By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
June 6, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: 1993 धमाके के बाद मुंबई वैसी नहीं रही जैसी वो पहले हुआ करती थी
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
on this day 1993 Mumbai Serial Bomb Blasts 2025 03 c77960d8462f55e4b0818132f9761fc5 - The Fourth
India

1993 धमाके के बाद मुंबई वैसी नहीं रही जैसी वो पहले हुआ करती थी

एक के बाद एक 12 धमाके मुंबई को हिला चुके थे।

Last updated: मार्च 18, 2025 12:19 अपराह्न
By Rajneesh 1 वर्ष पहले
Share
5 Min Read
SHARE

ये कहानी सिर्फ़ बम धमाकों की नहीं है, ये कहानी उस शहर की है जो कभी सोता नहीं था और फिर एक दिन ऐसा आया जब उसकी नींद छीन ली गई। मुंबई—एक शहर जो सपनों का था, एक ऐसा शहर जहाँ हर कोई कुछ बनने आता था, वो 1993 और फिर 2008 में एक ऐसा डर बन गया, जिसने उसकी आत्मा को झकझोर दिया।

दोपहर के 1:30 बजे का वक्त था। लोग अपने दफ्तरों में लंच कर रहे थे, सड़कों पर भीड़ थी, समंदर अपनी लहरों से उसी तरह किनारों को सहला रहा था, मानो सबकुछ सामान्य हो। लेकिन कोई नहीं जानता था कि अगले कुछ घंटों में यह शहर लहूलुहान होने वाला था।

पहला धमाका बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के ठीक सामने हुआ। तेज़ धमाके की आवाज़ के साथ इमारत की खिड़कियाँ चकनाचूर हो गईं। जो जहाँ था, वहीं थम गया। कुछ को समझ ही नहीं आया कि यह क्या हुआ। लेकिन इससे पहले कि कोई संभल पाता, एक के बाद एक 12 धमाके मुंबई को हिला चुके थे।

स्टॉक एक्सचेंज से लेकर ज़वेरी बाज़ार, प्लाज़ा सिनेमा, सी रॉक होटल, एयर इंडिया बिल्डिंग, सेंचुरी बाज़ार… हर जगह आग, चीखें और अफरा-तफरी मच चुकी थी। सड़कें लाशों को अपनी गोद में समेटे हुए खुद भी नहीं सोच पा रही थी कि उनका क्या करना है। खून से सनी बॉडीज़, अधजले चेहरे, तड़पते लोग, बिखरे हुए अंग…यह मंजर ऐसा था जिसे शब्दों में बयान कर पाना मुमकिन भी नहीं। धमाकों का तरीका भी सुनियोजित था…कार बम, स्कूटर बम, ट्रक बम। हमलावर जानते थे कि शहर के कौन-से हिस्से सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाले हैं और कब धमाका किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग मारे जाएं।

बॉम्बे हॉस्पिटल, जे.जे. हॉस्पिटल, केईएम, और सायन हॉस्पिटल में जगह नहीं बची थी। डॉक्टर लगातार खून से लथपथ शरीरों को देख रहे थे, लेकिन हर किसी को बचा पाना नामुमकिन था। किसी का पैर कट चुका था, किसी के हाथ की नसें बाहर लटक रही थीं। कई लोग जिंदा जल चुके थे, उनके चेहरे पहचान में नहीं आ रहे थे।

12 मार्च 1993 के बाद मुंबई वही नहीं रही। इस शहर ने पहली बार संगठित आतंकवाद का घाव महसूस किया। यहाँ पहले भी दंगे हुए थे, लेकिन यह हमले योजनाबद्ध, क्रूर और भयावह थे। हर व्यक्ति के अंदर एक अनदेखा डर घर कर गया था।

बाद में खुलासा हुआ कि यह हमला दाऊद इब्राहिम और उसके D कंपनी द्वारा रचा गया था। बाबरी ढांचे को गिराने और मुंबई दंगों का बदला लेने के लिए इस हमले को अंजाम दिया गया। हथियार और Rdx दुबई और पाकिस्तान से आए थे। टाइगर मेमन, याकूब मेमन और उनके साथियों ने इस नरसंहार को अंजाम दिया था।

पुलिस और खुफिया एजेंसियों की चूक भी सामने आई। बम धमाकों के बाद मुंबई में पहली बार संगठित आतंकवाद के खिलाफ सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। मुंबई पुलिस और भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आतंकवाद के खिलाफ नई रणनीतियाँ बनाई। 1999 में टाडा कोर्ट ने कई दोषियों को फांसी और उम्रकैद की सज़ा सुनाई, लेकिन दाऊद और टाइगर मेमन अब भी फरार हैं। 2015 में याकूब मेमन को फांसी दी गई, लेकिन यह घाव अभी भी भरा नहीं है।

बेशक, 12 मार्च 1993 ने मुंबई को तोड़ दिया था, लेकिन यह शहर कभी हार नहीं मानता। आज भी लोग मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के बाहर खड़े होकर वही कारोबार करते हैं। ज़वेरी बाज़ार फिर से रोशनी में नहाया हुआ है। लोकल ट्रेनें उसी रफ्तार से दौड़ती हैं।

मुंबई कभी रुकती नहीं थी, मगर अब उसकी रफ़्तार में सतर्कता आ गई थी। लोग अजनबियों से सवाल करने लगे, लावारिस बैग देखकर सहमने लगे। मुंबई ने अपनी चकाचौंध के पीछे एक साया महसूस करना शुरू कर दिया था…एक ऐसा डर, जो उसके DNA का हिस्सा बन गया।

मुंबई आज भी चल रही है, भाग रही है, लेकिन उसकी आँखों में वह दिन हमेशा के लिए कैद है। एक शहर, जो कभी नहीं सोता, उस दिन खामोश हो गया था। लेकिन अगले ही दिन, वही शहर अपने घाव छुपाकर फिर से खड़ा हो गया…क्योंकि यही मुंबई की फितरत है।

You Might Also Like

Brown में दिखा करिश्मा कपूर का सबसे अलग अवतार

World Environment Day 2026 क्यों पूरी दुनिया के लिए अहम है

Indore में मासूम की माैत, परिवार ने गलत इलाज का आरोप लगाया

Indore में पानी चारी रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगा रहे

मध्यप्रदेश में मंदिरों के लिए ‘Temple-Bond’

TAGGED: 1993 bombay blasts, bombay stock exchange, D company, mumbai, riots, thefourth, thefourthindia
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

105873318 - The Fourth
India

आरोपी ने जेल में कि Law की पढ़ाई, खुद का केस लड़ कर बेगुना साबित हुआ

2 वर्ष पहले

नमक्कल में ग्रिल्ड चिकन और शावरमा खाने से मौत

Drake की 8वीं Studio Album आज होगी Release।

दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए टीम घोषित, घोषणा के बाद किन बातों पर हो रही चर्चा?

भारत में बंद नेटफ्लिक्स पासवर्ड शेयरिंग

You Might Also Like

uttarakhand-me-fir-khila-valley-of-flowers-ka-saundarya
Fourth Special

उत्तराखंड में फिर खिला Valley of Flowers का सौंदर्य

3 दिन पहले
IIT-baba-adikarta-narayan-shoshan-ke-case-me-giraftar
National

IIT बाबा आदिकर्ता नारायण शोषण केस में गिरफ्तार

3 दिन पहले
IMG 20260601 WA0004 - The Fourth
India

केदारनाथ मंदिर के दान के पैसों से VIP की खातिरदारी, हंगामा

5 दिन पहले
Harmanpreet-kaur-ne-kaise-tay-kiya-Padma-Shri-tak-ka-safar
National

हरमनप्रीत कौर ने कैसे तय किया Padma Shri तक का सफर

2 सप्ताह पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?