इंदौर शहर के अलग-अलग कॉलेज में अलग-अलग पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले 13000 विद्यार्थियों के खाते में कल उनकी स्कॉलरशिप का पैसा आ गया। इस पैसे का यह विद्यार्थी पूरे साल से इंतजार कर रहे थे। इंदौर में विद्यार्थियों की समस्या को लेकर आंदोलन करने वालों ने 24 घंटे पहले ही कलेक्टर शिवम वर्मा के समक्ष इस समस्या को रखा था।
राज्य सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है। इसके लिए विभिन्न पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के द्वारा प्रवेश लेने के तत्काल बाद स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर दिया जाता है। पिछले शैक्षणिक सत्र में जिन विद्यार्थियों ने आवेदन किया था उन्हें पूरे साल स्कॉलरशिप के आने का इंतजार करना पड़ा। ऐसी स्थिति में कॉलेज की फीस से लेकर सारे खर्चे विद्यार्थी को अपने पेरेंट्स के माध्यम से जेब से ही करना पड़े। इस मामले को लेकर विद्यार्थियों के द्वारा पिछले पूरे साल के दौरान अलग-अलग मौके पर इस शिकायत को उठाया था। कुछ विद्यार्थियों के द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर भी इस बारे में शिकायत कर दी गई थी। शिकायतों के इस पूरे सिलसिले के बावजूद कोई परिणाम नहीं निकल पाया था।
मंगलवार के दिन इंदौर के विद्यार्थियों के नेता अरुण बडोले ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा से चर्चा की थी। इस चर्चा में उन्होंने कलेक्टर के समक्ष पूरे साल में स्कॉलरशिप नहीं आने का मामला रखा था। इसके साथ ही यह कहा गया था कि स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों के लिए अपने शिक्षण को निरंतर रख पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इस शिकायत के मिलने के बाद कलेक्टर के द्वारा राज्य सरकार के स्तर पर भोपाल इस मामले में चर्चा की गई थी। कलेक्टर की ओर से विद्यार्थियों की आवाज को भोपाल तक पहुंचाए जाने का यह परिणाम हुआ कि कल बुधवार को ही इन विद्यार्थियों के बैंक खाते में स्कॉलरशिप की राशि आ गई।
बडोले ने बताया कि इंदौर में 13000 विद्यार्थियों के खाते में स्कॉलरशिप की राशि आ गई है। किसी विद्यार्थी के खाते में ₹20000 आए हैं तो किसी के खाते में ₹60000 आए हैं। जिस विद्यार्थी के कोर्स की जितनी फीस थी उसके हिसाब से उसके खाते में स्कॉलरशिप की राशि आई है। यह राशि आ जाने के कारण पिछले दिनों इंदौर के भंवरकुआ चौराहे पर आंदोलन करने वाले विद्यार्थियों में खुशी और संतोष की स्थिति बन गई है। ध्यान रहे की कलेक्टर से चर्चा के दौरान इन विद्यार्थियों की गैस सिलेंडर की एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया था। अब स्कॉलरशिप की राशि भी आ जाने से इन विद्यार्थियों को यह लगा है कि उनका आंदोलन सफल रहा है।
