तापमान लगातार 40 डिग्री से अधिक रहने से लू-डिहाइड्रेशन के केस बढ़ गए हैं। एमवायएच की ओपीडी में 20 से 25 फीसदी ज्यादा मरीज पहुंचने लगे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार गर्मी अचानक बढ़ गई है, जिससे शरीर को अनुकूल होने का समय नहीं मिला। हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक गर्मी का असर सबसे ज्यादा है। इस दौरान शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और कई मरीज उल्टी, चक्कर, तेज बुखार की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। कई मामलों में ड्रिप और ऑक्सीजन सपोर्ट देना पड़ रहा है।
पहले से अस्थमा, हार्ट और शुगर के मरीज ज्यादा
5 साल से कम उम्र के बच्चों में पानी की कमी जल्दी हो रही है, वहीं 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में हीट सहन करने की क्षमता कम होने से हालत तेजी से बिगड़ रही है। पहले से अस्थमा, हार्ट और शुगर के मरीज ज्यादा संवेदनशील हैं। लगातार पसीना निकलने के बावजूद पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट नहीं लेने से शरीर का बैलेंस बिगड़ रहा है। यही कारण है कि सामान्य कमजोरी से सीधे हीट स्ट्रोक तक के केस सामने आ रहे हैं।
