देशभर में चर्चित Raja Raghuvanshi हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। अदालत ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि मुकदमे की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। इस फैसले के बाद Raja Raghuvanshi के परिवार ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई है और इसे कानूनी लड़ाई में बड़ी सफलता बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की सोनम की जमानत
Raja Raghuvanshi हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी का जेल से बाहर रहना उचित नहीं है। कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को 21 दिन के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में सुनवाई पूरी नहीं हो पाती है, तो सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं।
86 दिन से जेल से बाहर, अब फिर होगी वापसी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सोनम रघुवंशी को दोबारा जेल जाना होगा। जानकारी के अनुसार वह करीब 86 दिनों से जेल से बाहर है। इससे पहले वह इस मामले में 324 दिन जेल में रह चुकी है। अब अदालत के आदेश के बाद अगस्त के दूसरे पखवाड़े में उसके दोबारा जेल जाने की संभावना जताई जा रही है।
Raja Raghuvanshi के परिवार को जगी न्याय की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Raja Raghuvanshi के परिवार ने राहत की सांस ली है। राजा की मां उमा रघुवंशी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अब न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। वहीं राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि परिवार लंबे समय से इसी दिन का इंतजार कर रहा था और अब उन्हें उम्मीद है कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।
छह महीने में फैसला आने की उम्मीद
परिवार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यदि ट्रायल तय समय सीमा में पूरा होता है तो Raja Raghuvanshi हत्याकांड में अगले छह महीने के भीतर फैसला आने की संभावना बढ़ गई है। परिवार का कहना है कि वे शुरू से ही निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई की मांग कर रहे थे।
