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अमेरिका का विश्व शांति की ओर एक बड़ा कदम

लगभग हर देश ने विश्व शांति की ओर एक कदम बढ़ाया है

Last updated: जुलाई 10, 2023 3:45 अपराह्न
By Rajneesh 3 वर्ष पहले
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4 Min Read
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1939 में शुरू हुआ दूसरा विश्व युद्ध निर्णायक स्थिति की ओर पहुंच रहा था लेकिन जापान के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे थे। ऐसे में अमेरिका ने वो कदम उठाया जिसका न तो दुनिया में किसी को इल्म था और ना ही भविष्य में कोई भी वो मंजर देखना चाहेगा। 1945 को सुबह के करीब आठ बजे हिरोशिमा पर परमाणु बम का जोरदार हमला होता है बम धमाकों में इतनी गर्मी थी कि लोग सीधे जल गए। मात्र एक मिनट के भीतर हिरोशिमा शहर का 80 फीसदी हिस्सा राख हो जाता है। हमले से जापान अभी उबरा भी नहीं था कि तीन दिन बाद ही 9 अगस्त को दूसरे शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम हमला हो गया। नागासाकी पर गिराया गया बम हिरोशिमा से भी ज्यादा शक्तिशाली था। नागासाकी में 9 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे परमाणु बम गिराया गया। इस हमले में 40 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई। आप सोच रहे होंगे कि इस वाक्ये का जिक्र क्यूं हो रहा है तो आपको बताना चाहूंगा कि वो 1945 की वो तारीखें ऐतिहासिक क्षति का प्रमाण हैं और रहेंगी। लेकिन उस नरसंहार के पीछे जिस अमेरिका का हाथ था उसने फिर आज एक ऐतिहासिक फैसला लिया। दुनिया को रासायनिक हथियारों से मुक्त कराने का 26 साल का प्रयास आज सफल हो गया है।

1993 में केमिकल वेपन्स कन्वेंशन को स्वीकार कर लिया गया। यह समझौता 1997 में लागू हुआ। समझौते के तहत अमेरिका के पास इस साल 30 सितंबर तक अपने सभी रासायनिक हथियार नष्ट करने का समय है। रासायनिक हथियार निषेध संगठन के प्रमुख फर्नांडो एरियस ने इस साल मई में कहा था कि संधि के तहत सभी देश पहले ही अपने रासायनिक हथियार नष्ट कर चुके हैं। केवल अमेरिका ही बचा है। हाल ही में अमेरिका ने रासायनिक हथियार भी नष्ट कर दिये। इसके साथ ही, रासायनिक हथियार सम्मेलन पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में रासायनिक हथियारों को पूरी तरह से खत्म करने वाला महाशक्ति अंतिम देश बन गया है।

रासायनिक हथियारों के भंडार को नष्ट करना शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध सामग्री को नष्ट करके, अमेरिका आधिकारिक तौर पर यह रेखांकित कर रहा है कि इस प्रकार के हथियार अब युद्ध के मैदान में स्वीकार्य नहीं हैं और उन मुट्ठी भर देशों को एक संदेश भेज रहा है जो समझौते में शामिल नहीं हुए हैं।

साउथ अफ्रीका, भारत और अल्बिनिया ने सबसे पहले खत्म किए थे अपने वेपन

जून 1997 में, भारत ने घोषित किया था कि इसके पास रासायनिक हथियारों यानी सल्फर मस्टर्ड का 1,045 टन है। 2006 के अंत तक भारत ने अपने रासायनिक हथियारों के सामग्री भंडार का 75 प्रतिशत से अधिक नष्ट कर दिया था और उम्मीद जताई थी कि थी वो तय किए गए समय सीमा के अंतर्गत ही अपने सभी केमिकल हथियारों को नष्ट कर देगा।भारत ने मई 2009 में संयुक्त राष्ट्र को सूचित किया है कि इसने अंतरराष्ट्रीय रासायनिक हथियार कन्वेंशन के अनुपालन में रासायनिक हथियारों के अपने पूरे भंडार को नष्ट कर दिया था।

समझौते मे ना शामिल होने वाले देश

लगभग हर देश ने विश्व शांति की ओर एक कदम बढ़ाया है वहीं मिस्र, उत्तर कोरिया और दक्षिण सूडान ने केमिकल हथियारों को नष्ट करने वाली संधि पर अभी भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

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