जमीन की रिजर्व प्राइस रखी 8074 करोड रुपए
विकास करने वाले को मिलेगा जमीन बेचने का भी अधिकार
[8/8, 9:15 AM] Dr Jitendra Jakhetia: इंदौर इंदौर नगर निगम की स्मार्ट सिटी कंपनी के द्वारा एम ओ जी लाइन की 53000 स्क्वायर मीटर जमीन पूंजी क्षेत्र से विकसित करने का फैसला लिया गया है। इस जमीन की रिजर्व प्राइस 8074 करोड रुपए रखी गई है। विकास करने वाले फर्म या एजेंसी को जमीन को बेचने का भी अधिकार दिया जाएगा।
स्मार्ट सिटी कंपनी के द्वारा भारत सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के तहत चिन्हित किए गए क्षेत्र को स्मार्ट बनने का काम किया गया। यह एक अलग बात है कि इस कंपनी के द्वारा 1000 करोड रुपए खर्च किए जाने के बावजूद चिन्हित क्षेत्र में से एक टुकड़ा भी स्मार्ट क्षेत्र के रूप में तब्दील नहीं हो पाया है। इस योजना का कार्य करने के लिए 5 वर्ष की अवधि निश्चित थी। इस अवधि में कोरोना वायरस का संक्रमण कल आ जाने के कारण इस अवधि को 2 साल बढ़ा दिया गया था। इस तरह से इंदौर की स्मार्ट सिटी कंपनी को एडीबी क्षेत्र को स्मार्ट बनाने के लिए 7 साल का समय मिल गया था। यह समय पूरा हो चुका है लेकिन इस स्मार्ट सिटी कंपनी का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बाकी विकास कार्यों के साथ ही साथ एक क्षेत्र को चिन्हित करते हुए उसका री डेवलपमेंट करने का भी प्रोजेक्ट शामिल किया गया था। इसके तहत इंदौर की स्मार्ट सिटी कंपनी के द्वारा एम ओ जी लाइन क्षेत्र को चिन्हित किया गया था। इस क्षेत्र की पूरी सरकारी जमीन को इस योजना में शामिल किया गया था। इस जमीन पर जो सरकार के विभिन्न विभागों के द्वारा निर्माण किए गए थे उन निर्माण को तोड़कर जमीन को खाली जमीन के रूप में तैयार कर लिया गया। इस जमीन पर रीडिवेलपमेंट का कोई काम अभी तक नहीं हो सका है। जमीन को अलग-अलग हिस्से में विभाजित कर विक्रय करने की स्मार्ट सिटी कंपनी के द्वारा बहुत कोशिश की गई लेकिन यह कोशिश भी नाकाम ही रही है।
अब स्मार्ट सिटी कंपनी एक बार फिर री-डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट को आकार देने के लिए मैदान में आ गई है। कंपनी के द्वारा एम ओ जी लाइन की 53000 स्क्वायर मीटर जमीन को कच्ची जमीन से विकसित जमीन के रूप में तैयार करने और फिर उसे विक्रय करने के लिए निजी क्षेत्र को सौपने की पहल की गई है। इस पहल के तहत कंपनी के द्वारा इस जमीन की रिजर्व प्राइस 8074 करोड़ रुपए रखी गई है। जो भी फर्म या डेवलपमेंट एजेंसी जमीन को लेने में रुचि रखती है उसको इस रिजर्व प्राइस से ज्यादा प्राइस का ऑफर स्मार्ट सिटी कंपनी को देना होगा।
स्मार्ट सिटी कंपनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्थ जैन ने बताया कि यह कंपनी इस क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार कर वहां विकास करेगी और उसके पक्ष चाहे तो निर्माण करते हुए उसका संचालन कर विक्रय कर सकेगी। इस तरह से इस कंपनी को जमीन की कीमत के रूप में दी गई राशि को लाभ सहित अर्जित करने का अधिकार होगा। इस बार इस प्रोजेक्ट को सामने रखते हुए इस कार्य को करने की इच्छुक कंपनियों से उनके ऑफर बुलवाए जा रहे हैं। इस संबंध में प्री बिड बैठक का आयोजन 19 अगस्त को दोपहर 3:00 बजे स्मार्ट सिटी कंपनी के कार्यालय नेहरू पार्क पर किया गया है।
स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जब तक इस तरह से विकास के लिए जमीन का विक्रय नहीं होगा तब तक स्मार्ट सिटी के बाकी बचे हुए काम करने के लिए धन अर्जित नहीं हो सकेगा। ऐसे में यह आवश्यक है कि तेजी से जमीन के पीस का विक्रय शुरू हो जाएं। ताकि इससे प्राप्त होने वाले पैसे से कंपनी अपने अधूरे पड़े हुए कामों को पूरा कर सकेगी।
