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Fourth Special

मध्य प्रदेश के गांव का नाम गाली जैसा , परेशान हैं गांववाले !

कई जनप्रतिनिधि समय-समय पर नाम बदलने का भरोसा दिलाते रहे, लेकिन काम नहीं हुआ।

Last updated: सितम्बर 15, 2023 4:19 अपराह्न
By Parikshit 2 वर्ष पहले
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3 Min Read
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मध्यप्रदेश के गांव का नाम रहवासियों के लिए इतनी मुसीबत बन गया है कि रिश्तेदारों ने दूरी बना ली है। कहीं मेहमान बन कर जाते हैं, तो भी तव्वजो नहीं मिलती। कोई इनके यहां जाना पसंद नहीं करता है। रिश्ते करने में भी दिक्कत आ रही है। रीवा की गुड़ तहसील के गांव ‘भुसड़ी’ की बदनामी पहले कम थी, क्योंकि सोशल मीडिया का दौर नहीं था, लेकिन अब हर तरफ मजाक उड़ रहा है।

मंत्री अफसर से लगाई गुहार

नाम बदलने के लिए अफसर, नेता, मंत्री, विधायक, मुख्यमंत्री… सबके हाथ जोड़ लिए हैं, लेकिन बदनामी है कि साथ ही नहीं छोड़ती। पिछले चौदह साल से गांववाले नाम बदलने को लेकर भटक रहे हैं। पहला आवेदन 2009 में दिया था, उसके बाद सीएम से लेकर राष्ट्रपति तक के सामने अपनी बात रख चुके हैं।

रिश्ते नही हो रहे

गांववाले बताते हैं कि इस नाम के कारण गांव में रिश्ते नहीं होते। हमें दूसरे दर्जे का समझा जाता है। जब पहला आवेदन देने जिला प्रशासन के पास गए, तो भी हंसने लगे। कई जनप्रतिनिधि समय-समय पर नाम बदलने का भरोसा दिलाते रहे, लेकिन हमारा काम नहीं हुआ। राजस्व विभाग को भी कागजात बदलने का कह चुके हैं। इसके अलावा सतना जिले के कूंची गांव का नाम भी अब तक बदला नहीं जा सका है। 2021 में सीएम यहां आए थे। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि नाम बदल जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शादियों में लोग हमारे गांव आने से भी कतराते हैं, लेकिन हमारे अलावा और कोई नहीं जानता।

चिढ़ाते हैं दूसरे लोग

जब गांव के बच्चे दूसरी जगह पढऩे जाते हैं, तो उन्हें यहां का नाम लेकर चिढ़ाया जाता है। अब आलम ये है कि वो रीवा तक भी जाने को तैयार नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों के सामने गुहार लगाने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं बचा है। सिर्फ उन्हीं से बात कर सकते हैं। इसके लिए लोगों ने कमेटी बनाई है, जो सीएम आवास जाएगी। वहां से वक्त लेने के लिए हमने मेल भी किया है। 2023 में अब तक जिन गांवों के नाम बदले गए हैं, उनमें टीकमगढ़ के अरचरा का नाम बदल कर आचार्य धाम, शिवपुरी का नाम बदल कर कुंडलेश्वर धाम, भोपाल के इस्लाम नगर का नाम बदल कर जगदीशपुर और नसरुल्लागंज का नाम बदल कर भेरूदा कर दिया गया है। गांववाले बताते हैं कि हमने तो वो प्रक्रिया भी पूरी कर ली है, जो राज्य शासन ने बताई है। गांव का नाम बदलने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार को आवेदन भेजना होता है। केंद्रीय गृह मंत्री की इजाजत मिलने के बाद राज्य शासन की ओर से अधिसूचना जारी की जाती है और फिर राजस्व विभाग नाम बदली कर देता है। हमने ये तमाम काम पूरे कर लिए हैं।

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