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Reading: Chandra Shekhar Azad जयंती अमर बलिदान की प्रेरक गाथा
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Fourth Special

Chandra Shekhar Azad जयंती अमर बलिदान की प्रेरक गाथा

देशभक्ति और साहस का अमिट प्रेरक इतिहास

Last updated: जुलाई 23, 2026 3:50 अपराह्न
By Divisha 3 महीना पहले
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6 Min Read
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भारत का स्वतंत्रता संग्राम अनेक महान क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान से भरा हुआ है। इन्हीं वीर सपूतों में एक नाम Chandra Shekhar Azad का है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को नई दिशा दी। हर वर्ष 23 जुलाई को उनकी जयंती Chandra Shekhar Azad जयंती के रूप में मनाई जाती है। वर्ष 2026 में देश उनके जन्म की 120वीं जयंती मना रहा है। इस अवसर पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, प्रतिमा माल्यार्पण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए जा रहे हैं।

Chandra Shekhar Azad जयंती केवल एक महान क्रांतिकारी को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह युवाओं को साहस, आत्मसम्मान और देशभक्ति की प्रेरणा देने का अवसर भी है। आज़ाद ने अपने जीवन में जो संकल्प लिया था, उसे अंतिम सांस तक निभाया और भारतीय इतिहास में अमर हो गए।

कौन थे Chandra Shekhar Azad?

चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर जिले के भाबरा गांव में हुआ था, जिसे आज चंद्रशेखर आज़ाद नगर के नाम से जाना जाता है। उनके पिता सीताराम तिवारी और माता जगरानी देवी थीं। बचपन से ही उनमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद वाराणसी में संस्कृत की पढ़ाई की, लेकिन जल्द ही उनका जीवन देश की आजादी के संघर्ष के लिए समर्पित हो गया।

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कैसे पड़ा ‘आज़ाद’ नाम?

वर्ष 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के दौरान किशोर अवस्था में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में जब मजिस्ट्रेट ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने उत्तर दिया, “नाम आज़ाद, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता जेल।” इस साहसिक उत्तर के बाद उन्हें कोड़े मारने की सजा दी गई, लेकिन उन्होंने हर प्रहार के साथ “भारत माता की जय” का नारा लगाया। तभी से पूरा देश उन्हें चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से जानने लगा। यही घटना Chandra Shekhar Azad जयंती के अवसर पर सबसे अधिक याद की जाती है।

क्रांतिकारी आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेने के बाद कई युवाओं ने सशस्त्र क्रांति का रास्ता चुना। चंद्रशेखर आज़ाद भी उन्हीं में शामिल थे। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े और बाद में संगठन के पुनर्गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद संगठन का नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) रखा गया।आज़ाद ने भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई योजनाएं बनाई।

काकोरी कांड के बाद बढ़ी जिम्मेदारी

1925 के काकोरी कांड के बाद कई प्रमुख क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर फांसी या लंबी सजा दे दी गई। ऐसे कठिन समय में संगठन को संभालने की जिम्मेदारी चंद्रशेखर आज़ाद ने उठाई। उन्होंने युवाओं को संगठित किया, गुप्त ठिकाने बनाए और क्रांतिकारी आंदोलन को कमजोर नहीं होने दिया। उनकी रणनीति और नेतृत्व क्षमता के कारण संगठन दोबारा मजबूत हुआ।

भगत सिंह के सबसे भरोसेमंद साथी

चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह की जोड़ी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे प्रसिद्ध जोड़ियों में मानी जाती है। लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद अंग्रेज अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या की योजना में भी आज़ाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद उन्होंने कई साथियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद की। उनकी संगठन क्षमता और निडरता के कारण साथी क्रांतिकारी उनका बेहद सम्मान करते थे।

कभी जीवित गिरफ्तार नहीं होने का संकल्प

चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रण लिया था कि वे अंग्रेजों के हाथ कभी जीवित नहीं पकड़े जाएंगे। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने अकेले ही काफी देर तक अंग्रेज पुलिस का सामना किया। जब उनके पास अंतिम गोली बची तो उन्होंने उसे स्वयं पर चला लिया, ताकि वे अंग्रेजों के हाथ जीवित न आएं। आज यह पार्क चंद्रशेखर आज़ाद पार्क के नाम से जाना जाता है उनका यह बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में गिना जाता है।

Chandra Shekhar Azad जयंती का महत्व

हर वर्ष Chandra Shekhar Azad जयंती पर देशभर में उनके जीवन और विचारों को याद किया जाता है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में भाषण, निबंध प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न सरकारी और सामाजिक संस्थाएं उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर स्थित उनके जन्मस्थान और प्रयागराज के चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में चंद्रशेखर आज़ाद का योगदान केवल हथियार उठाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने क्रांतिकारी संगठन को मजबूत किया, युवाओं को जोड़ा और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष को नई ऊर्जा दी। उनके नेतृत्व ने अनेक क्रांतिकारियों को प्रेरित किया और स्वतंत्रता आंदोलन को गति प्रदान की। यही कारण है कि इतिहास में उनका नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है।

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