भोपाल। Madhya Pradesh में भू-जल खराब होने की रिपोर्ट सामने आई है। डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, सिवनी सहित 10 जिलों के गांवों में गंदे पानी से बच्चों के दांत खराब हो रहे हैं। लाइलाज बीमारियां हो गई हैं। फ्लोरिड और डोलोमाइट की मात्रा बढऩे का दावा है।
बीते पांच साल में दांत की बीमारी से परेशान होने वाले बच्चों की तादाद 46 फीसद बढ़ी है। गांव वाले कह रहे हैं कि हम हैंडपंप और दूसरे जरियों से आने वाला पानी पीने को मजबूर हैं। कहीं बच्चों के दांत में सडऩ लग रही है, तो कहीं दांत कमजोर होकर टूटने लगे हैं। सेहत विभाग को भी खबर कर दी, लेकिन सिर्फ दिलासा मिलता है।
क्या कह रहे अधिकारी
सेहत विभाग के अधिकारी मनोज भास्कर ने कहा कि हां, कुछ लोगों से बात हुई है, लेकिन लिखित शिकायत नहीं मिली। हमने कुछ एहतियात भी किए हैं। परीक्षण करवा रहे हैं। मसूड़ों पर सफेद दाग और जलन की शिकायत भी हुई है। डिंडौरी के लालबारा पोतलपानी में ज्यादा मामले हुए हैं। यहीं के लोकेंद्र उमरे कह रहे हैं कि ज्यादातर इलाके पिछड़े हैं। थोड़े-बहुत पर तो किसान, मजदूर ध्यान ही नहीं देते, लेकिन अब हर घर में बच्चे परेशान हैं। खेती का काम करें या बार-बार इन्हें अस्पताल लेकर जाएं।
डॉक्टर क़ी राय…
दांत के डॉक्टर सुदीप फालके मान रहे हैं कि हां, बच्चों में बीमारी बढ़ रही है। पहले हजारों में एक केस होता था, अब कई बच्चे बीमार हैं। मसूड़ों पर होने वाले सफेद दाग, खून में गड़बड़ होने से भी हो जाते हैं। गंदा पानी ही वजह है। हड्डियां कमजोर होने की भी शिकायत है। शक है कि जो शिकायतें अभी छह-सात जिलों से आ रही हैं, कई और जगह हो सकती हैं। हर हफ्ते चार-पांच मरीज आ रहे हैं।
गांव वालों का कहना है कि हर तरफ बढ़ती फैक्टरियां और केमिकल पानी में मिलने से बीमारी हो रही है। हमें तो लगा था कि नई फैक्टरी लगेंगी, तो हमारा कुछ भला होगा, लेकिन अब तो परेशानी दुगनी हो गई है। माह के तीस दिन काम भी नहीं मिलता है और बच्चे भी बीमार पड़ रहे हैं। इंदौर का भागीरथपुरा कांड और भोपाल के कई इलाकों से गंदा पानी होने की खबर आम होने के बाद डर यह भी है कि कहीं जान पर न बन आए।
