कान में बार बार पिन, चाबी, माचिस की तीली या ईयरबड डालना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। ज्यादातर लोग इसे सामान्य मानते हैं, लेकिन Indore में सामने आया एक मामला इस आदत के खतरनाक परिणामों की बड़ी चेतावनी बन गया। यहां 25 वर्षीय युवक को कान खुजलाने की आदत इतनी भारी पड़ी कि इन्फेक्शन धीरे धीरे चेहरे की नस तक पहुंच गया और उसका चेहरा टेढ़ा हो गया। डॉक्टरों के मुताबिक समय रहते इलाज नहीं होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
बचपन से थी कान बहने की समस्या
जानकारी के अनुसार Indore के युवक को बचपन से ही कान बहने और बार बार सर्दी जुकाम की समस्या रहती थी। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज किया। युवक को कान में खुजली और जलन महसूस होती थी, इसलिए वह राहत पाने के लिए पिन, चाबी और ईयरबड जैसी चीजों का इस्तेमाल करता था। धीरे धीरे यही आदत बड़ी समस्या में बदल गई। कान के अंदर लगातार चोट लगने और सफाई के गलत तरीकों की वजह से इन्फेक्शन बढ़ता गया। युवक को सुनाई देना कम होने लगा और चेहरे में कमजोरी महसूस होने लगी।
इन्फेक्शन ने पहुंचाया गंभीर नुकसान
डॉक्टरों के अनुसार कान के अंदर होने वाला इन्फेक्शन लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो वह आसपास की नसों और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है। युवक के मामले में इन्फेक्शन इतना बढ़ गया कि कान और दिमाग के बीच की हड्डी तक प्रभावित हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब इन्फेक्शन चेहरे की नस तक पहुंच गया। इसके कारण युवक का चेहरा टेढ़ा होने लगा। चेहरे की मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पा रही थीं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति को मेडिकल भाषा में फेशियल नर्व पैरालिसिस कहा जाता है।
सुनने की क्षमता भी होने लगी कमजोर
इन्फेक्शन बढ़ने के साथ युवक की सुनने की क्षमता भी प्रभावित होने लगी। शुरुआत में उसे हल्की परेशानी महसूस हुई, लेकिन बाद में आवाजें साफ सुनाई देना बंद होने लगा। कान से लगातार मवाद निकलने की समस्या भी बनी रही। विशेषज्ञों के मुताबिक कान में लंबे समय तक इन्फेक्शन रहने से ईयरड्रम और अंदर की हड्डियां खराब हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज हमेशा के लिए सुनने की क्षमता खो सकता है।
Indore MGM मेडिकल कॉलेज में हुआ इलाज

युवक की हालत बिगड़ने पर उसे Indore के MGM मेडिकल कॉलेज के ENT विभाग में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तुरंत सर्जरी करने का फैसला लिया। डॉक्टरों की टीम ने कई घंटे तक जटिल ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान संक्रमित हिस्से और सड़ी हुई हड्डियों को हटाया गया। डॉक्टरों ने चेहरे की नस और दिमाग की परत को सुरक्षित रखने की कोशिश की। ऑपरेशन के बाद युवक की हालत में सुधार बताया गया।
डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी
ENT विशेषज्ञों का कहना है कि कान खुद अपनी सफाई करने में सक्षम होता है। बार बार कान में पिन, चाबी, माचिस की तीली या अन्य नुकीली चीजें डालना बेहद खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक कई लोग कान साफ करने के लिए ईयरबड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कान के अंदर की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और छोटी सी चोट भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे लक्षण बताए हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर कान से लगातार पानी या मवाद निकले, सुनाई कम दे, चक्कर आए या चेहरे में कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। बच्चों में बार बार सर्दी जुकाम और कान बहने की समस्या को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर इलाज से बड़े खतरे को टाला जा सकता है।
कान साफ करने का सही तरीका क्या है
डॉक्टरों के अनुसार कान में किसी भी प्रकार की नुकीली चीज नहीं डालनी चाहिए। अगर कान में ज्यादा वैक्स जमा हो जाए या खुजली महसूस हो तो खुद इलाज करने की बजाय ENT विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कान में तेल या घरेलू दवाएं डालना भी नुकसानदायक हो सकता है। कई बार लोग इंटरनेट या घरेलू नुस्खों के आधार पर इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे इन्फेक्शन और बढ़ जाता है।
Indore का यह मामला उन लोगों के लिए बड़ी सीख है जो रोजाना कान साफ करने के लिए पिन, चाबी या दूसरी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। थोड़ी सी सावधानी गंभीर इन्फेक्शन और स्थायी नुकसान से बचा सकती है।डॉक्टरों की सलाह साफ है कि कान में किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर घरेलू उपायों की बजाय विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। समय पर इलाज ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
