By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
September 5, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बाहरी पहचान वाले गणवेश का इतिहास
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
WhatsApp Image 2025 10 15 at 3.37.24 PM - The Fourth
India

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बाहरी पहचान वाले गणवेश का इतिहास

बीती विजयदशमी पर संघ 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

Last updated: अक्टूबर 15, 2025 3:38 अपराह्न
By Rajneesh 11 महीना पहले
Share
5 Min Read
SHARE

इस समय पूरे देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 वर्ष पूरे करने को लेकर चर्चा में है। बीती विजयदशमी पर संघ 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। एक साल बाद यानी 17 अप्रैल 1926 को संगठन को अपना नाम ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ मिला। संघ के प्रति आकर्षित करने वाली कई चीजों में से एक उनका गणवेश है। सालों साल इस गणवेश में भी कई बदलवा हुए जिसकी कहानी भी दिलचस्प है।

RSS की स्थापना के समय संघ की यूनिफॉर्म में खाकी शर्ट, खाकी हाफ पैंट और खाकी टोपी और शॉर्ट लेदर बेल्ट शामिल थी। यानी खाकी पैंट संघ के यूनिफॉर्म में इसकी स्थापना के वक्त से ही जुड़ी है। हॉफ पैंट ही यूनिफॉर्म के लिए क्यों चुनी गई, इसके पीछे की वास्तविक वजह पर कोई ठोस वजह नहीं लिखी है लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस पैंट का चुनाव शायद शारीरिक व्यायाम को ध्यान में रखकर किया गया होगा जो संघ की शाखाओं में होता था।

1920 में आर्मी से रिटायर हुए मार्तंड राव जोग संघ से जुड़े तो उन्हें युवकों के प्रशिक्षण का काम दिया गया था और वो आर्मी के तरीके से ही ड्रिल आदि करवाते थे। इसी के चलते इसमें लाठी भी जुड़ गई थी।

शुरू में यूनिफॉर्म का हिस्सा रही खाकी टोपी को संघ की स्थापना के पांच साल बाद ही साल 1930 में काली टोपी में बदल दिया गया। हां, पांच साल बाद खाकी टोपी को काली टोपी से बदल दिया गया था। इस बदलाव के पीछे भी कोई वजह आज तक स्पष्ट नहीं है। संघ के पक्ष में सोचने वाले इसके पीछे की वजह खुद को सैन्य संगठनों से अलग रूप देने की इच्छा बताते हैं।

इस दौरान कुछ संघ का विरोध करने वाले लोग उस काली टोपी को ‘मुसोलिनी’ की सेना की काली टोपी से जोड़ते रहे। हालांकि दोनों टोपियों में काफी अन्तर नजर आता है।

फिर साल 1939 में संघ की शर्ट का रंग भी बदल दिया गया और यह खाकी से सफेद कर दी गई। इसके पीछे ब्रिटिश शासन की तरफ से संघ की यूनिफॉर्म और ड्रिल पर लगाया गया बैन था। इसके बाद आरएसएस की यूनिफॉर्म में जूते और बेल्ट तक में भी बदलाव देखने को मिला और खाकी रंग केवल हाफ पैंट और मोजों में रह गया।

संघ के गणवेश में बड़ा बदलाव 1940 में भी देखने मिला, और इसकी वजह थे अंग्रेज। जब दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ तो भारत में अंग्रेज भी सतर्क हो गए और संघ पर उनकी खास नज़र थी। उन दिनों संघ की गणवेश में लम्बा बूट था। ये बूट नागपुर में ही बनता था। संघ ने इन लंबे बूट्स को भी इमरजेंसी के दौरान अलविदा कह दिया था और उनके स्थान पर आज जो काले जूते चलते हैं, उन्हें अपना लिया।

जूतों को बदलने के बाद 2010 – 11 में बेल्ट भी बदल कर कैनवास की कर दी गई थी। उसी वक्त बरसों पुरानी मांग दोहराई गई कि निकर की जगह फुल पेंट होनी चाहिए ताकि उससे पहनने में संकोच कर रही युवा पीढ़ी को सहजता मिले। लेकिन ये तय हुआ कि पांच साल बाद इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा।

फिर साल 2016 में आरएसएस ने अपनी यूनिफॉर्म में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया। खाकी हाफ पैंट की जगह संघ के गणवेश में भूरे रंग की फुल पैंट को शामिल किया गया। तब संघ के महासचिव भैयाजी जोशी ने कहा था कि इस पैंट को चुनने के पीछे कोई खास कारण नहीं है। हालांकि, ऐसा माना गया था कि संघ की यूनिफॉर्म के हाफ पैंट का आकार और इसका रंग बड़े युवा वर्ग तक जुड़ने में कहीं न कहीं अड़चन बना हुआ था। ऐसे में संघ को उम्मीद थी कि यूनिफॉर्म में बदलाव करने के बाद वह ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर पाएगा।

You Might Also Like

Nikita Porwal अब मिस वर्ल्ड 2026 में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

Janmashtami पर मप्र के इन कृष्ण मंदिरों में उमड़ेगी आस्था

Hanuman Ansh के गाने ने बदली सुनील लोधी की जिंदगी

Mahakali में अक्षय खन्ना का रौद्र रूप देख मची हलचल

यश की Toxic में कितना दम, जानें फिल्म का पूरा रिव्यू

TAGGED: British ban, full pants, Hedgewar founder, khaki short, rss, RSS 100 years, RSS history, RSS uniform, thefourth, thefourthindia
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

ed2b921882a84648ab67fb14e844b225 768 432 - The Fourth
India

पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या: अनदेखे दर्द की कहानी

2 वर्ष पहले

फिर से अपने प्यार का शिकार बनी महिला

जियो Google! Door To Curiosity के 25 साल पूरे

ग्वालियर कोर्ट परिसर में अम्बेडकर की मूर्ति पर विवाद कितना सही और कितना गलत?

Indore : जनगणना में आज से स्व गणना का दौर

You Might Also Like

drishyam-3-ka-nya-naam-sun-badha-darshako-ka-suspense
Entertainment

Drishyam 3 का नया नाम सुन बढ़ा दर्शकों का सस्पेंस

2 सप्ताह पहले
shravan-ke-aakhri-somvar-pr-shivmay-hua-ujjain-indore
Cities

Shravan के आखिरी सोमवार पर शिवमय हुआ उज्जैन-इंदौर

2 सप्ताह पहले
2030-tak-moon-par-khulenge-naukri-ke-naye-raste
Science

2030 तक Moon पर खुलेंगे नौकरी के नए रास्ते

2 सप्ताह पहले
indore-me-khula-14-d-cinema-wala-virtual-zoo
Cities

Indore में खुला 14-D सिनेमा वाला Virtual Zoo

2 सप्ताह पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?