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Reading: महारानी का कैफे, विशेष लोगों को मदद
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Fourth Special

महारानी का कैफे, विशेष लोगों को मदद

बड़ौदा की महारानी राधिका राज गायकवाड़ ने अपने पुराने पैलेस में गजरा कैफे खोला है।

Last updated: दिसम्बर 4, 2023 2:20 पूर्वाह्न
By Parikshit 3 वर्ष पहले
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3 Min Read
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बड़ौदा। राज परिवार से जुड़े लोगों को सामाजिक काम करते तो कई बार देखा है, लेकिन बड़ौदा की महारानी राधिका राज गायकवाड़ अलग हैं। उन्होंने अपने पुराने पैलेस में गजरा कैफे खोला है। इसकी विशेषता यह है कि यहां काम करने वाले कर्मचारी समलैंगिक तबके से आते हैं।गायकवाड़ का कहना है कि मेरा लक्ष्य यही है कि इस समुदाय से आने वाले लोग आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएं, ताकि किसी के भरोसे न रहें। मैं चाहती हूं कि समाज इन्हें दिल खोल कर अपना ले और उन्हें एक मौका दे, ताकि ये लोग भी आप-हम जैसी सम्मान जनक जिंदगी जी सकें। इस कैफे को बनाने और सजाने में इन्हीं का हाथ है। यदि उन्हें कारोबार करने का अधिकार हमने खुले दिल से दे दिया, तो काबिलियत की कमी नहीं है। यहां के कर्मचारी ध्रुव राज बताते हैं कि जब बड़ौदा में इस तरह का कैफे खुला और बात हवा हुई, तो दुनिया भर से इस तबके से आने वाले लोगों ने मदद भेजना शुरू कर दी। इस कैफे का उद्देश्य समलैंगिकों के बारे में सही जानकारी देना भी है। आमतौर पर इस तबके में आने वालों से दुनिया दूर भागती है। बात तक नहीं करती, जबकि यहां सबके दिल में प्यार है। यहां आने वाले मेहमान भी खुली विचारधारा के हैं।

गुजराती और मराठी पकवान परोसे जाते हैं

एक और कर्मचारी गीत शर्मा का कहना है कि बहुत जरूरी था कि कोई ऐसी पहल करे। महारानी गायकवाड़ ने हमारा साथ दिया। अब तो इस कैफे के बारे में सबको पता है। सुर सागर के किनारे महारानी चिमना बाई के नाम से जो पैलेस है, वहीं यह कैफे चलाया जाता है। गुजराती और मराठी पकवान परोसे जाते हैं। राधिका राजे गायकवाड़ के परिवार की कुछ स्पेशल डिश भी यहां परोसी जा रही हैं, जिसे खाने दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। उनके महल से लाई गई कई नायाब चीजें यहां रखी हैं। यहां अकसर आने वाली चेताली पांचाल बताती हैं कि यह अच्छी पहल है। इस तबके के लोगों को नौकरी नहीं मिलती। कई बार ऐसा भी होता है कि इनके पास किसी फील्ड का हुनर ही नहीं होता, क्योंकि किसी ने सिखाने की जरूरत ही नहीं समझी।

काम देने तक की जिम्मेदारी

महारानी ने जो पहल की है, उसमें सिखाने से लेकर काम देने तक की जिम्मेदारी है। नेहा शाह बताती हैं कि यह समुदाय हमारे बीच का ही है, फिर परहेज कैसा। जो लोग पुरानी बातों को मानते हैं, वो यहां नहीं आते, लेकिन आप देख सकते हैं कि कैफे हमेशा भरा रहता है। पुराने लोगों को तो लगता है कि ये समाज में रहने लायक ही नहीं हैं। महारानी ने इस सोच को बदलने की कोशिश की है। ये समाज हमसे ही शुरू होता है। हम साथ देंगे, तो आगे बढ़ेंगे।

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