By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
July 29, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: Guru Purnima पर क्यों मेजबान बन जाता है धूनीवाले दादाजी का खंडवा
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
guru-purnima-par-kyu-mejban-ban-jata-hai-dhuniwale-dadaji-ka-khandwa
Fourth Special

Guru Purnima पर क्यों मेजबान बन जाता है धूनीवाले दादाजी का खंडवा

आस्था, सेवा, परंपरा और मेजबानी की अद्भुत मिसाल

Last updated: जुलाई 29, 2026 4:24 अपराह्न
By Divisha 11 घंटे पहले
Share
8 Min Read
SHARE

भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। इसी गुरु परंपरा के सम्मान में हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के दिन Guru Purnima का पर्व मनाया जाता है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। देशभर के आश्रमों, मठों और मंदिरों में श्रद्धालु अपने गुरु का पूजन करते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और सेवा व साधना के माध्यम से कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

समय के साथ Guru Purnima केवल धार्मिक पर्व नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और सेवा भाव का प्रतीक बन गया है। अलग-अलग राज्यों में इसे स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा में इसका स्वरूप सबसे अलग नजर आता है। यहां स्थित धूनीवाले दादाजी का दरबार इस पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है। सबसे खास बात यह है कि इस अवसर पर केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरा शहर श्रद्धालुओं के स्वागत में जुट जाता है।

Guru Purnima का इतिहास और महत्व

भारतीय धार्मिक ग्रंथों के अनुसार Guru Purnima का संबंध महर्षि वेदव्यास से माना जाता है। उन्होंने वेदों को चार भागों में विभाजित किया, पुराणों का संकलन किया और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना की। इसी कारण उन्हें आदिगुरु का सम्मान दिया गया। उनकी जयंती पर मनाया जाने वाला यह पर्व ज्ञान, अनुशासन और आध्यात्मिक जीवन के महत्व की याद दिलाता है।

हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध और जैन परंपराओं में भी Guru Purnima का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद इसी दिन सारनाथ में अपने पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। वहीं जैन परंपरा में भी गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि यह पर्व केवल किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत का साझा उत्सव बन चुका है।

क्यों खास है Guru Purnima?

भारतीय संस्कृति में कहा गया है— “गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः।”

इस श्लोक का अर्थ है कि गुरु में ही सृजन, पालन और कल्याण की शक्ति समाहित है। Guru Purnima के दिन लोग अपने शिक्षकों, आध्यात्मिक गुरुओं और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्तियों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। कई लोग इस दिन संकल्प लेते हैं कि वे अपने जीवन में अच्छे संस्कारों और ज्ञान का पालन करेंगे। देशभर के आश्रमों और धार्मिक संस्थानों में गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन, ध्यान, यज्ञ और भंडारों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु दूर-दूर से अपने गुरु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण और सेवा कार्य भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे यह पर्व सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।

देशभर में कैसे मनाई जाती है Guru Purnima?

उत्तराखंड के ऋषिकेश और हरिद्वार से लेकर महाराष्ट्र के नासिक, उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मध्य प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों तक Guru Purnima का उत्साह देखने को मिलता है। सुबह से ही मंदिरों और आश्रमों में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। गुरु चरण पूजन, आध्यात्मिक प्रवचन, सामूहिक भजन और प्रसाद वितरण पूरे दिन चलता है। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और अपने गुरु से आशीर्वाद लेकर नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। योग संस्थान और आध्यात्मिक संगठन भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिनमें जीवन मूल्यों, अनुशासन और आत्मविकास पर चर्चा होती है।

मध्य प्रदेश में क्यों अलग पहचान रखता है खंडवा?

मध्य प्रदेश में Guru Purnima कई स्थानों पर श्रद्धा के साथ मनाई जाती है, लेकिन खंडवा का धूनीवाले दादाजी दरबार अपनी अनूठी परंपरा के कारण अलग पहचान रखता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु देश के अलग-अलग राज्यों से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, भजन, सत्संग और विशाल भंडारों का आयोजन होता है, लेकिन इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर का सेवा भाव है। जैसे-जैसे Guru Purnima नजदीक आती है, वैसे-वैसे पूरा खंडवा श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियों में जुट जाता है।

स्थानीय सामाजिक संस्थाएं, धार्मिक संगठन और स्वयंसेवक मिलकर भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहायता और ठहरने की व्यवस्थाएं शुरू कर देते हैं। कई परिवार वर्षों पुरानी परंपरा निभाते हुए अपने घरों के दरवाजे भी श्रद्धालुओं के लिए खोल देते हैं। यही कारण है कि खंडवा की Guru Purnima केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और अतिथि सत्कार की मिसाल बन चुकी है।

धूनीवाले दादाजी: आस्था का केंद्र, सेवा की पहचान

खंडवा स्थित धूनीवाले दादाजी दरबार मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु धूनीवाले दादाजी को सिद्ध संत और लोककल्याण के लिए समर्पित महापुरुष के रूप में याद करते हैं। उनके दरबार में पूरे वर्ष भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन Guru Purnima पर यहां का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। दूर-दराज के राज्यों से हजारों नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालु दादाजी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए खंडवा पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु वर्षों से लगातार इस पर्व पर यहां आने की परंपरा निभा रहे हैं।

दरबार परिसर में सुबह से देर रात तक पूजा-अर्चना, गुरु वंदन, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता है। श्रद्धालु धूनी के दर्शन कर अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। उनके लिए यह केवल दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और आत्मिक शांति प्राप्त करने का पर्व होता है।

Guru Purnima पर खंडवा की सबसे बड़ी पहचान उसकी मेजबानी है। इस दौरान शहर की गलियां, धर्मशालाएं, मंदिर परिसर और कई घर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार नजर आते हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि दादाजी के भक्तों की सेवा करना भी एक प्रकार की गुरु सेवा है। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में परिवार और सामाजिक संस्थाएं स्वयं आगे आकर सेवा कार्यों की जिम्मेदारी संभालती हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में निःशुल्क भंडारे लगाए जाते हैं, जहां हजारों लोगों के भोजन की व्यवस्था होती है।

जगह-जगह पेयजल केंद्र, चिकित्सा सहायता शिविर और विश्राम स्थल बनाए जाते हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कई स्वयंसेवक दिन-रात व्यवस्था संभालते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। यही सेवा भाव खंडवा की Guru Purnima को देश के अन्य आयोजनों से अलग पहचान देता है।

You Might Also Like

International Tiger Day पर मध्य प्रदेश ने फिर दिखाई बाघों की ताकत

Narsinghpur में जल क्रांति की नई मिसाल

Indore में बना 68 वां ग्रीन करिडोर

Madhya Pradesh पुलिस में 9,662 पदों को मंजूरी

Raja Raghuvanshi हत्याकांड में न्याय की नई उम्मीद

TAGGED: dhuni wale dadaji, guru, Guru Purnima, khandwa, thefourth, thefourthindia
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

जो पुलवामा करवा सकता है, वो कुछ भी करवा सकता है- सत्यपाल मालिक

3 वर्ष पहले

अविष्कार जिन पर उन्हें बनाने वाले को नही था नाज़

पीएम मोदी ने तमिलनाडु में 17,300 करोड़ कि कई परियोजनाओं का किया उद्घाटन!

चुनावी खर्च में तुलसी अव्वल, रमेश मेंदोला कंजूस!

UCC याच‍िकाओं पर द‍िल्‍ली हाई कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

You Might Also Like

chandra-shekhar-azad-jayanti-amar-balidan-ki-prerak-gatha
Fourth Special

Chandra Shekhar Azad जयंती अमर बलिदान की प्रेरक गाथा

6 दिन पहले
madhya-pradesh-ke-naye-mukhya-sachiv-bane-ashok-barnwal
Cities

Madhya Pradesh के नए मुख्य सचिव बने अशोक बर्णवाल

6 दिन पहले
national-broadcasting-day-bharat-k-awaz-ka-amar-safar
Fourth Special

National Broadcasting Day भारत की आवाज़ का अमर सफर

6 दिन पहले
national-flag-divas-par-janie-tirange-ki-prerak-yatra
Fourth Special

National Flag दिवस पर जानिए तिरंगे की प्रेरक यात्रा

1 सप्ताह पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?