Noida में युवराज मेहता की मौत के मामले को लेकर अब प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस मामले में Noida की कलेक्टर मेधा रूपम के इस्तीफे की मांग उठ रही है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की बनती है, लेकिन उच्च स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय केवल निचले स्तर के अधिकारी को निलंबित कर मामले को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। मामले में संबंधित सर्किल अधिकारी को निलंबित किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही की जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी पर डालकर पूरे मामले को रफा दफा किया जा रहा है, जबकि जिला स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कलेक्टर मेधा रूपम को लेकर आरोप
इस पूरे मामले में Noida की कलेक्टर मेधा रूपम पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वे आम लोगों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देतीं और प्रशासनिक संवाद बेहद सीमित रहता है। उनके सख्त और तल्ख रवैये को लेकर भी पहले से ही चर्चाएं होती रही हैं। मेधा रूपम चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण भी मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पिता के बड़े पद और सरकार में प्रभावशाली लोगों से अच्छे संबंधों के चलते उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
पोस्टिंग और प्रभाव को लेकर सवाल
आलोचकों का कहना है कि मेधा रूपम की अधिकांश पोस्टिंग दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के आसपास ही रही है। इसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या प्रभावशाली पारिवारिक पृष्ठभूमि का इसमें कोई रोल है। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार के परिवार में कई सदस्य प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत हैं। दोनों बेटियां और दामाद IAS अधिकारी बताए जाते हैं और सभी की पोस्टिंग दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के आसपास ही रही है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर केंद्रित सवाल
युवराज मेहता की मौत के बाद यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और जवाब तय करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल औपचारिक कार्रवाई होती रही, तो भविष्य में भी ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
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