By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
July 22, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: अमर रफ़ी साहब की याद में…!
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
freepressjournal2019 08d1990ed4 ac09 4a52 a4bc 882 1627646264 - The Fourth
Fourth Special

अमर रफ़ी साहब की याद में…!

रफी साहब को भारत के नए तानसेन का दर्जा दिया गया था। उन्होंने अपने पूरे करियर में 28 हजार से ज्यादा गाने गाए।

Last updated: दिसम्बर 24, 2024 4:46 अपराह्न
By Rajneesh 2 वर्ष पहले
Share
6 Min Read
SHARE

“रात के सन्नाटों में, एक आवाज़ आज भी उभरती है। जो न सिर्फ़ कानों को, बल्कि रूह को छू लेती है। वो आवाज़, जो कभी दर्द की तन्हाई बन जाती है,तो कभी मोहब्बत का नग़्मा गुनगुनाती है, तो कभी एक उमंग सी उठा देते है। वो आवाज़, मोहम्मद रफ़ी की है। जाने कितने आशिक़ों ने उनकी आवाज़ में इश्क़ किया, जाने कितने दिलों ने उनके सुरों में सुकून पाया। उनके गाने मंदिर की घंटी की तरह पवित्र थे और मस्जिद की अज़ान की तरह पाक। उनकी आवाज़ में रब का नूर था,जो हर दिल में उतरता चला गया।”

“पहले भी मैं तुमसे मिला हूं पहली दफा ही ऐसा लगा”… आज मोहम्मद रफ़ी का 100 वां जन्मदिन है। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन कुछ समय पहले रील्स में आपने रफी साहब की आवाज़ में ये गीत जरूर सुना होगा। हाँ, मुझे मालूम है कि ये रफी साहब ने नहीं ब्लकि विशाल मिश्रा ने गाया है लेकिन artificial intelligence के जरिए अब ऐसा भी मुमकिन है। इस ट्रेंड के जरिए पुराने गाने वापस जिवंत हुए, जिवंत तो वो पहले से भी थे लेकिन शायद रोजमर्रा के थपेड़ों मे भुला दिए गये थे। हालांकि इसमे कोई दो राय नहीं कि रफी साहब या किसी अन्य कि नकल भी उनकी तौहीन है। लेकिन इस क्रिएटिव लिबर्टी मे कोई नुकसान भी कहां ही है।

रफ़ी साहब की गायकी महज़ संगीत नहीं, आत्मा की परछाईं थी। उनका हर गीत, एक कविता थी; हर सुर, एक एहसास। जैसे बंसी से कृष्ण का संबंध था, वैसे ही संगीत से रफ़ी का। उनकी आवाज़ सुनने वाला जैसे अपने अंदर के हर दर्द, हर खुशी को गुनगुनाने लगता था।

1919 के कोटला सुल्तान सिंह, पंजाब में जन्मे रफ़ी का बचपन बड़ा साधारण था। लेकिन उनकी साधारणता में ही असाधारणता छिपी थी। कहते हैं कि बचपन में उनके गाँव के एक फकीर की गूँजती आवाज़ ने उन्हें संगीत की ओर खींचा। यही वह पहला सुर था, जिसने रफ़ी को सुरों की दुनिया तक खिंच लाया।

उनका सफर लाहौर से शुरू होकर मुंबई तक पहुँचा, लेकिन इस सफर में कहीं भी उन्होंने अपने दिल की मासूमियत और सुरों की पवित्रता नहीं खोई। जब उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया, वह महज़ एक शुरुआत नहीं थी; वह एक वादा था कि भारतीय संगीत को एक ऐसा सितारा मिलने वाला है, जो सदियों तक चमकेगा।

रफ़ी साहब की खासियत थी उनकी आवाज़ का विविधता भरा रंग। रोमांस हो, जैसे “चौदहवीं का चाँद हो,” या दर्द भरे नगमे जैसे “क्या हुआ तेरा वादा गीत की वो लाइन… तेरी बांहों में बीती हर शाम बेवफ़ा ये भी क्या याद नहीं में एक मार्मिक स्पर्श के साथ एक तरह का दर्द से भरा गुस्सा भी है। गुस्सा हारे हुए व्यक्ती की सबसे बड़ी हार का। या फिर वो गीत “एहसान तेरा होगा मुझ परदिल चाहता है वो कहने दो मुझे तुमसे मोहब्बत हो गयी है मुझे पलको की छाँव में रहने दो… में मिन्नत करता हुआ एक फ़कीर।

उनके एक अन्य गीत “दीवाना हुआ बादल क्या गम की घटा छाई”… इस गीत से जुड़ा किस्सा भी याद आ रहा है। रफी साहब की आवाज की ताकत का एहसास मशहूर गायक एसपी बालासुब्रमण्यम के एक अनुभव से भी होता है, जिसने रफी साहब की आवाज और उनके गानों के प्रभाव को बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया। दिल छून लेने वाली इस घटना को खुद बालासुब्रमण्यम ने साझा किया था। एसपी बालासुब्रमण्यम ने एक कार्यक्रम में रफी साहब से जुड़ा दिलचस्प किस्सा बताते हुए कहा था कि जब वह इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे और गायन में अपना करियर शुरू भी नहीं किया था, तब वह रोज साइकिल से कॉलेज जाते थे। रास्ते में एक चाय की दुकान थी, जहां पुराने गाने रेडियो पर बजते थे। इस दौरान हफ्ते में कम से कम तीन दिन रफी साहब का एक खास गाना बजता था। हालांकि, उस वक्त बालासुब्रमण्यम को यह नहीं पता था कि यह गाना किस फिल्म का है और न ही यह कि यह गाना रफी साहब ने गाया है।

उनकी आवाज़ में दर्द का ऐसा जादू था कि सुनने वाला खुद को उसी दर्द में बहता हुआ महसूस करता। “ओ दुनिया के रखवाले” सुनते वक्त जैसे दिल टूट कर पुकार उठता है। वहीं “आने से उसके आए बहार” जैसे गीत में जीवन की चमक का अहसास होता है।

संगीत की दुनिया में जहाँ सितारों का अहंकार अक्सर उनके कद को छोटा कर देता है, रफ़ी वहाँ हमेशा जमीन से जुड़े रहे। उनकी सादगी, उनकी नम्रता और उनकी मोहब्बत ने उन्हें सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी महान बनाया।

31 जुलाई 1980 का वह दिन जब मोहम्मद रफ़ी हमें छोड़ गए, जैसे संगीत ने अपनी आत्मा को खो दिया। लेकिन उनकी आवाज़ आज भी हर कोने में गूँजती है। हर गली, हर चौराहे पर उनके गीत बजते हैं, और हर दिल में उनकी धुनें बसती हैं।

रफ़ी साहब सिर्फ गायक नहीं थे; वह एक युग थे। उनकी आवाज़ उस अमर नदी की तरह है, जो समय के रेगिस्तान को भी हरा-भरा बना देती है। उनकी गायकी हमें सिखाती है कि कला आत्मा का आईना होती है, और आत्मा कभी मरती नहीं।

You Might Also Like

Bhopal में 25 जुलाई से शुरू होगी इलेक्ट्रिक बस सेवा

Indore में किसानों की ट्रैक्टर रैली पर पुलिस कार्रवाई

IRCTC ने आसान की तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया

Indore में स्मार्ट मीटर के बाद बढ़े बिजली बिलों पर बवाल

Jagannath Rath Yatra 2026 आज से शुरू हुई आस्था की सबसे भव्य यात्रा

TAGGED: classic songs, indian cinema, indian music, legendary singer, mohammad rafi, music legend, rafi sahab, soul-stirring voice, thefourth, thefourthindia, timeless voice
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

90c0dcde 7757 4d09 9a1c dc28859b6c2c - The Fourth
World

क्या पेजर ब्लास्ट में इजरायल का कनेक्शन? पेजर क्या है? इसमें ब्लास्ट से लेबनान में 3000 घायल

2 वर्ष पहले

बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर हिंसा थम नहीं रही, अब तक 39 लोगों की मौत

बयानबाजी : कमिंस ने जो कहा वो करके दिखाया, भज्जी हुये ट्रोल

1 April 2026 से बदल गए नियम: टैक्स, बैंकिंग और यात्रा पर सीधा असर

वकालत की डिग्री वाली भाजपा प्रत्याशी

You Might Also Like

Gupta-Navratri-ke-pehle-din-shuru-hoti-hai-10-mahavidyao-ki-sadhna
Religion

Gupta Navratri के पहले दिन से शुरू होती है दशमहाविद्याओं की साधना

7 दिन पहले
Indore-me-15-din-se-chatro-ka-aandolan-jari
Cities

Indore में 15 दिन से छात्रों का आंदोलन जारी

7 दिन पहले
MP-ke-4-khiladio-ka-Hockey-me-bada-chayan
Sports

एमपी के 4 खिलाड़ियों का Hockey में बड़ा चयन

7 दिन पहले
Sawan-me-Mahakal-ki-nayi-aarti-vyavastha-lagu
Religion

सावन में Mahakal की नई आरती व्यवस्था लागू

7 दिन पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?