अपने अभिनय से हंसाने वाले एक एक कर दुनिया छोड़ रहे हैं। असरानी के निधन की मायूसी अभी मिटी भी नहीं थी की सतीश शाह ने निधन की खबर ने हिला दिया। आँखों के सामने ब्लैक एंड व्हाइट टीवी का दौर छा गया। 1980 के दशक में “ये जो है जिंदगी” से लेकर “जाने भी दो यारों” सहित ढेरों यादें सतीश शाह अपने पीछे छोड़ गए।
सबको हंसाने वाले सतीश शाह खुद किडनी की समस्या से जूझ रहे थे। 74 वर्ष की आयु में मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की जानकारी फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने दी।

सतीश शाह भारतीय मनोरंजन जगत के उन कलाकारों में से थे, जिनका नाम सुनते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। उन्होंने कॉमिक टाइमिंग और बहुआयामी अभिनय के लिए हमेशा सराहना पाई।
करियर और प्रमुख काम
सतीश शाह ने अपने करियर की शुरुआत 1978 में फिल्म अर्विंद देसाई की अजीब दास्तान से की थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिनमें जाने भी दो यारों, मैं हूं ना, और कल हो ना हो प्रमुख हैं।

टीवी की दुनिया में उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली सिटकॉम ‘साराभाई vs साराभाई’ में इंद्रवदन साराभाई के किरदार से। उनका यह किरदार दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया।
बॉलीवुड और टीवी जगत में शोक
सतीश शाह के निधन की खबर मिलते ही बॉलीवुड और टीवी जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके कई सहयोगियों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा, “सतीश शाह जैसे कलाकार बहुत कम होते हैं। उनकी अनुपस्थिति हमेशा खलेगी।”
यादों में सतीश शाह

सतीश शाह का योगदान केवल हास्य तक सीमित नहीं था। उन्होंने गंभीर और ड्रामेटिक भूमिकाओं में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उनके किरदारों की बहुआयामी छवि और सहज कॉमिक टाइमिंग उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत के अमूल्य रत्न बनाती है।

उनके निधन से दर्शक, सहयोगी और पूरी फिल्म इंडस्ट्री एक महान कलाकार को खो चुके हैं। सतीश शाह की यादें और उनका अद्भुत अभिनय हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

