तेजी से बदलती दुनिया में जहां लोग कम उम्र में ही रिटायरमेंट की योजना बनाने लगते हैं, वहीं Dr. Suri Srimathi ने अपने समर्पण और सेवा भाव से एक अलग ही मिसाल कायम की है। Hyderabad की यह 92 वर्षीय गायनेकोलॉजिस्ट आज भी सक्रिय रूप से मरीजों की सेवा कर रही हैं और अब तक करीब 2 लाख बच्चों की डिलीवरी करवा चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल मेडिकल क्षेत्र में एक बड़ा रिकॉर्ड है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी है।
6 दशक का लंबा मेडिकल सफर: 1950 के दशक से शुरू हुई सेवा
Dr. Suri Srimathi ने अपने करियर की शुरुआत 1950 के दशक के अंत में की थी। उस समय चिकित्सा सुविधाएं बेहद सीमित थीं और अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की कमी हुआ करती थी। अपने शुरुआती वर्षों में उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम किया। कई बार उन्हें बिना पर्याप्त संसाधनों के ही प्रसव कराना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने काम को पूरी ईमानदारी से निभाया।
2 लाख बच्चों के जन्म में अहम भूमिका
अपने लंबे करियर में Dr. Suri Srimathi ने लगभग 2,00,000 बच्चों की डिलीवरी करवाई है। यह आंकड़ा अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर मातृत्व सेवाएं देना आसान नहीं होता। उनके हाथों जन्मे बच्चों की संख्या इतनी अधिक है कि कई परिवारों की दो पीढ़ियां तक उनके मरीज रह चुकी हैं। यह दर्शाता है कि लोगों का उन पर कितना गहरा भरोसा है।
92 की उम्र में भी नहीं रुकी सेवा
आमतौर पर इस उम्र में लोग आराम करना पसंद करते हैं, लेकिन Dr. Suri Srimathi आज भी नियमित रूप से मरीजों को देखती हैं। वह अपने दिन की शुरुआत योग से करती हैं और उसके बाद अस्पताल में अपनी जिम्मेदारियां निभाती हैं। हाल के वर्षों में भी उन्होंने जटिल मामलों में सफलतापूर्वक डिलीवरी करवाई है, जिससे यह साबित होता है कि उनका अनुभव आज भी उतना ही प्रभावी है।
बदलते मेडिकल दौर की साक्षी: बैलगाड़ी से आधुनिक अस्पताल तक का सफर
Dr. Suri Srimathi ने भारत में मातृत्व सेवाओं के विकास को करीब से देखा है। एक समय था जब मरीज गांवों से बैलगाड़ियों में अस्पताल पहुंचते थे और जांच के लिए सीमित साधन होते थे। आज वही चिकित्सा क्षेत्र आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ टीमों से लैस है। इस पूरे बदलाव की साक्षी बनना अपने आप में एक ऐतिहासिक अनुभव है।
मरीजों के साथ भावनात्मक जुड़ाव
Dr. Suri Srimathi अपने काम को सिर्फ एक पेशा नहीं मानतीं, बल्कि इसे एक जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम समझती हैं। वह हर मां और नवजात की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। किसी भी जटिल स्थिति में वह पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ निर्णय लेती हैं।
विवादों से भी रहा सामना
नाम के गलत इस्तेमाल का मामला
कुछ समय पहले उनका नाम एक फर्टिलिटी सेंटर से जुड़े विवाद में सामने आया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उस संस्थान से उनका कोई संबंध नहीं है और उनके नाम का गलत तरीके से उपयोग किया गया। इस घटना के बावजूद उनकी साख और विश्वसनीयता पर कोई असर नहीं पड़ा।
Dr. Suri Srimathi ने अपने जीवन को जिस तरह समाज की सेवा के लिए समर्पित किया है, वह हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। उनकी यह यात्रा केवल एक डॉक्टर की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सच्ची सेवा और समर्पण से किसी भी क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। 92 साल की उम्र में भी उनका सक्रिय रहना यह साबित करता है कि जुनून और कर्तव्य के सामने उम्र की कोई सीमा नहीं होती।
