Indore । मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी और न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले Indore शहर में नागरिकों के जीवन, सुरक्षित पेयजल, प्रशासनिक जवाबदेही और नगर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने पेयजल प्रदूषण के कारणों, बीमारी एवं मौतों, प्रशासनिक और तकनीकी खामियों तथा जिम्मेदारी की जांच की। आयोग की रिपोर्ट में पेयजल के दूषित होने, प्रशासनिक देरी और महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में दूषित पानी से मौतें कैसे हुईं?
Indore देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अपनी पहचान रखता है, लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने नागरिकों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की मूलभूत आवश्यकता भी शामिल है। Indore जैसे बड़े शहरी एवं आर्थिक केंद्र में, पर्याप्त प्रशासनिक संसाधनों के बावजूद ऐसी घटना होना गंभीर चिंता का विषय है। हमने चेताया, सरकार ने नहीं सुना — अब न्यायिक जांच ने उठाए गंभीर सवाल है । दूषित पेयजल, बीमारी और मौतों को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पेयजल प्रदूषण, मौतों एवं बीमारियों के कारणों, प्रशासनिक विफलताओं तथा जिम्मेदारी की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग गठित किया। आयोग ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और बाद में हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए। न्यायिक जांच रिपोर्ट में सामने गंभीर तथ्य आए हैं । आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जा रहा पेयजल दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जांच में सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया। आयोग ने 36 मौतों का परीक्षण किया, जिनमें से 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया, रिपोर्ट के निष्कर्षों पर प्रकाशित विवरण के अनुसार रिपोर्ट में जल एवं सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण में व्यवस्थागत कमियों की ओर भी संकेत किया गया है।
नक्शे, ब्लूप्रिंट और इंजीनियरिंग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना गंभीर सवाल है । आयोग ने दर्ज किया कि कई महत्वपूर्ण तकनीकी एवं इंजीनियरिंग दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इनमें लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग, पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप तथा अन्य तकनीकी रिकॉर्ड शामिल थे। ड्रेनेज एवं सीवरेज कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड में भी कमी सामने आई।
सिंगार ने सरकार से पूछा कि महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं थे और रिकॉर्ड के संरक्षण एवं उपलब्धता में हुई लापरवाही की जवाबदेही किसकी तय होगी। सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में देरी पर गंभीर सवाल है। आयोग ने भागीरथपुरा में सीवेज एवं अपशिष्ट जल पाइपलाइन से जुड़े कार्यों में हुई देरी की भी जांच की गई। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया, फाइल मूवमेंट और कार्य निष्पादन सहित विभिन्न चरणों में प्रशासनिक देरी की ओर संकेत किया गया है। आयोग ने अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर हुई देरी एवं कमियों से संबंधित जिम्मेदारी का भी परीक्षण किया।
मेयर के हस्ताक्षर के लिए फाइल 66 दिन क्यों रुकी?
न्यायिक जांच में सामने आया कि संबंधित फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। इसके बावजूद आयोग ने मेयर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की। आयोग ने केवल इस आधार पर मेयर की व्यक्तिगत लापरवाही तय नहीं की कि फाइल उनके हस्ताक्षर के लिए लंबित थी। लेकिन यह गंभीर सवाल जरूर उठता है कि फाइल 66 दिनों तक किस स्तर पर और किसके पास लंबित रही तथा इस देरी के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी थी।
सिंगार ने कहा कि सरकार और नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना की फाइल इतने लंबे समय तक लंबित क्यों रही।
मुआवजे की सिफारिश पर सरकार बताए, कब होगा भुगतान?
न्यायिक जांच आयोग ने मृतकों के परिवारों तथा प्रभावित मरीजों के लिए मुआवजे एवं सहायता की सिफारिश की है। सिफारिशों में मृतकों के परिवारों को ₹10 लाख तथा प्रभावित मरीजों के लिए आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता का प्रावधान शामिल है। सिंगार ने सरकार से मांग की कि न्यायिक आयोग की सिफारिशों को कब लागू किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को वास्तविक भुगतान किस तारीख तक मिलेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
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