सिस्टम से दावं-पेंच कर रहीं पहलवान Vinesh Phogat का कहना है कि दो साल पहले हिम्मत हार गई थी, लेकिन मेरे बच्चे ने जिंदा कर दिया है। उसकी हंसी ने जान फूंक दी है। अब अगर मैंने गलत के खिलाफ लड़ाई छोड़ दी, तो कभी खुद की शक्ल आईने में नहीं देख पाऊंगी। मैं किसी पहलवान का हक नहीं छीन रही हूं, उन्हीं के लिए लड़ रही हूं।
परिवार से भी मन भर गया था
जब मैं ओलिंपिक से लौटी, तो परिवार से भी मन भर गया था। अकेले रहना चाहती थी। मैं सिर्फ मां और पहलवान नहीं हूं, नेता भी हूं। जुलाना के लोगों ने मुझे जिताया है, उनकी आवाज भी बनना चाहती हूं। पति सोमवीर और मां इस लड़ाई में मेरे साथ हैं। जब बच्चा मुझे रात को सोने नहीं देता है, तो पति उसे संभालते हैं। उन्हें मेरी फिक्र, उनसे भी ज्यादा है।
2028 ओलिंपिक मेरा सपना
ब्रजभूषण के खिलाफ आवाज उठाई, तो जान पर बन आई। गोंडा में हर शख्स उसका करीबी है। शुरू में डर भी लगा, अब किसी की परवाह नहीं। 2028 ओलिंपिक मेरा सपना है। पांच-छह साल कुश्ती लड़ूंगी जो अड़चन बनेगा, पटक दूंगी।
