Indore | बावडी हादसा हुआ तो कुएं, बावड़ी की याद आई, शुरू किया अभियान, नतीजा सिफर
भागीरथपुरा हादसा हुआ तो पानी की शुद्धता की याद आई, अभियान चलाया, परिणाम कुछ नहीं
बंगाली चौराहा पर अग्निकांड हादसा हुआ तो अब भवनों में अग्निशमन यंत्र लगाने का अभियान शुरू जागरूक नागरिकों के शहर Indore में जब कोई हादसा होता है तो फिर Indore जाग जाता है। जिला प्रशासन नगर निगम मिलकर अभियान शुरू करते हैं। ऐसे अभियान का कोई परिणाम निकले या नहीं निकले, लेकिन महीने दो महीने का समय जरूर अभियान चलाने में निकाल दिया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस समय भी जिला प्रशासन और नगर निगम के द्वारा मिलकर बिल्डिंगों में अग्निशमन यंत्रों की जांच का अभियान शुरू किया गया है।
30 मार्च 2023 को Indore के पटेल नगर स्थित बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में रामनवमी उत्सव के दौरान एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब बावड़ी की छत (स्लैब) ढहने से 36 लोगों की मौत हो गई और 16 से अधिक लोग घायल हो गए। अत्यधिक भीड़ के कारण पुराने निर्माण की छत टूट गई थी। इस घटना के बाद सबसे पहले विवाद तो इस घटना की जिम्मेदारी के निर्धारण को लेकर शुरू हुआ। इसके बाद नगर निगम और जिला प्रशासन के द्वारा संयुक्त रूप से अभियान के माध्यम से पूरे शहर में कुएं बावड़ी की सुरक्षा को चेक करने और उनकी सफाई कर उन्हें बेहतर बनाने का काम शुरू किया गया। वैसे भी हर साल बारिश के मौसम के पहले गर्मी के मौसम में कुए बावड़ी की सफाई के नाम पर Indore नगर निगम करोड़ों रुपए की राशि खर्च करता है। इनमें से किसी भी कुएं, बावड़ी के पानी का ना तो पेयजल के रूप में उपयोग होता है और ना ही हरित क्षेत्र तैयार करने में कोई उपयोग हो पाता है। इस घटना के बाद कुछ महीने तक अभियान चलाकर बंद कर दिया गया।
भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के अंत में दूषित पानी की आपूर्ति के कारण एक बड़ा स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हुआ, जिससे उल्टी-दस्त के कारण बड़ी संख्या में लोगों को बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन लोगों में से 36 लोगों की मौत हो गई। नर्मदा पाइप लाइन में ड्रेनेज लाइन के मिलने से यह दूषित जल हादसा हुआ। इस घटना के बाद पूरे शहर में नागरिकों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए अभियान शुरू किया गया। नगर निगम के द्वारा कई स्थानों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। घोषणा की गई की सीएम हेल्पलाइन और 311 एप पर दूषित पानी आने की जो भी शिकायत होगी उनका त्वरित निराकरण किया जाएगा। राज्य सरकार ने भी हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई के साथ अलग से जल सुनवाई भी शुरू करवा दी। इस पूरे अभियान के बावजूद आज भी पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायत Indore से ही आती है।
हाल ही में 18 मार्च को बंगाली चौराहा के पास बृजेश्वरी एनएक्स कॉलोनी में मनोज पुंगलिया के घर में लगी आग में आठ लोगों की मौत हो गई। आग लगने के कारण को लेकर अभी तक विभाग की स्थिति बनी हुई है। शुरुआत में माना गया था कि इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट से आग लगी है। बाद में परिवार के सदस्यों के बयान बदलते गए। बिजली कंपनी का आज भी दावा है कि आपका कारण वाहन की चार्जिंग के दौरान वह शॉर्ट सर्किट ही है। इस घटना के बाद भावनाओं में आग से सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख मुद्दा बन गया।
जिस स्थान पर घटना हुई वह कोई बहु मंजिला इमारत या व्यापारिक स्थान नहीं था। वह तो निजी बंगला था। इस घटना के बाद अब फिर से जिला प्रशासन और नगर निगम ने शहर के तीन मंजिला और उससे ज्यादा ऊंचाई वाले भवनों में आग से बचाव के उपकरण के लिए अभियान शुरू किया है। शुरुआती दौर में सभी भवन को 15 दिन का वक्त दिया गया है कि वह इस समय पर अपने भवन में आग से बचने के उपकरण लगवा लें। इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि जिन इमारत में यह उपकरण नहीं लगाए जाएंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। अब इस हादसे के बाद यह एक नया अभियान आकार लेता हुआ नजर आ रहा है।
बाक्स पिछले 2 साल में भी चलाया गया है अग्निशमन यंत्र का अभियान यह कोई पहला मौका नहीं है जब जिला प्रशासन और नगर निगम के द्वारा इमारत में अग्निशमन यंत्र लगवाने के लिए अभियान शुरू किया गया हो। वर्ष 2024 में मार्च के महीने से तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देशन में यह अभियान चलाया गया था। उस समय पर जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम और नगर निगम के भवन अधिकारी तथा अग्निशमन अधिकारी के द्वारा मिलकर उन भवनों को सील करने की कार्रवाई की गई थी जिनके द्वारा समय दिए जाने के बावजूद अग्निशमन यंत्र नहीं लगाए गए थे। कुछ महीने चलने के बाद यह अभियान बंद हो गया। जब अभियान चल रहा था तब जरूर कुछ भावनाओं को सील करने की कार्रवाई भी की गई थी।
इसके बाद पिछले वर्ष यानी 2025 के अप्रैल माह में भी फिर से यही अभियान चलाया गया था। इसमें G+3 भवनों, बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक परिसरों में अग्निशमन यंत्र लगाना और फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। इस वर्ष में इस अभियान के दौरान विशेष जागरूकता सप्ताह, मॉक ड्रिल किए गए। इस वर्ष में भी कुछ कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने कुछ भवनों का दौरा किया। कुछ भवन निर्माता को चेतावनी दी गई। सभी को अग्निशमन यंत्र लगाने के लिए वक्त दिया गया और अभियान समाप्त हो गया।
यह इतिहास अब एक बार फिर दोहरा रहा है। इस बार भी बंगाली चौराहा के पास की घटना के कारण शहर की सभी इमारत की जांच का अभियान शुरू किया जा रहा है। यह जांच हो उसके पहले फिर से भवन निर्माता को भवन में आग से बचाव के उपकरण लगाने के लिए 15 दिन का वक्त दिया जा रहा है। अब हो सकता है कि 2025 की तरह उक्त वक्त देने के साथ ही यह अभियान समाप्त हो जाएं या फिर 2024 की तरह कुछ भवनों को सील करने की कार्रवाई तक यह अभियान निरंतर रहें।
