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Reading: Hanta Virus 23 देशों तक कैसे पहुंचा संक्रमण
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Health

Hanta Virus 23 देशों तक कैसे पहुंचा संक्रमण

क्रूज शिप से फैले मामलों ने बढ़ाई चिंता

Last updated: मई 11, 2026 5:44 अपराह्न
By Divisha 4 सप्ताह पहले
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12 Min Read
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दुनिया अभी कोरोना महामारी के असर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक नए वायरस ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस वायरस का नाम है Hanta Virus। हाल ही में अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप में इस वायरस के कई मामले सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO, यूरोपियन हेल्थ एजेंसियां और कई देशों की सरकारें अलर्ट मोड पर आ गई हैं। सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि इस बार संक्रमण का संबंध उस एंडीज स्ट्रेन से है जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है।

भारत में भी यह खबर तेजी से चर्चा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार 23 देशों में लौटे यात्रियों की निगरानी की जा रही है जबकि दर्जनों संदिग्ध यात्रियों की तलाश अब भी जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है।

क्या है Hanta Virus?

Hanta Virus वास्तव में वायरसों का एक समूह है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृन्तकों के जरिए फैलता है। संक्रमित चूहों की लार, पेशाब और मल के संपर्क में आने से इंसानों में संक्रमण हो सकता है। जब इन सूखे कणों वाली धूल हवा में उड़ती है और कोई व्यक्ति उसे सांस के जरिए अंदर ले लेता है तब वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। इस वायरस से होने वाली बीमारी को Hanta Virus पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। यह बीमारी फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। कई मामलों में मरीज की सांस लेने की क्षमता तेजी से घटने लगती है और स्थिति जानलेवा बन सकती है।

WHO और CDC के अनुसार हंता वायरस के कई स्ट्रेन मौजूद हैं लेकिन अधिकांश स्ट्रेन इंसान से इंसान में नहीं फैलते। वर्तमान में जो स्ट्रेन चिंता का कारण बना हुआ है वह एंडीज वायरस स्ट्रेन है जो दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है और सीमित स्तर पर मानव संक्रमण फैलाने की क्षमता रखता है।

आखिर कहां से शुरू हुआ मामला

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ताजा मामला डच क्रूज शिप एमवी होंडियस से जुड़ा हुआ है। यह जहाज अर्जेंटीना के उशुआइया बंदरगाह से यात्रा पर निकला था। जहाज पर लगभग 147 यात्री और क्रू सदस्य मौजूद थे जो 23 अलग अलग देशों से थे। यात्रा के दौरान कुछ यात्रियों की तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई दिए लेकिन बाद में कुछ यात्रियों की हालत गंभीर हो गई। जहाज पर तीन लोगों की मौत हो गई जिसके बाद जांच शुरू हुई। लैब रिपोर्ट में एंडीज स्ट्रेन के हंता वायरस की पुष्टि हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार संक्रमण का शुरुआती स्रोत संभवतः अर्जेंटीना में रहा जहां यह वायरस पहले से मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ यात्री जहाज पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो चुके थे और बाद में क्लोज कॉन्टैक्ट के कारण वायरस अन्य लोगों तक पहुंचा।

अर्जेंटीना में पहले भी फैल चुका है Hanta Virus

साल 2018 और 2019 में अर्जेंटीना के एपुयेन इलाके में एंडीज Hanta Virus का बड़ा प्रकोप सामने आया था। उस दौरान कई लोग संक्रमित हुए थे और 11 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थानीय प्रशासन को मार्शल लॉ जैसे सख्त प्रतिबंध लगाने पड़े थे। संक्रमित लोगों को लंबे समय तक अलग रखा गया था। उस घटना के बाद वैज्ञानिकों ने पहली बार गंभीरता से यह माना कि एंडीज स्ट्रेन इंसान से इंसान में भी फैल सकता है।

छह हफ्ते क्यों माने जा रहे अहम

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 6 हफ्तों यानी 42 दिनों की निगरानी अवधि को लेकर हो रही है। WHO ने सभी यात्रियों और उनके करीबी संपर्कों को 42 दिन तक मॉनिटर करने की सलाह दी है। दरअसल Hanta Virus का इनक्यूबेशन पीरियड यानी वायरस शरीर में प्रवेश करने और लक्षण दिखने के बीच का समय काफी लंबा हो सकता है। कई मामलों में 2 से 6 हफ्तों के बाद लक्षण दिखाई देते हैं। इसी वजह से स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार यात्रियों की जांच और निगरानी कर रही हैं।
कुछ देशों ने अपने नागरिकों को विशेष मेडिकल फ्लाइट्स के जरिए वापस बुलाया है। कई यात्रियों को अस्पतालों या क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है।

23 देशों तक पहुंची चिंता

क्रूज शिप पर सवार यात्री अलग अलग देशों से थे। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, सिंगापुर और अन्य देशों के नागरिक शामिल थे।

WHO और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अब उन यात्रियों की पहचान करने में जुटी हैं जो जहाज से पहले उतर चुके थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ यात्री आउटब्रेक की पुष्टि होने से पहले ही जहाज छोड़ चुके थे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कुछ यात्रियों तक स्वास्थ्य एजेंसियां तुरंत नहीं पहुंच पाईं क्योंकि वे अलग अलग देशों में जा चुके थे। इसी वजह से लगातार खोज अभियान चलाया गया।

कैसे फैलता है Hanta Virus?

आमतौर पर Hanta Virus संक्रमित चूहों के जरिए फैलता है। ग्रामीण इलाकों, गोदामों, पुराने घरों या ऐसी जगहों पर जहां चूहों की संख्या अधिक होती है वहां संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

संक्रमण फैलने के प्रमुख तरीके:

  • संक्रमित चूहों के मल या पेशाब के संपर्क में आना
  • वायरस वाले धूल कणों को सांस के जरिए अंदर लेना
  • संक्रमित सतहों को छूना
  • बहुत कम मामलों में संक्रमित व्यक्ति के करीबी संपर्क में रहना

विशेषज्ञों के अनुसार एंडीज स्ट्रेन का मानव संक्रमण भी संभव है लेकिन इसके लिए लंबे समय तक नजदीकी संपर्क जरूरी होता है। यही कारण है कि इसे कोरोना जैसा तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं माना जा रहा।

क्या कोरोना जैसी महामारी बन सकता है?

यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। WHO और CDC दोनों ने साफ किया है कि फिलहाल यह स्थिति कोविड जैसी महामारी बनने की नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार एंडीज वायरस का संक्रमण सीमित है और यह सामान्य सामाजिक संपर्क से तेजी से नहीं फैलता। हालांकि वायरस का मोर्टालिटी रेट यानी मृत्यु दर चिंताजनक मानी जाती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसकी मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक बताई गई है। CDC अधिकारियों ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि यह कोविड जैसा एयरबोर्न वायरस नहीं है।

क्या इसका टीका मौजूद है?

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Hanta Virus को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही है कि अभी तक इसका कोई व्यापक रूप से उपलब्ध अप्रूव्ड वैक्सीन नहीं है। कई देशों में रिसर्च चल रही है लेकिन अभी तक ऐसा टीका नहीं बन पाया जिसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार वैक्सीन रिसर्च लंबे समय से फंड की कमी और सीमित मामलों के कारण धीमी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहले इस वायरस पर ज्यादा निवेश हुआ होता तो शायद बेहतर तैयारी की जा सकती थी।

क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण?

Hanta Virus के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। यही वजह है कि शुरुआती चरण में पहचान मुश्किल हो जाती है।

मुख्य लक्षण:

  • तेज बुखार
  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द
  • सिरदर्द
  • उल्टी और मतली
  • कमजोरी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • फेफड़ों में सूजन

गंभीर मामलों में मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। कई मरीजों की हालत अचानक बिगड़ती है।

किन देशों में बढ़ी निगरानी?

ताजा आउटब्रेक के बाद कई देशों ने एयरपोर्ट और हेल्थ सिस्टम पर निगरानी बढ़ा दी है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा ने विशेष मेडिकल टीमें बनाई हैं। कुछ यात्रियों को बायो कंटेनमेंट यूनिट्स में ले जाया गया। अमेरिका ने अपने नागरिकों को विशेष मेडिकल फ्लाइट्स से वापस बुलाकर नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में रखा। स्पेन के टेनेरिफ में जहाज पहुंचने के बाद वहां बड़े स्तर पर मेडिकल ऑपरेशन चलाया गया। यात्रियों को सुरक्षा सूट पहने हेल्थ कर्मचारियों की निगरानी में उतारा गया। जहाज को बाद में पूरी तरह डिसइन्फेक्ट करने की तैयारी शुरू हुई।

क्या भारत के लिए खतरा है?

फिलहाल भारत में इस आउटब्रेक से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डर फैलाने की जरूरत नहीं है लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर निगरानी जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक Hanta Virus आम भीड़ में तेजी से फैलने वाला नहीं है। इसलिए अभी सामान्य लोगों के लिए खतरा कम माना जा रहा है। हालांकि यदि कोई व्यक्ति प्रभावित देशों से लौटे और उसमें लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

WHO ने क्या कहा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस आउटब्रेक को गंभीर जरूर माना है लेकिन ग्लोबल पब्लिक हेल्थ रिस्क को फिलहाल कम बताया है। WHO लगातार प्रभावित देशों के साथ मिलकर मॉनिटरिंग और कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग कर रहा है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल महामारी जैसी स्थिति नहीं है। इसके अलावा लंबा इनक्यूबेशन पीरियड और कई देशों में फैले यात्रियों के कारण मॉनिटरिंग मुश्किल हो गई है। यही वजह है कि WHO और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां तेजी से गाइडलाइंस तैयार कर रही हैं।

लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए

  • चूहों और उनके मल मूत्र से दूरी रखें
  • बंद और धूल भरी जगह साफ करते समय मास्क पहनें
  • संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीबी संपर्क से बचें
  • लगातार बुखार या सांस की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
  • विदेश यात्रा से लौटने पर लक्षण नजर आएं तो जांच कराएं

कोरोना महामारी के बाद दुनिया ने सीखा था कि छोटे संक्रमण भी बड़े संकट में बदल सकते हैं। हंता वायरस ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि नई बीमारियों और जूनोटिक वायरस यानी जानवरों से इंसानों में आने वाले संक्रमणों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

हालांकि फिलहाल वैज्ञानिक और स्वास्थ्य एजेंसियां इस को नियंत्रित मान रही हैं लेकिन यह घटना वैश्विक स्वास्थ्य सिस्टम के लिए एक नई परीक्षा जरूर बन गई है। आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि इसी दौरान पता चलेगा कि वायरस सीमित रहता है या नए मामलों की संख्या बढ़ती है।

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