Jitu Munda ने बहन की कब्र पक्की बनवा दी है। 11.50 लाख रुपए खाते में आ चुके हैं। कभी Jitu नहीं पहने, अब जूते-चप्पल और कपड़ों का ढेर लग गया है। क्योंझर जिले के दियानली गांव में लोगों का तांता लगा है। सब वही कहानी बार-बार पूछते हैं। Jitu सभी को पूरी-पूरी सुनाता है। कब्र के सामने जाकर बहन से माफी भी मांगता है। लुंगी और बनियान में ही जिंदगी कट रही थी। कई कुर्ता-पाजामा और धोती मिल गई है। मदद की होड़ मची है। खाने-पीने का सामान इतना जमा हो गया है कि छह माह चल सकता है।
बहुत ज्यादा मिल गया
अब तक Jitu अकेला था… लेकिन दो रिश्तेदार भी साथ हैं। खुद को मां के परिवार का बताते हैं। बचपन के कुछ किस्से भी सुना रहे हैं। रिश्तेदार लगातार मिलने आ रहे हैं। Jitu का कहना है कि अब मैं भीड़ से थक गया हूं। 60 बरस का हूं… दो वक्त का खाना और दवाई चाहिए। बहुत ज्यादा मिल गया है। जब बैंक जाता हूं, ब्रांच वाले अलर्ट हो जाते हैं। कुछ मजाक उड़ाते हैं, कुछ डरते भी हैं। लिखना-पढऩा नहीं आता। बैंक वाले ही पर्ची भी भर देते हैं।
बहन की कब्र पक्की बनवाई
उस वाकये के बाद दो बार पैसे निकाले हैं। जिंदगी इतनी आसान कि जैसे सपना है। बहन की कब्र पक्की बनवाई। अंतिम विदाई ठीक से नहीं दे पाया था। आत्मा को दु:ख पहुंचा होगा, इसीलिए बार-बार माफी मांगता हूं और कब्र की रखवाली करता हूं।
