Rewa (मध्य प्रदेश) से सामने आए एक वायरल वीडियो ने छह पुलिस ट्रेनी आरक्षकों को कारण बताओ नोटिस के कागज़ थमवा दिए हैं। यह मामला तभी सुर्खियों में आया जब इंस्टाग्राम पर एक रील वीडियो काफी तेजी से वायरल होने लगी, जिसमें पुलिस की वर्दी पहनकर कुछ युवा कांस्टेबल मज़ाकिया अंदाज़ में डायलॉग बोलते दिखाई दिए। इस वायरल रील ने विभागीय नियमों और अनुशासन के उल्लंघन के चलते उच्च अधिकारियों की नाराज़गी को जन्म दिया है और अब इन सभी आरक्षकों से जवाब मांगा जा रहा है।
क्या हुआ था रील में?
वीडियो में दिख रहा है कि Rewa पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे छह नए कांस्टेबलों ने वर्दी पहन रखी है और उन्होंने एक ट्रेंडिंग ऑडियो के साथ लिप-सिंक किया है जिसमें कहा जाता है कि “शक्ल अच्छी नहीं तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है ना… पैसे नहीं तो क्या हुआ, मंथली तो आता है ना… कपड़ा नहीं तो क्या हुआ, वर्दी तो है ना…।”
वीडियो को मज़ाक के रूप में बनाया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा गया और कई लोगों ने इसे बढ़ चढ़ कर शेयर किया। वायरल होते ही वीडियो की चर्चा विभाग के आला अधिकारियों तक पहुँच गई।
विभाग का रुख और नियमों का उल्लंघन
पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया क्योंकि यह घटना प्रशिक्षण के दौरान वर्दी में की गई थी और सोशल मीडिया पर शेयर की गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वर्दी में रील या वीडियो बनाना और उसे सार्वजनिक रूप से पोस्ट करना विभागीय नियमों और अनुशासन के खिलाफ है। इसी उल्लंघन को देखते हुए प्रशिक्षण शाला के पुलिस अधीक्षक ने सभी छह ट्रेनीज़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
पुलिस मुख्यालय भोपाल से पहले ही यह निर्देश निकाला जा चुका था कि बिना अनुमति कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में वीडियो या रील नहीं बनाएगा और न ही उसे सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर वायरल करेगा। इन निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में विभाग कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
कौन हैं वे ट्रेनी आरक्षक?
वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले सभी छह ट्रेनी आरक्षकों की पहचान अलग-अलग जिलों से हुई है। इनमें शामिल हैं अनिल (देवास), आनंद (इंदौर), प्रदीप यादव (उज्जैन), राज कुमार (उज्जैन), गोनू सतबाढ़िया (उज्जैन), और सुरजीत गर्ग (विदिशा)। ये सभी वर्तमान में रीवा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
जब से यह वीडियो वायरल हुआ है, सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं। कुछ लोग इसे केवल मनोरंजन और मज़ाक के रूप में देख रहे हैं जबकि कुछ लोग इसका उत्तरदायित्व और अनुशासनहीनता पर सवाल उठा रहे हैं। एक उपयोगकर्ता ने कमेंट किया कि अगर यही कुछ कोई उच्च पदस्थ व्यक्ति करता तो शायद कोई सवाल नहीं उठता लेकिन नए ट्रेनीज़ के लिए तुरंत कार्रवाई की जा रही है। वहीं दूसरे पक्ष के लोग इसका समर्थन करते हुए कहते हैं कि यह केवल एक फ़नी रील थी और इससे किसी के अधिकारों या सुरक्षा को नुकसान नहीं पहुँचा।
पुलिस विभाग की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि इन सभी ट्रेनीज़ को अपने व्यवहार का स्पष्टीकरण देना होगा। उनके जवाब के बाद बेहतर निर्णय लिया जाएगा कि उन्हें कोई सख्त दंड दिया जाना चाहिए या नहीं। विभाग अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अनुशासन और गरिमा बनाए रखी जाए और कोई भी रील या वीडियो प्रशिक्षण के समय वर्दी पहनकर न बनवाई जाए।
यह मामला यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली चीज़ें केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि कभी-कभी यह लोगों के करियर और नियमों पर भी प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी प्रोफ़ेशनल भूमिका और सोशल मीडिया गतिविधियों के बीच सावधानी किस तरह बरतनी चाहिए।
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