Dhar | इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित चिकलिया फाटे पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे के दूसरे दिन गुरुवार को पूरा इलाका चीख-पुकार, सन्नाटे और मातम में डूबा रहा। बुधवार रात जो लोग हंसते-मुस्कुराते मजदूरी के लिए घर से निकले थे, गुरुवार सुबह वही कफन में लिपटकर अपने गांव लौटे।
जिला अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद 16 शवों को एंबुलेंस से सेमलीपुरा, नयापुरा, रामपुरा, खूंटपला और चिटियाबालिदा पहुंचाया गया, जहां हर गांव में दिल दहला देने वाले दृश्य देखने को मिले। किसी मां ने बेटे को पुकारा, किसी बच्चे ने मां को आवाज दी, तो किसी पत्नी ने पति को छोड़कर न जाने की गुहार लगाई। एक ही दिन में पांच गांवों के श्मशान घाटों में 16 चिताएं जलीं। नयापुरा में आठ लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार हुआ, जबकि सेमलीपुरा में चार महिलाओं को एक ही चिता पर अंतिम विदाई दी गई।जब सभी की अर्थियां एक साथ गांव से निकाली गईं तो महिलाएं अपनों से लिपटकर रोती रहीं, वे छोड़ने को तैयार नहीं थीं। किसी तरह पुरुषों ने उन्हें संभाला और अर्थियों को ट्रैक्टर-ट्रालियों में रखकर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर गंगा महादेव मुक्तिधाम पहुंचाया गया।
हादसे वाले दिन दादी के साथ
मृतक तनु के पिता उमेश ने बिलखते हुए बताया कि वे धार में काम करते हैं, जबकि उनकी बेटी तनु अधिकतर अपनी दादी के साथ ही रहती थी। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद से ही उनकी मां तनु को अपने से दूर नहीं रखती थी।
हादसे वाले दिन भी वह अपनी दादी के साथ ही गई थी। एक ही हादसे में मां और बेटी दोनों को खो देने का दर्द असहनीय है।मां मुझे छोड़ कर क्यों चली गईसेमलीपुरा में अंतिम यात्रा के दौरान एक मार्मिक दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। अपनी मां को अंतिम विदाई देने जा रहा बेटा विक्रम विलाप करते हुए बेसुध हो गया। वह बार-बार कहता रहा“मम्मी मुझे छोड़कर क्यों चली गईं….अब मेरा ध्यान कौन रखेगा?” ग्रामीणों ने बताया कि विक्रम के पिता की मृत्यु 2011 में हो गई थी और उनके निधन के दो दिन बाद ही विक्रम का जन्म हुआ था। 15 वर्षीय विक्रम वर्तमान में आठवीं कक्षा में पढ़ता है और दादा-दादी के सहारे है।
परिवार के छह लोगों की मौत
नयापुरा गांव इस हादसे से सबसे अधिक प्रभावित हुआ। यहां नौ लोगों की जान गई, जिनमें सात एक ही परिवार से जुड़े थे। ग्रामीणों के अनुसार सभी आपस में सगे काका-बाबा के रिश्ते में थे। एक ही परिवार के इतने लोगों की मौत से पूरा परिवार उजड़ गया। गंगा महादेव मुक्तिधाम में आठ लोगों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
