Indore। Indore नगर निगम परिषद की बैठक में कल भागीरथपुरा के लोगों के द्वारा किए गए हंगामे से निगम सकते में आ गया है। कल रात को दर्शक दीर्घा के सभी पास निरस्त कर दिए गए और हर पार्षद के नाम पर अलग से एक एक पास जारी कर दिया गया। नगर निगम परिषद की बैठक में कल जब श्रद्धांजलि दी जा रही थी उस समय पर दर्शक दीर्घा में भागीरथपुरा के दूषित जल हादसे के पीड़ित परिवार के सदस्य बैठे हुए थे। इन लोगों ने तत्काल दर्शक दीर्घा में से नारेबाजी शुरू कर दी। इन लोगों ने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के फोटो के साथ पोस्टर लहराएं। अपनी मांग लिखी तख्तियां भी लहराई। जमकर हल्ला मचाया। इस स्थिति के कारण सदन की कार्रवाई रुक गई। नगर निगम के बाउंसर तत्काल दर्शक दीर्घा की तरफ दौड़े। वहां पर मौजूद भागीरथपुरा के लोगों के साथ बाउंसर धक्का मुक्की करने लगे। उन्हें वहां से निकालने की कोशिश करने लगे। वहां पर शहर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अमित पटेल बैठे हुए थे। वे इन नागरिकों के समर्थन में खड़े हो गए।
परिषद की बैठक में हंगामा का दृश्य बन गया था। भाजपा की पार्षद आरोप लगने लगी की नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के द्वारा इशारा किया जाने के बाद दर्शक दीर्घा से यह हंगामा शुरू हुआ है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव मैदान में उतर गए। उन्होंने भी कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष की घेराबंदी करने की कोशिश की। इसी बीच सभापति मुन्ना लाल यादव ने माइक से निर्देश दिया कि इन नागरिकों के साथ बदतमीजी नहीं की जाए। उन्हें वहां से निकाला नहीं जाएं बल्कि बैठा दिया जाएं।
इस हंगामा की स्थिति को जैसे तैसे संभाला गया। इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा और उसके पार्षद बैक फुट पर खड़े हुए थे। कांग्रेस ने खेल कर दिया। बाद में महापौर के द्वारा हर मृतक के परिवार को नगर निगम में आउटसोर्स के आधार पर नौकरी देने का ऐलान किया गया। यह ऐलान ऐसे समय पर किया गया जब पूरे सदन में हंगामा हो चुका था। इस घोषणा की टाइमिंग गलत रही जिसके चलते हुए यह घोषणा महत्व नहीं पा सकी। इस घटनाक्रम के बाद कल शाम को निगम के पदाधिकारी और भाजपा संगठन सक्रिय हुआ। तत्काल फैसला लिया गया की दो दिन की परिषद की बैठक के लिए दर्शक दीर्घा के जो पास जारी किए गए थे उन्हें निरस्त किया जाता है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि भागीरथपुरा के लोग किसी के माध्यम से पास हासिल करके ही दर्शक दीर्घा तक पहुंचे थे।
सभापति कार्यालय से यह फैसला लेने के साथ ही रात में सभी पार्षदों के पास आज के दिन की परिषद की बैठक के लिए दर्शक दीर्घा का एक-एक पास भेजा गया। बाद में लकीर पीटने से अब क्या होगा। जो होना था वह तो कल हो गया। राजनीति में कभी सीन को रिपीट नहीं किया जाता है। इसके बाद भी आशंका के चलते हुए भाजपा की ओर से यह कदम उठाया गया। बैठक कक्ष में बैठे पार्टी के पदाधिकारीवैसे तो नगर निगम परिषद की बैठक की एक गरिमा होती है। इस बैठक में बैठक कक्ष में अधिकारी और पार्षद ही बैठते हैं। पार्षद पति और पार्षद के रिश्तेदारों के लिए भी दर्शक दीर्घा ही होती है। इसके बाद भी भाजपा संगठन में नगर इकाई में नियुक्त की गई महिला पदाधिकारी कल इत्मीनान के साथ इस बैठक के कक्ष में इधर से उधर घूमती रही और अधिकारियों के लिए लगाई गई कुर्सी पर आराम से बैठकर बैठक की कार्रवाई भी देखती रही। बैठक के दौरान पार्षदों के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर काना फूसी रहीं।
गुस्से में आ गए महापौरवैसे तो महापौर
पुष्यमित्र भार्गव को हमेशा से शांति से रहने वाला नेता समझा जाता है। कल हुए घटनाक्रम के दौरान महापौर भी गुस्से में आ गए । उनके स्वर तीखे थे। लहजा आक्रामक था। अंगुली कांग्रेस के पार्षदों की तरफ उठ रही थी।
