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Reading: Hormuz Strait पर किसका अधिकार और क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?
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World

Hormuz Strait पर किसका अधिकार और क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?

ऊर्जा मार्ग पर बढ़ता संकट

Last updated: मार्च 20, 2026 3:05 अपराह्न
By Divisha 7 महीना पहले
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6 Min Read
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Hormuz Strait एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ईरान, अमेरिका और अन्य शक्तियों के बीच बढ़ते टकराव ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को रणनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस जलडमरूमध्य पर किसका अधिकार है और युद्ध के हालात में अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है।

Hormuz Strait क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला Hormuz Strait दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस जलडमरूमध्य की चौड़ाई सबसे संकरे हिस्से में लगभग 39 किलोमीटर है, जिससे यह अत्यंत संवेदनशील बन जाता है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा या सैन्य गतिविधि न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी गंभीर असर डाल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून संयुक्त राष्ट्र के तहत Hormuz Strait को अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य माना जाता है। इसका मतलब है कि यह भले ही ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता हो, लेकिन सभी देशों के जहाजों को यहां से गुजरने का अधिकार है।

इस अधिकार को ट्रांजिट पैसेज कहा जाता है। इसके तहत जहाज बिना रुके और लगातार इस मार्ग को पार कर सकते हैं। तटीय देश सामान्य परिस्थितियों में इस आवाजाही को रोक नहीं सकते।

युद्ध के समय लागू होते हैं अलग नियम

जैसे ही क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष शुरू होता है, समुद्री कानून की प्रकृति बदल जाती है। 1994 का सैन रेमो मैनुअल इस स्थिति में मार्गदर्शन देता है।

इस मैनुअल के अनुसार युद्धरत और तटस्थ देशों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाता है। तटस्थ देशों के जहाजों को आमतौर पर सुरक्षित मार्ग का अधिकार बना रहता है। युद्धरत देश तटस्थ जहाजों को निशाना नहीं बना सकते जब तक वे सीधे युद्ध में शामिल न हों। हालांकि वास्तविक परिस्थितियों में इन नियमों का पालन हमेशा नहीं हो पाता और जोखिम बना रहता है।

क्या ईरान Hormuz को बंद कर सकता है?

यह सबसे बड़ा और जटिल सवाल है। अंतरराष्ट्रीय कानून पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सिद्धांत रूप में किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करना स्वीकार्य नहीं माना जाता। लेकिन जब तटीय देश स्वयं संघर्ष का हिस्सा हो जैसे कि ईरान की स्थिति में, तो वह सुरक्षा और सैन्य कारणों का हवाला देकर आवाजाही सीमित कर सकता है।

ईरान अतीत में कई बार यह चेतावनी दे चुका है कि अगर उस पर दबाव बढ़ता है तो वह Hormuz Strait को बंद कर सकता है। हालांकि ऐसा कदम उठाने पर उसे वैश्विक विरोध और संभावित सैन्य प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका और सहयोगी देशों की रणनीति

अमेरिका और उसके सहयोगी देश अक्सर अपने युद्धपोतों के जरिए व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसे एस्कॉर्ट मिशन कहा जाता है।

इस रणनीति का उद्देश्य जहाजों को संभावित हमलों से बचाना होता है। लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। अगर कोई व्यापारी जहाज सैन्य काफिले के साथ चलता है, तो विरोधी देश उसे सैन्य लक्ष्य मान सकते हैं। यानी सुरक्षा की यह व्यवस्था कई बार खतरे को कम करने के बजाय बढ़ा भी सकती है।

तटस्थ देशों के लिए बढ़ती चुनौती

जो देश सीधे इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं, उनके लिए भी स्थिति आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अगर कोई देश अप्रत्यक्ष रूप से किसी एक पक्ष की मदद करता है, तो उसे युद्ध में शामिल माना जा सकता है।इस स्थिति में उसके जहाज और संपत्ति भी हमले के दायरे में आ सकते हैं। इसलिए कई देश अपने व्यापारिक जहाजों के मार्ग बदलने या सुरक्षा बढ़ाने जैसे कदम उठा रहे हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव

Hormuz Strait में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। जैसे ही तनाव बढ़ता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं। इसका प्रभाव भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ता है, जहां ईंधन की कीमतें और महंगाई बढ़ सकती है।

नियम और वास्तविकता में अंतर

अंतरराष्ट्रीय कानून स्पष्ट दिशा जरूर देता है, लेकिन जमीनी हालात कहीं अधिक जटिल होते हैं। युद्ध के दौरान सैन्य रणनीतियां, राजनीतिक हित और सुरक्षा चिंताएं अक्सर कानूनी प्रावधानों से टकरा जाती हैं। तटस्थ जहाज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहते और गलत पहचान या तनाव के कारण हमलों का शिकार हो सकते हैं।

Hormuz Strait आज केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। यहां होने वाली हर हलचल का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय कानून जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने की कोशिश करता है, लेकिन जब बड़े देश आमने सामने होते हैं, तो कानून की सीमाएं भी सामने आ जाती हैं। आने वाले समय में यह जलडमरूमध्य वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य रणनीति की सबसे बड़ी परीक्षा बना रहेगा।

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