सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान उज्जैन स्थित Mahakal मंदिर में देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति समय समय पर दर्शन और आरती व्यवस्था में बदलाव करती है। इस बार भी सावन और भादौ में श्रद्धालुओं की सुविधा तथा भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए संध्या और शयन आरती के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब ऐसे श्रद्धालु, जिन्हें ऑनलाइन बुकिंग नहीं मिल पाती, वे भी कार्तिक मंडपम से चलित रूप में संध्या और शयन आरती के दर्शन कर सकेंगे। इससे पहले बिना बुकिंग वाले श्रद्धालुओं को यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
मंदिर समिति के अनुसार पहले संध्या और शयन आरती का लाभ मुख्य रूप से उन्हीं श्रद्धालुओं को मिलता था जिन्होंने पहले से ऑनलाइन बुकिंग कराई होती थी। अब व्यवस्था में बदलाव करते हुए बिना बुकिंग वाले श्रद्धालुओं के लिए भी दर्शन का अलग मार्ग निर्धारित किया गया है। हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बिना बुकिंग वाले श्रद्धालुओं को गणेश मंडपम में बैठकर पूरी आरती देखने की अनुमति नहीं होगी। वे केवल कार्तिक मंडपम से चलित रूप में आरती के दर्शन कर सकेंगे। वहीं जिन श्रद्धालुओं ने निर्धारित शुल्क के साथ ऑनलाइन बुकिंग कराई है, उन्हें पहले की तरह गणेश मंडपम में बैठकर संपूर्ण आरती देखने की सुविधा मिलती रहेगी।
किन श्रद्धालुओं को क्या सुविधा मिलेगी
नई व्यवस्था के बाद श्रद्धालुओं को दो श्रेणियों में सुविधा मिलेगी। पहली श्रेणी में वे श्रद्धालु होंगे जिन्होंने ऑनलाइन बुकिंग कराई है। उन्हें निर्धारित स्थान पर बैठकर पूरी संध्या और शयन आरती देखने का अवसर मिलेगा। दूसरी श्रेणी में वे श्रद्धालु होंगे जिन्हें बुकिंग नहीं मिल सकी। ऐसे श्रद्धालु कार्तिक मंडपम से निर्धारित मार्ग पर चलते हुए आरती के दर्शन कर सकेंगे। इससे अधिक लोगों को आरती के दर्शन कराने का रास्ता खुल गया है।
भीड़ प्रबंधन को मिलेगी मदद
सावन के प्रत्येक सोमवार और अन्य विशेष दिनों में Mahakal मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई बार ऑनलाइन बुकिंग कुछ ही समय में पूरी भर जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती से वंचित रह जाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर परिसर में भीड़ को अलग अलग मार्गों से नियंत्रित करना आसान होगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी और श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार भी कम करना पड़ेगा।
संध्या और शयन आरती का धार्मिक महत्व
Mahakal मंदिर में होने वाली संध्या आरती और शयन आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। संध्या आरती में भगवान महाकाल का विधिवत पूजन और श्रृंगार किया जाता है, जबकि शयन आरती के माध्यम से भगवान को विश्राम के लिए शयन कराया जाता है। इन दोनों आरतियों में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। सावन के दौरान इन आरतियों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
ऑनलाइन बुकिंग क्यों रहती है फुल?
Mahakal मंदिर की आरतियों में शामिल होने की मांग पूरे वर्ष रहती है, लेकिन सावन में यह कई गुना बढ़ जाती है। सीमित संख्या में उपलब्ध सीटें कुछ ही समय में भर जाती हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुकिंग नहीं करा पाते। मंदिर समिति ने नई व्यवस्था लागू कर ऐसे श्रद्धालुओं को भी आरती दर्शन का अवसर देने का प्रयास किया है जो बुकिंग से वंचित रह जाते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह
यदि कोई श्रद्धालु गणेश मंडपम में बैठकर पूरी आरती का लाभ लेना चाहता है तो उसे पहले से ऑनलाइन बुकिंग करानी चाहिए। वहीं बिना बुकिंग वाले श्रद्धालु भी अब निर्धारित मार्ग से चलित दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित प्रवेश द्वार, सुरक्षा नियमों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें ताकि सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन का अवसर मिल सके।
सावन में Mahakal की तैयारियां
सावन के दौरान Mahakal मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, दर्शन मार्ग, पुलिस बल और स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाई जाती है। साथ ही शाही सवारी, विशेष पूजन और अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर भी प्रशासन लगातार तैयारियां करता है। इस वर्ष भी सावन की शाही सवारियां पारंपरिक मार्ग से निकाली जाएंगी, जिसके लिए प्रशासन ने अलग से तैयारियां शुरू कर दी हैं। Mahakal मंदिर की नई व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को संध्या और शयन आरती के दर्शन कराना तथा सावन में बढ़ने वाली भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।
