मध्यप्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला Indore इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक से जूझ रहा है। शहर की कॉलोनियों, मुख्य सड़कों, बाजारों और रहवासी इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हर महीने करीब पांच हजार लोग कुत्तों के हमले में घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या भी काफी ज्यादा बताई जा रही है।
हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के आंकड़ों ने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर कर दिया है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच करीब 18 हजार लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। कई मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें भर्ती तक करना पड़ा।
बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
डॉक्टरों और स्थानीय लोगों के अनुसार आवारा कुत्तों का सबसे आसान निशाना छोटे बच्चे बन रहे हैं। स्कूल जाते समय, खेलते वक्त या कॉलोनियों में घूमते हुए बच्चों पर अचानक हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक हर महीने सैकड़ों बच्चे डॉग बाइट का शिकार होकर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

जनवरी में 844 बच्चे, फरवरी में 667, मार्च में 787 और अप्रैल में 790 बच्चों के मामले दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की लंबाई कम होने और अचानक डर जाने के कारण कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। कई मामलों में बच्चों के चेहरे, हाथ और पैरों पर गंभीर चोटें आई हैं।
रात के समय बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि रात के समय स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। शहर की कई कॉलोनियों और सुनसान सड़कों पर कुत्तों के झुंड घूमते दिखाई देते हैं। बाइक या पैदल निकलने वाले लोगों पर अचानक हमला करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रहवासियों के मुताबिक रात में वाहनों की आवाजाही कम होने के कारण कुत्तों के झुंड सड़क के बीचोंबीच बैठे रहते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति या वाहन उनके पास से गुजरता है, वे पीछे दौड़ने लगते हैं। कई लोग डर के कारण गिरकर घायल हो चुके हैं।
दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान

Indore में बाइक और स्कूटी चालकों के लिए यह समस्या बड़ी चुनौती बन चुकी है। कई बार आवारा कुत्ते तेज आवाज या बाइक की लाइट देखकर अचानक पीछे दौड़ने लगते हैं। इससे चालक घबरा जाते हैं और सड़क पर गिर जाते हैं। शहर के कई इलाकों में ऐसे हादसे सामने आए हैं जहां लोग कुत्तों से बचने की कोशिश में गंभीर रूप से घायल हुए। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में अकेले निकलना मुश्किल हो गया है। कई परिवार अपने बच्चों को शाम के बाद बाहर भेजने से भी डर रहे हैं।
नौलखा क्षेत्र की घटना ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में Indore नौलखा क्षेत्र में रहने वाले 18 वर्षीय युवक पर चार कुत्तों ने हमला कर दिया। युवक घर से बाहर निकला ही था कि कुत्तों के झुंड ने उसे घेर लिया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह युवक को बचाया। घटना में युवक को गंभीर चोटें आईं। परिवार का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में बाहर से कुत्तों को लाकर छोड़ा जा रहा है जिससे समस्या और बढ़ गई है।
सिर्फ कुत्ते ही नहीं दूसरे जानवर भी बन रहे खतरा
अस्पताल के आंकड़ों में सिर्फ कुत्तों के काटने के मामले ही नहीं बल्कि बिल्ली, बंदर और चूहों के हमले के मामले भी सामने आए हैं। अप्रैल महीने में चूहों के काटने के 101 मामले दर्ज हुए जबकि बंदरों के हमले के भी कई केस सामने आए। हालांकि कुल मामलों में सबसे बड़ी संख्या आवारा कुत्तों के हमलों की ही रही। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय है क्योंकि इससे रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
Indore नगर निगम की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
Indore नगर निगम पिछले कई वर्षों से आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान चलाने का दावा कर रहा है। वर्ष 2014 से शहर में नसबंदी कार्यक्रम शुरू किया गया था ताकि कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जा सके। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि इतने वर्षों बाद भी स्थिति क्यों नहीं सुधर पाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में नसबंदी अभियान पूरी तरह प्रभावी नहीं है। रहवासी आरोप लगा रहे हैं कि शिकायत करने के बावजूद कई बार टीम मौके पर नहीं पहुंचती। कुछ क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद तुरंत घाव को साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना चाहिए। रेबीज संक्रमण से बचाव के लिए समय पर इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग शुरुआती लापरवाही के कारण बाद में गंभीर संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लोगों में बढ़ रहा डर और गुस्सा
Indore शहर में लगातार बढ़ रही घटनाओं के कारण लोगों में डर के साथ गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। कई रहवासी संगठनों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। कई कॉलोनियों में लोगों ने बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया है। पार्कों और खाली मैदानों में खेलने वाले बच्चों की संख्या भी कम होती दिखाई दे रही है। बुजुर्गों और महिलाओं में भी डर का माहौल बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नसबंदी अभियान चलाना काफी नहीं होगा। इसके साथ कचरा प्रबंधन, नियमित निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान पर भी काम करना जरूरी है। शहर में खुले में फेंका जाने वाला खाद्य कचरा भी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ाने का बड़ा कारण माना जा रहा है।
साथ ही लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत है ताकि कुत्तों को उकसाने या उनके झुंड के पास जाने जैसी गलतियों से बचा जा सके। प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है। Indore में हर महीने सामने आ रहे हजारों मामलों ने यह साफ कर दिया है कि आवारा कुत्तों की समस्या अब केवल स्थानीय परेशानी नहीं बल्कि बड़ा सार्वजनिक सुरक्षा मुद्दा बन चुकी है। यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह खतरा और गंभीर रूप ले सकता है।
