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देश में 46% Indians को नहीं मिल रही 6 घंटे की भी नींद
Health

देश में 46% Indians को नहीं मिल रही 6 घंटे की भी नींद

सर्वे के अनुसार करीब 70 करोड़ लोग पर्याप्त नींद से वंचित

Last updated: मार्च 14, 2026 4:59 अपराह्न
By Divisha 3 महीना पहले
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7 Min Read
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India में तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच नींद की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। हाल ही में जारी एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश के 46 प्रतिशत लोगों को रोजाना छह घंटे से भी कम नींद मिल पा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए औसतन सात से आठ घंटे की नींद आवश्यक मानी जाती है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इससे काफी कम नींद ले पा रहे हैं।

यह सर्वे दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच देश के 393 जिलों में किया गया। इसमें 89 हजार से अधिक लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि देश में लगभग 70 करोड़ लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी चिंता का विषय बनती जा रही है।

नींद का बिगड़ता गणित

सर्वे में सामने आए आंकड़े यह बताते हैं कि भारत में नींद की स्थिति संतुलित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार 46 प्रतिशत Indians केवल छह घंटे या उससे कम सो पाते हैं। वहीं 42 प्रतिशत लोगों को छह से आठ घंटे के बीच नींद मिलती है, जो सामान्य मानी जा सकती है। इसके अलावा लगभग 23 प्रतिशत लोग केवल चार से छह घंटे की नींद ले पाते हैं। इतने ही लोग ऐसे हैं जिन्हें चार घंटे या उससे भी कम नींद मिलती है। दूसरी ओर केवल 8 प्रतिशत लोगों को ही रोजाना आठ से दस घंटे की पर्याप्त नींद मिलती है। वहीं लगभग 4 प्रतिशत लोग दस घंटे से अधिक सोते हैं।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि देश की बड़ी आबादी पर्याप्त नींद से वंचित है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में स्थिति में कुछ सुधार जरूर दर्ज किया गया है। वर्ष 2025 में जहां 59 प्रतिशत लोगों को छह घंटे से कम नींद मिलती थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 46 प्रतिशत पर आ गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञ इस स्थिति को चिंताजनक मानते हैं।

पर्याप्त नींद क्यों है जरूरी

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार नींद शरीर और मस्तिष्क के स्वस्थ संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब व्यक्ति पर्याप्त नींद लेता है तो शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत होती है और दिमाग को आराम मिलता है। इससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और मानसिक संतुलन बना रहता है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोध के अनुसार लगातार कम नींद लेने से मस्तिष्क के उस हिस्से की सक्रियता कम हो सकती है जो निर्णय लेने और आत्म नियंत्रण से जुड़ा होता है। इसके कारण व्यक्ति की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। नींद की कमी का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। लंबे समय तक कम नींद लेने से अवसाद, चिंता, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

आधुनिक जीवनशैली बन रही बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली नींद की कमी की एक बड़ी वजह बन रही है। डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग, देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, अनियमित दिनचर्या और काम का बढ़ता दबाव लोगों की नींद को प्रभावित कर रहा है।

इसके अलावा बढ़ता मानसिक तनाव भी नींद की गुणवत्ता को खराब करता है। कई लोग देर रात तक काम करते हैं या सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं, जिसके कारण उनका सोने का समय लगातार आगे खिसकता जा रहा है। इससे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी भी प्रभावित होती है।

जीवनशैली में बदलाव से मिल सकता है समाधान

सर्वे में यह भी सामने आया है कि जीवनशैली में छोटे छोटे बदलाव करके नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। जिन लोगों की नींद में सुधार हुआ, उनमें से लगभग 60 प्रतिशत लोगों ने बताया कि हल्का रात का भोजन, नियमित व्यायाम और सकारात्मक घरेलू वातावरण से उन्हें बेहतर नींद आने लगी। इसके अलावा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनानी चाहिए। नियमित समय पर सोने और जागने की आदत भी अच्छी नींद के लिए जरूरी मानी जाती है।

अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा असर

नींद की कमी केवल स्वास्थ्य समस्या ही नहीं है बल्कि इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। रैंड कॉरपोरेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार अधूरी नींद के कारण दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को हर साल लगभग 680 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नींद की कमी के कारण कार्यस्थल पर उत्पादकता घटती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च और समय से पहले मृत्यु के मामले भी इस आर्थिक बोझ को बढ़ाते हैं।

तकनीक से मिल सकती है मदद

हाल के वर्षों में नींद से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीकों का उपयोग भी बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्लीप ट्रैकिंग सिस्टम और पहनने योग्य डिवाइस लोगों को अपनी नींद के पैटर्न को समझने में मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही डिजिटल कोग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे प्लेटफार्म भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हल्की और मध्यम अनिद्रा के इलाज में प्रभावी साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीक के माध्यम से नींद से जुड़ी समस्याओं का समाधान और अधिक सुलभ हो सकेगा।

जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नींद को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है। अक्सर लोग काम या मनोरंजन के कारण नींद को महत्व नहीं देते, जबकि स्वस्थ जीवन के लिए यह उतनी ही जरूरी है जितना संतुलित आहार और नियमित व्यायाम। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में यह एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है। इसलिए बेहतर जीवनशैली अपनाकर और नींद को प्राथमिकता देकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

https://www.instagram.com/p/DV0AbteCGHK/?igsh=MW9tbjdwY2h2b2MzaQ==

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