By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
March 7, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: आज की तारीख – 13: क्या है ‘आज़ाद हिंद दिवस’ के पीछे की कहानी?
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
Azad Hind Fauj - The Fourth
Fourth Special

आज की तारीख – 13: क्या है ‘आज़ाद हिंद दिवस’ के पीछे की कहानी?

भारत माँ को बेड़ियों से आज़ाद करने मे हर छोटी - बड़ी घटना का अहम योगदान रहा है। लेकिन 'आज़ाद हिंद फौज' के बगैर आज़ादी का सपना शायद पूरा ना हो पाया होता।

Last updated: अक्टूबर 21, 2024 4:19 अपराह्न
By Rajneesh 1 वर्ष पहले
Share
6 Min Read
SHARE

“सुबह से पहले अँधेरी घड़ी अवश्य आती है। बहादुर बनो और संघर्ष जारी रखो ,क्योंकि स्वतंत्रता निकट है।” नेताजी यानी सुभाष चंद्र बोस के जोश और आत्मविश्वास से भरे ये शब्द जवानों के कानों मे पड़े और मीटिंग हॉल ‘जय हिंद – जय भारत’ के नारों से गूंज उठा।

दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो चुकी थी। नेताजी ने सोवियत संघ, हिटलर की नाजी जर्मनी और इंपीरियल जापान समेत कई देशों की यात्रा पूरी कर ली थी। उनकी इन यात्राओं का मक़सद बाकी देशों के साथ आपसी गठबंधन को मजबूत कर भारत से ब्रिटिश सरकार को उखाड़ फेंकना था।

भारत को अंग्रेजों की हुकूमत से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए लगभग 200 वर्षों का संघर्ष करना पड़ा। इस संघर्ष में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं, चाहे वह 1857 का स्वतंत्रता संग्राम हो या गदर आंदोलन। भारत माँ को बेड़ियों से आज़ाद करने मे हर घटना का अहम योगदान रहा है। इन आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण नाम ‘आज़ाद हिंद फौज’ का भी है।

सन् 1915 मे क्रांतिकारी नेता रास बिहारी बोस और निरंजन सिंह गिल ने जापान मे रहते हुए इंडियन इंडिपेंडेंस लीग बनाई और उसी की एक शाखा के रूप में इंडियन नेशनल आर्मी का गठन भी किया गया जिसे आजाद हिंद सरकार की सेना भी कहा गया। बाद में इसकी कमान सुभाष चंद्र बोस के हाथों मे दे दी गई।

साल 1943 में आज ही की तारीख यानी 21 अक्टूबर को सिंगापुर के कैथी सिनेमा हॉल में एक बड़ी सभा का आयोजन हुआ। इस सभा में नेताजी ने ‘आज़ाद हिंद सरकार’ की स्थापना की घोषणा कर दी। नेताजी ने जोश भरते हुए कहा, “यह सरकार सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, यह हमारी आज़ादी की प्रतीक है। हमारा संघर्ष अब केवल शब्दों का नहीं, बल्कि युद्ध का होगा। हम अपनी फौज के साथ भारत को आज़ाद कराने का संकल्प लेते हैं।”

उस सभा में हर एक दिल गर्व से भर गया था। नेताजी की आवाज़ में वह ताकत थी, जिसने वहां उपस्थित हर व्यक्ति को यह विश्वास दिला दिया कि आज़ादी अब दूर नहीं। इस सरकार को न सिर्फ भारतीयों का समर्थन मिला, बल्कि जापान, जर्मनी, इटली और कुछ अन्य देशों ने भी इसे मान्यता दी। उसी ऐतिहासिक घटना की याद मे आज के दिन को भारत ‘आज़ाद हिंद दिवस’ के रूप मे मनाता है।

आजाद हिंद फौज मे लगभग 45,000 सैनिक थे और सन 1944 तक आते-आते इस फ़ौज में सैनिकों की संख्या लगभग 85,000 हो गई थी। इस फ़ौज को जापान का काफी सहयोग मिला था। क्योंकि इस फौज में ज्यादातर वही सैनिक शामिल थे, जिन्हें जापान ने बंदी बना लिया था, बाद में दूसरे देशों के सैनिक भी इससे जुड़ गए थे। नेताजी के अलावा इसमे कई और नेता भी अहम थे जैसे सुखदेव सेन – जिन्होंने सैन्य अभियानों और योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कर्नल शाह नवाज खान, ब्रिगेडियर जनरल शाह नवाज, लक्ष्मी सहगल – जो आजाद हिंद फौज के महिला संगठन की कप्तान थी और मधुबाला – जो उसी बटालियन की एक प्रमुख सदस्य रही।

आजाद हिंद सरकार की स्थापना के बाद नेताजी ने आज़ादी की लड़ाई को तेज़ कर दिया। उन्होंने आजाद हिंद फौज को “दिल्ली चलो” का नारा दिया। उनका मानना था कि अगर उनकी सेना दिल्ली पहुँच जाती है, तो ब्रिटिश शासन की नींव हिल जाएगी। इस दौरान, उन्होंने कई क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आजादी से पहले ही हिंदुस्तान की अस्थाई सरकार बना दी, जिसे 10 देशों ने मान्यता भी दी थी। आजाद हिंद फौज की अपनी बैंक और करेंसी भी थी। हालांकि, उनका संघर्ष आसान नहीं था। अंग्रेजों के पास बेहतर संसाधन और बड़ा अंतर्राष्ट्रीय समर्थन था। इसके बावजूद नेताजी ने हार नहीं मानी। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का हर पल समर्पित कर दिया।

लेकिन 1945 में, एक दुखद घटना घटी। नेताजी के विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने की खबर आई। हालांकि नेताजी ने तब तक आजाद हिंद सरकार और उनकी फौज के साथ मिलकर तमाम भारतीयों के दिलों में आजादी की ऐसी आग जला दी, जिसे कोई बुझा नहीं सकता था फिर चाहे वो भौतिक रूप मे मौजूद हों या ना हों।

1947 में भारत आज़ाद हुआ। नेता जी की मौत के रहस्य पर बहस तब से लेकर आज तक भी चलती है और आगे भी चलती रहेगी। लेकिन हम तो यही उम्मीद करते हैं कि काश वो आज़ाद भारत के उस पहले क्षण को अपनी आँखों से देख पाए हों।

हम नेताजी और आज़ाद हिंद सरकार के उन बलिदानों को कभी नहीं भूला पाएंगे। उनके संघर्ष और बलिदान की कहानी आने वाले भारतीयों को भी प्रेरित करती रहेगी।

You Might Also Like

सरकार ने महापौर निधि पर लगाई रोक, Nagar Nigam Budget में नहीं होगा प्रावधान

Indore की रंग पंचमी गैर पर इस बार हाईटेक सुरक्षा

Gwalior में हाइवे पर कार को डेढ़ किमी तक घसीटता रहा कंटेनर

Ayatollah Ali Khamenei: इस्लामिक क्रांति से सुप्रीम लीडर तक

Khamenei की मौत के बाद Iran में सत्ता परिवर्तन

TAGGED: azadhinddivas, azadhindfauj, fightforfreedom, freedomstruggle, historyofindia, independence, indianhistory, jayhind, patriotism, struggleforfreedom, subhaschandrabose, thefourth, thefourthindia, worldwarii
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

WhatsApp Image 2024 07 27 at 2.25.38 PM - The Fourth
India

पुणे पोर्श कांड चार्जशीट में नहीं है आरोपी का नाम, 900 पन्नों के आरोपपत्र में 7 लोग आरोपी

2 वर्ष पहले

इधर श्रीलंकन टीम की हार, वहां पूरा बोर्ड हुआ साफ!

तनाव से परेशान एक डॉक्टर ने किया अपने ही परिवार का कत्ल। 

ठंडे बस्ते मे जाने वाली है रणबीर की फिल्म ‘रामायण’

चेन्नई “घोस्ट फैकल्टी स्कैम”, 2500 पदों में मात्र 211 प्रोफेसरों की भर्ती

You Might Also Like

Dubai में शुरू हो रही है Uber की उड़ने वाली टैक्सी सेवा
World

Dubai में शुरू हो रही है Uber की उड़ने वाली टैक्सी सेवा

1 सप्ताह पहले
बधाई हो! Botswana से आए 9 नए चीते, भारत में अब कुल 48 चीते
Cities

बधाई हो! Botswana से आए 9 नए चीते, भारत में अब कुल 48 चीते

1 सप्ताह पहले
Rewa : वर्दी में वायरल रील ने पुलिस ट्रेनीज़ को दिलाई ‘कारण बताओ’ नोटिस
Cities

Rewa : वर्दी में वायरल रील ने पुलिस ट्रेनीज़ को दिलाई ‘कारण बताओ’ नोटिस

1 सप्ताह पहले
Bolivia में सैन्य विमान हादसा, सड़क पर बिखरे नोटों के बीच 15 की मौत
World

Bolivia में सैन्य विमान हादसा, सड़क पर बिखरे नोटों के बीच 15 की मौत

1 सप्ताह पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?