं। चॉकलेट, कैंडी, टॉफी, पैकेट फूड, जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन बच्चों के दांतों को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। मीठा खाने या कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद यदि मुंह की सफाई नहीं की जाए तो दांतों पर बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यही बैक्टीरिया धीरे धीरे दांतों में सड़न पैदा करते हैं और बाद में गंभीर संक्रमण का कारण बनते हैं।

समय पर इलाज नहीं मिलने से बढ़ रही समस्या

दंत रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कई अभिभावक शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। बच्चों में दांत दर्द, ठंडा या गर्म लगना, दांतों का रंग बदलना और सड़न के शुरुआती संकेत दिखाई देने के बावजूद समय पर जांच नहीं कराई जाती।परिणामस्वरूप संक्रमण बढ़ता जाता है और बाद में रूट कैनाल या दांत निकालने जैसी प्रक्रियाओं की आवश्यकता पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित जांच और शुरुआती उपचार से अधिकांश मामलों में दांतों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

डॉक्टरों ने दी यह सलाह

बच्चों की दंत सेहत के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है। बच्चों को दिन में कम से कम दो बार ब्रश कराना चाहिए। मीठा खाने या मीठे पेय पदार्थ पीने के बाद कुल्ला करने की आदत विकसित करनी चाहिए। इसके साथ ही नियमित डेंटल चेकअप कराना, जंक फूड का सेवन कम करना और संतुलित आहार देना भी आवश्यक है। डॉक्टरों का कहना है कि बचपन में अपनाई गई अच्छी आदतें भविष्य में दांतों की गंभीर समस्याओं से बचा सकती हैं।

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TAGGED: childcare, dental, hospital, india, indore, kids, teeth, the fourth, toothcare
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