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Doordarshan की भरोसेमंद आवाज खामोश, वरिष्ठ न्यूज रीडर सरला महेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन
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Doordarshan की भरोसेमंद आवाज खामोश, वरिष्ठ न्यूज रीडर सरला महेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन

टीवी पत्रकारिता के स्वर्णिम दौर की पहचान रहीं

Last updated: फ़रवरी 13, 2026 6:15 अपराह्न
By Divisha 7 महीना पहले
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4 Min Read
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भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम दौर की प्रतिष्ठित हस्तियों में शामिल पूर्व Doordarshan न्यूज रीडर सरला महेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही मीडिया जगत और दर्शकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक Doordarshan के समाचार बुलेटिन का प्रमुख चेहरा रहीं सरला महेश्वरी अपनी शांत आवाज, स्पष्ट उच्चारण और संतुलित प्रस्तुति शैली के लिए जानी जाती थीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। हालांकि उनके निधन के सटीक चिकित्सकीय कारण को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, लेकिन विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों द्वारा किसी विशेष बीमारी की पुष्टि नहीं की गई है।

Doordarshan के दौर की मजबूत पहचान

जब भारतीय टेलीविजन का विस्तार शुरुआती चरण में था और समाचारों के लिए दर्शकों का सबसे बड़ा भरोसा सरकारी चैनल Doordarshan पर हुआ करता था, तब सरला महेश्वरी ने अपनी प्रस्तुति से अलग पहचान बनाई। 1980 और 1990 के दशक में वह Doordarshan समाचार की प्रमुख आवाजों में शामिल थीं। उस समय समाचार पढ़ना केवल जानकारी देना नहीं बल्कि विश्वसनीयता का प्रतीक माना जाता था और उन्होंने इस भरोसे को हमेशा बनाए रखा।

उनकी आवाज में गंभीरता और प्रस्तुति में सादगी थी, जो उन्हें अन्य न्यूज रीडर्स से अलग बनाती थी। दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता का कारण यही संतुलित और गरिमामय अंदाज था। कई लोगों के लिए शाम के समाचार बुलेटिन का मतलब ही सरला महेश्वरी की आवाज हुआ करती थी।

पत्रकारिता के साथ शिक्षण में भी योगदान

पत्रकारिता के अलावा सरला महेश्वरी शिक्षा के क्षेत्र से भी जुड़ी रहीं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी विषय की अध्यापक के रूप में कार्य किया। भाषा की शुद्धता और अभिव्यक्ति की स्पष्टता पर उनका विशेष ध्यान रहता था। छात्रों और सहकर्मियों के अनुसार वह अनुशासन और पेशेवर मूल्यों की मिसाल थीं।

बदलते मीडिया दौर में भी कायम रहा प्रभाव

मीडिया उद्योग में समय के साथ बड़े बदलाव आए। निजी न्यूज चैनलों की संख्या बढ़ी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने पत्रकारिता की शैली को नया रूप दिया। इसके बावजूद सरला महेश्वरी की पहचान एक क्लासिक न्यूज रीडर के रूप में बनी रही। उनकी प्रस्तुति शैली आज भी पत्रकारिता के छात्रों और युवा एंकरों के लिए प्रेरणा मानी जाती है।

उनका काम उस दौर की याद दिलाता है जब समाचार प्रस्तुति में संतुलन, तथ्यों की गंभीरता और शालीनता को सबसे अधिक महत्व दिया जाता था। आज के तेज और प्रतिस्पर्धी न्यूज वातावरण में भी उनकी शैली को पेशेवर पत्रकारिता के मानक के रूप में देखा जाता है।

मीडिया जगत ने दी श्रद्धांजलि

उनके निधन की खबर सामने आने के बाद मीडिया जगत से जुड़े कई लोगों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि व्यक्त की। सहयोगियों और दर्शकों ने उन्हें Doordarshan के स्वर्णिम युग की पहचान बताते हुए याद किया। कई लोगों ने कहा कि उनकी आवाज भारतीय टीवी समाचार के इतिहास का अहम हिस्सा रही है और उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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TAGGED: Doordarshan, news reader, sarla maheshwari, television journalism, thefourth, thefourthindia
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