मध्यप्रदेश, जिसे लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना जैसी बेटियों को सशक्त बनाने वाली योजनाओं के लिए जाना जाता है, वहां एक वरिष्ठ अफसर की विवादित टिप्पणी ने बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी और अजाक्स संगठन के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर दिए गए बयान ने कई संगठनों को नाराज़ कर दिया है। मामला अब इतना बढ़ गया है कि अफसर के सस्पेंशन और गिरफ्तारी की मांग तेजी से उठ रही है।
घटना उस समय सामने आई जब अजाक्स के एक कार्यक्रम में संतोष वर्मा को प्रांताध्यक्ष चुना गया। इसी दौरान भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक उनके बेटे को कोई ब्राह्मण परिवार अपनी बेटी नहीं देगा या उससे संबंध नहीं बनाएगा, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। यह बयान सोशल मीडिया पर दो सेकेंड की वायरल क्लिप के रूप में तेजी से फैलने लगा और आरोप लगे कि उन्होंने समाज की बेटियों का अपमान किया है।
बयान के सामने आने के बाद सपाक्स के राष्ट्रीय संयोजक डॉ हीरालाल त्रिवेदी ने इसे सबसे घटिया और निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी बेटी और दूसरे की बेटी के बीच इतना अंतर करता है, उसे सार्वजनिक पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे अजाक्स हो, सपाक्स हो या अपाक्स, ऐसे विचार रखने वाले व्यक्तियों का समाज द्वारा बहिष्कार होना चाहिए।
विवाद बढ़ता देख संतोष वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उनका कहना है कि पूरा भाषण 27 मिनट का था लेकिन केवल दो सेकेंड की क्लिप दिखाकर गलत अर्थ निकाले जा रहे हैं। इसके बावजूद कई सामाजिक संगठन माफी को पर्याप्त नहीं मानते और कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
यह मामला अब सरकार की चौखट तक पहुंच गया है और सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस विवादित टिप्पणी के खिलाफ क्या कदम उठाता है।
